7156863209947891,DIRECT,fec0942fa0 रक्त प्लेटलेट्स बिना न्यूक्लियस कैसे काम करती हैं?

रक्त प्लेटलेट्स बिना न्यूक्लियस कैसे काम करती हैं?

 


रक्त प्लेटलेट्स बिना न्यूक्लियस कैसे काम करती हैं?



रक्त -प्लेटलेट्स- बिना- न्यूक्लियस- कैसे- काम- करती -हैं?



हमारे रक्त में ऐसी कोशिकाएं तैरती हैं जिनके पास न तो कोई न्यूक्लियस (केंद्रक) है और न ही डीएनए फिर भी वे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक, रक्तस्राव रोकने का काम करती हैं। ये हैं रक्त प्लेटलेट्स (platelets), जिन्हें थ्रोम्बोसाइट (thrombocyte) भी कहा जाता है-। एक सामान्य व्यक्ति के रक्त में प्रति माइक्रोलीटर लगभग 1.5 से 4 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। ये अत्यंत सूक्ष्म, द्वि-उत्तल डिस्क के आकार की कोशिकाएं हैं, जिनका व्यास मात्र 2-3 माइक्रोमीटर होता है।

प्लेटलेट्स को लंबे समय तक केवल "कोशिका के टुकड़े" समझा जाता था बिना न्यूक्लियस के ये रक्त कण केवल थक्का बनाने का काम करते हैं, ऐसी मान्यता थी। परंतु आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया है कि बिना न्यूक्लियस के भी प्लेटलेट्स अत्यंत जटिल और बहुआयामी कार्य करती हैं। वे न केवल (hemostasis) में भाग लेती हैं, बल्कि प्रतिरक्षा (immunity), सूजन (inflammation), घाव भरने और यहां तक कि कैंसर की प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

आज का यह ब्लॉग लेख विज्ञान की उस रोचक जानकारियों को उजागर करेगा कि आखिर बिना न्यूक्लियस के ये छोटी-सी कोशिकाएं इतने सारे कार्य कैसे कर पाती हैं।

प्लेटलेट्स क्या हैं?



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प्लेटलेट्स रक्त के तीन प्रमुख घटकों (लाल रक्त कोशिकाएं, श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स) में सबसे छोटी होती हैं। इन्हें "बिम्बाणु" भी कहा जाता है। विशेष बात यह है कि प्लेटलेट्स पूरी तरह से न्यूक्लियस-रहित (anucleate) होती हैं इनमें कोई केंद्रक नहीं होता, न ही कोई जीनोमिक डीएनए। यह विशेषता प्लेटलेट्स को स्तनधारी प्राणियों (mammals) में ही पाई जाती है। गैर-स्तनधारी कशेरुकियों (जैसे मछली, पक्षी, सरीसृप) में रक्तस्राव रोकने  का कार्य न्यूक्लियस युक्त "थ्रोम्बोसाइट" (thrombocyte) कोशिकाएं करती हैं।

प्लेटलेट्स वास्तव में कोशिका के पूर्ण स्वरूप नहीं हैं, बल्कि ये बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में पाई जाने वाली विशाल कोशिकाओं मेगाकैरियोसाइट्स (megakaryocytes) के साइटोप्लाज्म (कोशिकाद्रव्य) के टुकड़े हैं। एक मेगाकैरियोसाइट से लगभग 1000 से 3000 प्लेटलेट्स बन सकते हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 1200 अरब (1.2 × 10¹¹) नई प्लेटलेट्स का निर्माण करता है

प्लेटलेट्स का औसत जीवनकाल 7 से 10 दिनों का होता है-। इसके बाद ये यकृत (liver) और प्लीहा (spleen) में नष्ट कर दी जाती हैं।

प्लेटलेट्स का जन्म



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यह समझना आवश्यक है कि प्लेटलेट्स बिना न्यूक्लियस के कैसे काम करती हैं, इसके लिए हमें उनके जन्म की प्रक्रिया को समझना होगा। प्लेटलेट्स का निर्माण बोन मैरो में हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल (रक्त निर्मात्री मूल कोशिका) से शुरू होता है। यह कोशिका पहले मेगाकैरियोसाइट में परिवर्तित होती है, जो एक अत्यंत विशाल कोशिका है। मेगाकैरियोसाइट परिपक्व होकर अपनी कोशिका झिल्ली पर अनेकों उभार (protrusions) बनाती है। ये उभार धीरे-धीरे टूटकर अलग हो जाते हैं और रक्तप्रवाह में छोटे-छोटे प्लेटलेट्स के रूप में प्रवेश कर जाते हैं।

इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, मेगाकैरियोसाइट अपने सारे "सामान" मैसेंजर RNA , प्रोटीन, राइबोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया और अन्य कोशिकांग प्लेटलेट्स को उपहार स्वरूप दे देती है यही कारण है कि प्लेटलेट्स के पास न्यूक्लियस न होने के बावजूद भी वे कार्य कर सकती हैं उन्हें अपनी "माँ" कोशिका से सारी आवश्यक मशीनरी विरासत में मिली होती है।

बिना न्यूक्लियस के प्रोटीन संश्लेषण



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न्यूक्लियस की अनुपस्थिति में प्रोटीन कैसे बनते हैं?

आमतौर पर किसी भी कोशिका में प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया न्यूक्लियस से शुरू होती है न्यूक्लियस में मौजूद DNA से mRNA बनता है (transcription), और यह mRNA राइबोसोम तक जाकर प्रोटीन का निर्माण करता है (translation)। परंतु प्लेटलेट्स में कोई न्यूक्लियस नहीं है, कोई DNA नहीं है, और कोई transcription नहीं हो सकता

तो फिर प्लेटलेट्स प्रोटीन कैसे बनाती हैंइसका उत्तर है प्लेटलेट्स के पास पहले से ही mRNA का एक स्थिर भंडार मौजूद होता है। ये mRNA मेगाकैरियोसाइट से विरासत में मिलते हैं और प्लेटलेट्स के पूरे जीवनकाल (7-10 दिन) तक सक्रिय रहते हैं। वैज्ञानिकों ने चार दशक पहले ही सिद्ध कर दिया था कि परिपक्व प्लेटलेट्स प्रोटीन संश्लेषण कर सकती हैं।

प्लेटलेट्स कौन-से प्रोटीन बनाती हैं?

प्लेटलेट्स अनेक महत्वपूर्ण प्रोटीनों का संश्लेषण करती हैं, जिनमें शामिल हैं-

  1.         COX (Cyclooxygenase)सूजन और दर्द की प्रक्रियाओं में शामिल
  2.          αIIbβ3 – एक इंटीग्रिन रिसेप्टर जो प्लेटलेट्स को आपस में चिपकने में मदद करता है
  3.         PAI-1 (Plasminogen Activator Inhibitor-1)थक्का टूटने से रोकता है
  4.         Factor XI – थक्का जमने की प्रक्रिया में सहायक
  5.         IL-1β और CCL5/RANTES – सूजन और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में शामिल प्रोटीन

प्लेटलेट्स में अनुवाद (Translation) की मशीनरी

प्लेटलेट्स में प्रोटीन संश्लेषण के लिए पूरी मशीनरी मौजूद है

·        राइबोसोम (ribosomes)प्रोटीन बनाने की फैक्ट्री

·        eIF4E और eIF-2α – अनुवाद के प्रमुख नियामक

·        माइक्रोRNA (miRNA) – प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करने वाले अणु

·        स्प्लाइसोसोम (spliceosome) – mRNA को प्रोसेस करने के लिए-

·     जब प्लेटलेट्स सक्रिय होती हैं (जैसे किसी चोट के स्थान पर), तो वे तुरंत नए प्रोटीन बनाना शुरू कर देती हैं। यह प्रक्रिया बिना किसी न्यूक्लियस के, केवल पहले से मौजूद mRNA और राइबोसोम का उपयोग करके संपन्न होती है।

वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि न्यूक्लियस की अनुपस्थिति वास्तव में प्लेटलेट्स को लाभ पहुंचाती है यह उन्हें अत्यंत छोटा आकार देती है, आकार बदलने में लचीलापन प्रदान करती है, और तनाव की स्थिति में प्रोटीन अभिव्यक्ति की गति और क्षमता को बढ़ाती है।

माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका



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न्यूक्लियस के बिना प्लेटलेट्स को ऊर्जा की आवश्यकता होती है और यह ऊर्जा उनके माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria) से आती है। प्रत्येक प्लेटलेट में 5 से 8 माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं। ये माइटोकॉन्ड्रिया एरोबिक श्वसन (oxygen respiration) द्वारा ATP (ऊर्जा अणु) का उत्पादन करते हैं, जो प्लेटलेट्स के कार्य और जीवन के लिए आवश्यक है।

दिलचस्प बात यह है कि प्लेटलेट्स का जीवनकाल (7-10 दिन) मुख्य रूप से माइटोकॉन्ड्रिया द्वारा निर्धारित होता है। जब माइटोकॉन्ड्रिया क्षतिग्रस्त हो जाते हैं या उनकी कार्यक्षमता घट जाती है, तो प्लेटलेट्स की आयु कम हो जाती है और थ्रोम्बोवैस्कुलर घटनाओं (जैसे हृदयाघात या स्ट्रोक) का खतरा बढ़ जाता है।

प्लेटलेट्स दो तरीकों से ऊर्जा उत्पन्न कर सकती हैं-

  1.          माइटोकॉन्ड्रियल श्वसन आराम की अवस्था में मुख्य रूप से यही विधि काम करती है
  2.        ग्लाइकोलाइसिस सक्रियण के दौरान यह विधि अधिक प्रमुख हो जाती है-

माइटोकॉन्ड्रिया की एक और महत्वपूर्ण भूमिका प्लेटलेट्स को ऑक्सीडेटिव तनाव (oxidative stress) से बचाना है। जब प्लेटलेट्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो वे माइटोफैजी (mitophagy क्षतिग्रस्त माइटोकॉन्ड्रिया को हटाने की प्रक्रिया) द्वारा स्वयं को सुरक्षित रखती हैं।


प्लेटलेट्स की संरचना

कोशिका झिल्ली और रिसेप्टर्स

प्लेटलेट्स की बाहरी सतह पर अनेक प्रकार के रिसेप्टर्स (receptors) मौजूद होते हैं। ये रिसेप्टर्स प्लेटलेट्स को-

  1.         रक्त वाहिका की दीवार से चिपकने (adhesion)
  2.         अन्य प्लेटलेट्स के साथ जुड़ने (aggregation)
  3.         बाहरी संकेतों को ग्रहण करने (signal reception)

में सहायता करते हैं। इन रिसेप्टर्स में सबसे महत्वपूर्ण हैं इंटीग्रिन (integrins) जैसे αIIbβ3, जो प्लेटलेट्स को आपस में और कोलेजन से जोड़ने का काम करते हैं।

साइटोस्केलेटन (कोशिका कंकाल)

प्लेटलेट्स के अंदर एक मजबूत साइटोस्केलेटन (cytoskeleton) होता है, जो एक्टिन (actin) और माइक्रोट्यूब्यूल्स (microtubules) से बना होता है। यह साइटोस्केलेटन प्लेटलेट्स को-

  1.         आराम की अवस्था में अपना डिस्क जैसा आकार बनाए रखने
  2.         सक्रियण के समय तुरंत आकार बदलने (shape change)
  3.         चोट वाली जगह पर फैलने (spread) और सिकुड़ने (contract) में सक्षम बनाता है।

प्लेटलेट्स के अंदर अतिरिक्त कोशिका झिल्ली मुड़ी हुई (folded) अवस्था में होती है, जो उन्हें सक्रियण के समय तेजी से आकार बदलने की क्षमता प्रदान करती है।

कोशिकांग (Organelles) और कणिकाएं (Granules)

न्यूक्लियस की अनुपस्थिति के बावजूद प्लेटलेट्स में कई प्रकार के कोशिकांग पाए जाते हैं-

1.     α-ग्रैन्यूल्स (Alpha-granules) – इनमें बड़े प्रोटीन अणु होते हैं जो चिपकने (adhesion) और घाव भरने (healing) में सहायक होते हैं-

2.     घने कणिकाएं (Dense granules) – इनमें ADP, सेरोटोनिन, कैल्शियम जैसे छोटे अणु होते हैं जो अन्य प्लेटलेट्स को सक्रिय करने का काम करते हैं-

3.     लाइसोसोम (Lysosomes)

