क्या आप जानते है,पसीना
आने की असली वजह क्या है?
परिचय
गर्मी के मौसम में जब भी
हमें अत्यधिक पसीना आता है, तो
हममें से अधिकतर लोग इससे परेशान हो जाते हैं। किसी को हाथों से पसीना आने की
शिकायत है, तो
किसी को बगलों से। कुछ लोगों को थोड़ी सी मेहनत पर ही पसीना आ जाता है, तो वहीं कुछ लोगों को तेज
गर्मी में भी पसीना नहीं आता। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पसीना आने की असली वजह क्या
है? आखिर
क्यों हमारा शरीर पसीना पैदा करता है? क्या यह सिर्फ गर्मी की वजह
से होता है या इसके पीछे कोई और गहरा विज्ञान काम करता है?
इस विस्तृत ब्लॉग पोस्ट में
हम पसीना आने के हर पहलू को विज्ञान की नजर से समझेंगे। जानेंगे कि पसीना कैसे
बनता है, शरीर
में इसकी क्या भूमिका है, अत्यधिक
पसीना आने के क्या कारण हो सकते हैं, और कब यह किसी गंभीर बीमारी
का संकेत होता है।
पसीना क्या है?
पसीना, जिसे चिकित्सा भाषा में 'पर्सपिरेशन' (Perspiration)
कहा
जाता है, एक
नमक-आधारित तरल पदार्थ है जो हमारी त्वचा में स्थित पसीने की ग्रंथियों द्वारा स्रावित किया जाता
है। यह
शरीर की एक अद्भुत प्राकृतिक व्यवस्था है, जो हमें गर्मी से बचाने और
हमारे शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करती है।
जब हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है, तो पसीने की ग्रंथियां
सक्रिय हो जाती हैं और पसीने का उत्पादन शुरू कर देती हैं। यह पसीना त्वचा की सतह
पर आता है और वहां से वाष्पीकरण के जरिए वाष्प बनकर उड़
जाता है। इस वाष्पीकरण की प्रक्रिया में शरीर की गर्मी खत्म होती है और हमारा शरीर
ठंडा हो जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे 'वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा' कहा जाता है।
पसीना क्यों आता है?
पसीना आने के कई कारण हो
सकते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं-
1. शरीर के तापमान को
नियंत्रित करना (थर्मोरेग्यूलेशन)
यह पसीना आने का सबसे महत्वपूर्ण और
बुनियादी कारण है।
मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37°C (98.6°F) होता है। जब बाहरी तापमान बढ़ता है
या हम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। इस स्थिति में हमारे मस्तिष्क का एक
विशेष हिस्सा हाइपोथैलेमस सक्रिय हो जाता है।
हाइपोथैलेमस शरीर के 'थर्मोस्टेट' की तरह काम करता है। जब यह
महसूस करता है कि शरीर का तापमान सामान्य से अधिक हो गया है, तो यह पसीने की ग्रंथियों
को संकेत भेजता है कि वे पसीना बनाना शुरू करें। यह पसीना त्वचा पर आता है, वाष्पित होता है और शरीर को
ठंडा करता है। यही
कारण है कि गर्मी में या व्यायाम के दौरान हमें अधिक पसीना आता है।
2. भावनात्मक प्रतिक्रियाएं
क्या आपने कभी नोटिस किया है कि जब आप
घबराते हैं, डरते
हैं या शर्मिंदा होते हैं, तो
आपको अचानक पसीना आने लगता है? यह भावनात्मक
पसीना कहलाता
है। जब हम तनाव, चिंता, क्रोध या भय महसूस करते हैं, तो हमारा शरीर एड्रेनालाईन नामक हार्मोन रिलीज करता है।
यह हार्मोन हमारी पसीने की ग्रंथियों को सक्रिय कर देता है, जिससे हमें अचानक पसीना आने
लगता है।
दिलचस्प बात यह है कि भावनात्मक पसीना
मुख्यतः हथेलियों, पैरों