4.     खुली नलिका प्रणाली (Open canalicular system) – प्लेटलेट्स के अंदर और बाहर पदार्थों के आदान-प्रदान के लिए ब्लीडिंग रोकने का तरीका एवं प्लेटलेट्स का मुख्य कार्य प्लेटलेट्स का सबसे प्रसिद्ध कार्य रक्तस्राव रोकना (hemostasis) है अर्थात रक्तस्राव को रोकना। यह प्रक्रिया कई चरणों में होती है

1- आसंजन (Adhesion) – 1-2 सेकंड के भीतर

जब कोई रक्त वाहिका क्षतिग्रस्त होती है, तो उसकी भीतरी दीवार पर मौजूद कोलेजन (collagen) उजागर हो जाता है। प्लेटलेट्स अपनी सतह पर मौजूद रिसेप्टर्स के माध्यम से इस कोलेजन से 1-2 सेकंड के भीतर चिपक जाती हैं।

2- सक्रियण (Activation) और आकार परिवर्तन

चिपकने के बाद प्लेटलेट्स सक्रिय (activated) हो जाती हैं। वे अपना सामान्य डिस्क जैसा आकार बदलकर स्पाइकी (कांटेदार) आकार ले लेती हैं जैसे समुद्री अर्चिन (sea urchin)। यह आकार परिवर्तन उनके साइटोस्केलेटन की मदद से होता है।

3- एकत्रीकरण (Aggregation)

सक्रिय प्लेटलेट्स अपनी सतह पर मौजूद फाइब्रिनोजेन (fibrinogen) रिसेप्टर्स (αIIbβ3) के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ना शुरू कर देती हैं। यह प्रक्रिया प्लेटलेट प्लग (platelet plug) का निर्माण करती है एक अस्थाई थक्का जो रक्तस्राव को रोकता है।

4- कणिकाओं का निष्कासन (Granule Release)

सक्रिय प्लेटलेट्स अपने अंदर मौजूद कणिकाओं (granules) की सामग्री को बाहर निकालती हैं-

·        ADP और थ्रोम्बोक्सेन A2 – और अधिक प्लेटलेट्स को सक्रिय करते हैं

·        5-हाइड्रॉक्सीट्रिप्टामाइन (सेरोटोनिन) – रक्त वाहिकाओं को संकुचित (vasoconstriction) करता है-

·        प्लेटलेट फैक्टर IV – थक्का जमने की प्रक्रिया को तेज करता है-

5- थक्का स्थिरीकरण (Clot Stabilization)

प्लेटलेट्स थक्का सिकुड़न (clot retraction) करते हैं, जिससे थक्का और अधिक मजबूत हो जाता है। साथ ही, प्लेटलेट्स थक्का जमने की कैस्केड प्रक्रिया (coagulation cascade) को उत्प्रेरित (catalyze) करते हैं, जिससे फाइब्रिन (fibrin) का निर्माण होता है एक रेशेदार जाल जो थक्के को स्थायी बनाता है।

प्रतिरक्षा और सूजन

आधुनिक शोध ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्लेटलेट्स केवल रक्तस्राव रोकने  तक सीमित नहीं हैं वे प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) के सक्रिय सदस्य भी हैं।

संक्रमण से लड़ाई

प्लेटलेट्स संक्रमण से लड़ने वाली पहली कोशिकाओं में से एक हैं। वे-

1.      सूक्ष्मजीवों (microorganisms) को पहचानती हैं

2.      प्रतिरक्षा कोशिकाओं को संकेत भेजती हैं

3.      T-कोशिकाओं की सहायता करती हैं

4.      B-कोशिकाओं को बेहतर एंटीबॉडी बनाने में मदद करती हैं

यह सब बिना किसी न्यूक्लियस के, केवल पहले से मौजूद mRNA और प्रोटीन का उपयोग करके किया जाता है।

सूजन (Inflammation) में भूमिका

प्लेटलेट्स सूजन प्रतिक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे साइटोकाइन्स (cytokines) और ग्रोथ फैक्टर्स  का स्राव करती हैं जो-

1.      घाव भरने में सहायक होते हैं

2.      अन्य कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देते हैं

3.      प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं

कोशिकीय संचार

सबसे आश्चर्यजनक खोज यह है कि प्लेटलेट्स, बिना न्यूक्लियस के भी, अन्य कोशिकाओं के साथ जटिल संचार (cell signaling) कर सकती हैं। वे-