के तलवों और बगलों में अधिक आता है। यही कारण है कि इंटरव्यू या परीक्षा के दौरान
लोगों के हाथों में पसीना आ जाता है।
3. हार्मोनल बदलाव
हार्मोनल
परिवर्तन भी पसीना आने का एक बड़ा कारण हैं। खासकर महिलाओं में-
- रजोनिवृत्ति के दौरान हॉट फ्लैशेज के कारण अचानक तीव्र पसीना आ सकता है
- गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों से पसीना बढ़ सकता है
- यौवन के दौरान किशोरों को भी अधिक पसीना आ सकता है
- थायराइड की समस्या (हाइपरथायरॉइडिज्म) भी अत्यधिक पसीने का कारण बन सकती है
4. भोजन और पेय पदार्थ
क्या आपको पता है कि कुछ खास तरह के
खाद्य पदार्थ भी पसीना बढ़ा सकते हैं? इसे गस्टेटरी स्वेटिंग कहा जाता है। जो लोग मसालेदार भोजन खाते हैं, उन्हें अक्सर पसीना आने
लगता है। इसके अलावा-
- कैफीनयुक्त पेय (चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक)
- शराब
- बहुत गर्म या तीखा भोजन
ये सभी चीजें हमारे सिम्पैथेटिक नर्वस
सिस्टम को उत्तेजित करती हैं, जिससे पसीना बढ़ जाता है।
शरीर में कितने प्रकार की
पसीने की ग्रंथियां होती हैं?
हमारी त्वचा में दो मुख्य प्रकार की पसीने
की ग्रंथियां होती
हैं। ये दोनों अपनी संरचना, कार्य
और स्थान के हिसाब से अलग-अलग हैं
1. एक्राइन पसीना ग्रंथियां (Eccrine Sweat
Glands)
ये हमारे शरीर में सबसे अधिक संख्या में पाई जाती हैं लगभग 2 से 4 मिलियन। ये पूरे शरीर की
त्वचा की सतह पर फैली होती हैं और मुख्यतः पानी और लवण (सोडियम क्लोराइड) से बना
पसीना पैदा करती हैं। एक्राइन ग्रंथियों का मुख्य कार्य शरीर के तापमान को
नियंत्रित करना है।
ये ग्रंथियां ही गर्मी में और व्यायाम के दौरान शरीर को ठंडा रखने का काम करती हैं।
सामान्य परिस्थितियों में एक्राइन
ग्रंथियां प्रतिदिन
500 से 750 मिलीलीटर तक पसीना पैदा कर सकती हैं।
2. एपोक्राइन पसीना ग्रंथियां
(Apocrine Sweat Glands)
ये ग्रंथियां बड़ी होती हैं और मुख्यतः बालों
वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं जैसे बगल, कमर और स्तनों के आसपास।
एपोक्राइन ग्रंथियां जन्म से तो मौजूद होती हैं, लेकिन यौवन आने पर ही
सक्रिय होती हैं।
इन ग्रंथियों से निकलने वाला पसीना गाढ़ा और प्रोटीन युक्त होता है। दिलचस्प बात यह है
कि एपोक्राइन ग्रंथियों का पसीना गंधहीन होता
है, लेकिन
जब यह त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आता है, तो यह शरीर की दुर्गंध पैदा करता है। एपोक्राइन
ग्रंथियां भावनात्मक
तनाव के
प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं यही कारण है कि जब हम
घबराते या तनाव में होते हैं, तो बगलों से अधिक पसीना आता है।
अत्यधिक पसीना आना (कारण, लक्षण
और उपचार)
जब किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट
कारण के अत्यधिक पसीना आता है, तो इसे हाइपरहाइड्रोसिस कहा
जाता है। यह एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें व्यक्ति को ठंडे मौसम में या आराम करते
समय भी अत्यधिक पसीना आ सकता है।
हाइपरहाइड्रोसिस को दो मुख्य प्रकारों
में बांटा गया है-
प्राथमिक हाइपरहाइड्रोसिस (Primary
Hyperhidrosis)
इसमें अत्यधिक पसीने का कोई स्पष्ट चिकित्सीय कारण नहीं होता। ऐसा माना जाता
है कि इसमें आनुवंशिक कारक हो सकते हैं। यह
स्थिति आमतौर पर बचपन
या किशोरावस्था में
शुरू होती है। प्राथमिक हाइपरहाइड्रोसिस में पसीना शरीर के किसी विशेष हिस्से जैसे हथेलियाँ, पैरों के तलवे, बगल या चेहरा में अधिक आता है।
द्वितीयक हाइपरहाइड्रोसिस (Secondary
Hyperhidrosis)
इसमें
अत्यधिक पसीना किसी
अंतर्निहित बीमारी या दवा के
कारण आता है। इसके कुछ सामान्य कारण हैं-
कारण उदाहरण
|
हार्मोनल
विकार |
अत्यधिक
सक्रिय थायराइड (हाइपरथायरॉइडिज्म), डायबिटीज, हाइपोग्लाइसीमिया |
|
संक्रमण |
ट्यूबरक्लोसिस
(TB), हृदय संक्रमण (एंडोकार्डाइटिस), फंगल संक्रमण |
|
कैंसर |
लिंफोमा, ल्यूकेमिया, कार्सिनॉइड ट्यूमर |
|
दवाइयां |
एंटीडिप्रेसेंट, एस्पिरिन, डायबिटीज की दवाइयां |
|
तंत्रिका
तंत्र विकार |
ऑटोनोमिक
नर्वस सिस्टम का डिस्फंक्शन |
|
अन्य |
रजोनिवृत्ति, चिंता, गर्भावस्था |
हाइपरहाइड्रोसिस
का निदान
डॉक्टर अत्यधिक पसीने की जांच के लिए
कई तरीके अपनाते हैं-
- स्टार्च-आयोडीन टेस्ट – पसीने वाले क्षेत्र पर आयोडीन और स्टार्च लगाकर पसीने के स्थान का पता लगाना
- पेपर टेस्ट – विशेष कागज से पसीना सोखकर उसका वजन मापना
- ब्लड टेस्ट – थायराइड या अन्य बीमारियों की जांच के लिए
- इमेजिंग टेस्ट – यदि ट्यूमर का संदेह हो
हाइपरहाइड्रोसिस का उपचार
हाइपरहाइड्रोसिस
का इलाज संभव है। उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं-
1. टॉपिकल एंटीपरस्पिरेंट्स – एल्युमीनियम क्लोराइड युक्त
उत्पाद जो पसीने की नलिकाओं को बंद करते हैं
2. आयोन्टोफोरेसिस – हल्के विद्युत प्रवाह से
उपचार
3. बोटुलिनम टॉक्सिन इंजेक्शन (बोटोक्स) – पसीने की ग्रंथियों को
अस्थायी रूप से निष्क्रिय करना
4. मौखिक दवाएं – एंटीकोलिनर्जिक दवाएं
5. सर्जिकल विकल्प – गंभीर मामलों में
सिम्पैथेक्टोमी
रात में पसीना आना
रात
में सोते समय अत्यधिक पसीना आना नाइट स्वेट्स कहलाता
है। अगर आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के रात में बहुत पसीना आता है, तो यह किसी गंभीर बीमारी का
संकेत हो सकता है।
रात
में पसीना आने के सामान्य कारण-
- रजोनिवृत्ति से जुड़े हार्मोनल बदलाव (सबसे आम कारण)
- संक्रमण – तपेदिक (TB), एचआईवी, हृदय संक्रमण
- थायराइड की समस्या
- चिंता और तनाव
- स्लीप एपनिया
- कुछ दवाइयां – एंटीडिप्रेसेंट, स्टेरॉइड, डायबिटीज की दवाएं
- कैंसर – ल्यूकेमिया, हॉजकिन लिंफोमा
ध्यान
दें कि अगर
आपको लगातार रात में पसीना आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
जितना
अधिक पसीना आना परेशानी का कारण है, उतना ही पसीना न आना (भी खतरनाक हो सकता है।
एनहाइड्रोसिस में पसीने की ग्रंथियां पसीना बनाना कम कर देती हैं या पूरी तरह बंद
कर देती हैं।
पसीना
न आने के कारण-
- त्वचा जलना (बर्न्स)
- तंत्रिका तंत्र की समस्याएं
- कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव
·
त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियां (जैसे कुष्ठरोग)
पसीना
न आने से शरीर अत्यधिक
गर्म हो
सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। WHO के अनुसार, बुजुर्ग लोगों में अक्सर
पसीना आने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे उन्हें गर्मी में