1.      प्रतिरक्षा कोशिकाओं को संकेत भेजती हैं

2.      रक्त वाहिका की दीवार की कोशिकाओं (endothelial cells) से बात करती हैं

3.      ऊतकों (tissues) को मरम्मत के लिए संकेत देती हैं

यह संचार सिग्नलिंग अणुओं (signaling molecules) और माइक्रोपार्टिकल्स (microparticles) के माध्यम से होता है। प्लेटलेट्स ये संकेत अणु अपनी कणिकाओं (granules) में पहले से संग्रहित रखती हैं और आवश्यकतानुसार उन्हें बाहर निकालती हैं।

प्लेटलेट्स का जीवन और मृत्यु

न्यूक्लियस के बिना भी प्लेटलेट्स क्रमादेशित कोशिका मृत्यु (programmed cell death या apoptosis) से गुजरती हैं। यह प्रक्रिया Bcl-2 परिवार के प्रोटीनों द्वारा नियंत्रित होती है-

1.      Bcl-xL – "सर्वाइवल क्लॉक" (जीवन की घड़ी) यह प्लेटलेट्स को जीवित रखता है

2.      Bak – मृत्यु को प्रोत्साहित करने वाला प्रोटीन

इन दोनों प्रोटीनों के बीच संतुलन ही प्लेटलेट्स का जीवनकाल (7-10 दिन) निर्धारित करता है।

जब प्लेटलेट्स पुरानी (aged) हो जाती हैं, तो वे-

1.      अपना आकार खो देती हैं

2.      अपनी कार्यक्षमता घटा देती हैं

3.      अंततः यकृत (liver) और प्लीहा (spleen) में मैक्रोफेज (macrophages) द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं


क्या प्लेटलेट्स प्रजनन कर सकती हैं?

एक और चौंकाने वाली खोज यह है कि बिना न्यूक्लियस के प्लेटलेट्स नई प्लेटलेट्स उत्पन्न कर सकती हैं। हालांकि प्लेटलेट्स को "टर्मिनली डिफरेंशिएटेड" (अंतिम विभेदित) कोशिकाएं माना जाता था जो विभाजित नहीं हो सकतीं, परंतु वैज्ञानिकों ने पाया कि-

1.      मानव प्लेटलेट्स नई कोशिकाएं उत्पन्न कर सकती हैं

2.      ये नई प्लेटलेट्स सामान्य प्लेटलेट्स से संरचनात्मक रूप से अप्रभेद्य होती हैं

3.      ये चिपकने (adhesion) और फैलने (spread) की क्षमता रखती हैं

यह कोशिका विभाजन का एक ऐसा रूप है जिसमें न्यूक्लियस की आवश्यकता नहीं होती। यह खोज बताती है कि प्लेटलेट्स की उत्पादन क्षमता पहले की सोच से कहीं अधिक है।

प्लेटलेट्स केवल स्तनधारियों (mammals) में पाई जाती हैं। अन्य कशेरुकियों (जैसे मछली, पक्षी, सरीसृप) मेंरक्तस्राव रोकने  का कार्य न्यूक्लियस युक्त थ्रोम्बोसाइट्स (thrombocytes) करती हैं।

विकासवादी दृष्टि से थ्रोम्बोसाइट्स समय के साथ आकार में छोटी होती गईं,स्तनधारियों में इन्होंने अपना न्यूक्लियस खो दिया इससे ये अधिक लचीली (flexible) और तीव्र प्रतिक्रिया देने वाली बन गई न्यूक्लियस का खो जाना वास्तव में एक विकासवादी लाभ था इससे प्लेटलेट्स छोटी, अधिक संख्या में, और तीव्र गति से कार्य करने वाली बन गईं।

निष्कर्ष

रक्त प्लेटलेट्स विज्ञान का एक अद्भुत उदाहरण हैं कि कैसे न्यूक्लियस के बिना भी एक कोशिका अत्यंत जटिल कार्य कर सकती है। उनकी सफलता का रहस्य उनके "जन्म" में ही छिपा है मेगाकैरियोसाइट उन्हें सारी आवश्यक मशीनरी (mRNA, राइबोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया, प्रोटीन, कणिकाएं) उपहार स्वरूप दे देती है।

इस प्रकार प्लेटलेट्स प्रोटीन संश्लेषण करती हैं एवं बिना DNA के, केवल पहले से मौजूद mRNA का उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन करती हैं और अपने 5-8 माइटोकॉन्ड्रिया के माध्यम से आकार बदलती हैं तथा अपने साइटोस्केलेटन की मदद से संचार करती हैं एवं प्रतिरक्षा कोशिकाओं, रक्त वाहिकाओं और ऊतकों के साथ प्रतिरक्षा में भाग लेती हैं और संक्रमण से लड़ने में नई प्लेटलेट्स उत्पन्न करती हैं तथा बिना किसी विभाजन के प्लेटलेट्स हमें यह सिखाती हैं कि जीव विज्ञान में सरलता के पीछे अत्यंत जटिलता छिपी हो सकती है। एक छोटी-सी, बिना न्यूक्लियस वाली कोशिका हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं रक्तस्राव रोकना, प्रतिरक्षा, और घाव भरने को संचालित करती है। यह प्रकृति की उस अद्भुत क्षमता का प्रमाण है जो सीमित संसाधनों में भी असंभव को संभव बना देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1- क्या प्लेटलेट्स में न्यूक्लियस होता है?

उत्तर- नहीं, प्लेटलेट्स पूरी तरह से न्यूक्लियस-रहित (anucleate) होती हैं। इनमें कोई केंद्रक नहीं होता और न ही कोई जीनोमिक DNA- ये बोन मैरो में मौजूद मेगाकैरियोसाइट कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म के टुकड़े होते हैं।

प्रश्न 2- बिना न्यूक्लियस के प्लेटलेट्स प्रोटीन कैसे बनाती हैं?

उत्तर- प्लेटलेट्स को मेगाकैरियोसाइट से mRNA, राइबोसोम और अन्य अनुवाद (translation) कारक विरासत में मिलते हैं। ये mRNA प्लेटलेट्स के पूरे जीवनकाल (7-10 दिन) तक सक्रिय रहते हैं और आवश्यकतानुसार प्रोटीन का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया बिना किसी transcription (DNA से mRNA बनाने) के, केवल translation के माध्यम से होती है।

प्रश्न 3- प्लेटलेट्स कितने दिन जीवित रहती हैं?

उत्तर- प्लेटलेट्स का औसत जीवनकाल 7 से 10 दिनों का होता है। इसके बाद ये यकृत (liver) और प्लीहा (spleen) में नष्ट कर दी जाती हैं।

प्रश्न 4- प्लेटलेट्स रक्त स्राव रोकने का काम  कैसे करती हैं?

उत्तर- प्लेटलेट्स चार मुख्य चरणों में रक्त स्राव रोकने का काम  करती है क्षतिग्रस्त रक्त वाहिका की दीवार पर चिपकना (adhesion) सक्रिय होकर आकार बदलना (activation)एक-दूसरे से जुड़कर प्लेटलेट प्लग बनाना (aggregation), और कणिकाओं की सामग्री निकालकर थक्का स्थिर करना (granule release और clot stabilization)

प्रश्न 5- क्या प्लेटलेट्स केवल रक्त स्राव रोकने का काम करती हैं?

उत्तर- नहीं, प्लेटलेट्स केवल रक्त स्राव रोकने तक सीमित नहीं हैं। वे प्रतिरक्षा (immunity), सूजन (inflammation), घाव भरने (wound healing), और संक्रमण से लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रश्न 6- क्या प्लेटलेट्स विभाजित हो सकती हैं?

उत्तर- हाल की खोजों के अनुसार, बिना न्यूक्लियस के भी प्लेटलेट्स नई प्लेटलेट्स उत्पन्न कर सकती हैं यह कोशिका विभाजन का एक ऐसा रूप है जिसमें न्यूक्लियस की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 7- प्लेटलेट्स की कमी (thrombocytopenia) के क्या लक्षण हैं?

उत्तर- प्लेटलेट्स की कमी के मुख्य लक्षणों में बिना वजह नीले निशान (bruises) बनना, मामूली कट से भी अत्यधिक रक्तस्राव, और खून का थक्का न जमना शामिल हैं

 




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