ठंडा रहने में कठिनाई होती है।
जितना
अधिक पसीना आना परेशानी का कारण है, उतना ही पसीना न आना (भी खतरनाक हो सकता है।
एनहाइड्रोसिस में पसीने की ग्रंथियां पसीना बनाना कम कर देती हैं या पूरी तरह बंद
कर देती हैं।
पसीना
न आने के कारण-
- त्वचा जलना (बर्न्स)
- तंत्रिका तंत्र की समस्याएं
- कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव
- त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाली बीमारियां (जैसे कुष्ठरोग)
पसीना
न आने से शरीर अत्यधिक
गर्म हो
सकता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। WHO के अनुसार, बुजुर्ग लोगों में अक्सर
पसीना आने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे उन्हें गर्मी में
ठंडा रहने में कठिनाई होती है।
पसीना आने के फायदे
जी
हाँ, सामान्य
मात्रा में पसीना आना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। आइए जानते हैं पसीना
आने के कुछ प्रमुख लाभ
1. शरीर का तापमान नियंत्रित
रखना
यह
पसीने का सबसे
महत्वपूर्ण कार्य है।
पसीना वाष्पित होकर शरीर से अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालता है और शरीर को ठंडा
रखता ह।
2. त्वचा की सफाई
पसीना त्वचा के रोमछिद्रों को खोलता है
और उनमें जमी गंदगी को बाहर निकालता है। इससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है।
3. रक्त संचार में सुधार
पसीना आने से रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर की
कोशिकाओं तक अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है।
4. मूड में सुधार
व्यायाम के दौरान पसीना आने से शरीर
में एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) रिलीज
होते हैं, जो
मूड को बेहतर बनाते हैं।
5. रोग प्रतिरोधक क्षमता में
सुधार
पसीना आने से शरीर में श्वेत
रक्त कणिकाओं का
संचार बेहतर होता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
क्या पसीने से विषाक्त
पदार्थ बाहर निकलते हैं?
यह एक आम गलतफहमी है कि पसीना शरीर से
विषाक्त पदार्थों को
बाहर निकालता है। हालांकि पसीने में कुछ मात्रा में विषाक्त पदार्थ हो सकते हैं, लेकिन इनकी मात्रा इतनी कम
होती है कि यह 'डिटॉक्स' के रूप में कारगर नहीं है।
शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का मुख्य काम लिवर और किडनी करते हैं।
शरीर की दुर्गंध क्यों आती
है?
बहुत से लोग सोचते हैं कि पसीने से बदबू आती है, लेकिन यह सच नहीं है। असल में पसीना खुद गंधहीन होता है। शरीर की दुर्गंध
तब पैदा होती है जब-
- एपोक्राइन ग्रंथियों से निकला पसीना
- त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आता है
- बैक्टीरिया पसीने को तोड़ते हैं
यह प्रक्रिया मुख्यतः बगलों और कमर के
क्षेत्र में होती है, क्योंकि
वहां एपोक्राइन ग्रंथियां अधिक होती हैं।
शरीर की दुर्गंध को कम करने के लिए-
- नियमित रूप से स्नान करें
- एंटीपरस्पिरेंट या डियोड्रेंट का उपयोग करें
- कैफीन और मसालेदार भोजन की मात्रा कम करें
पसीने के बारे में आम मिथक
और तथ्य
मिथक 1- पसीना आने से शरीर कमजोर
होता है।
तथ्य- पसीना आना शरीर की एक
स्वस्थ प्राकृतिक प्रक्रिया है जो शरीर को ठंडा रखती है।
मिथक
2- ज्यादा पसीना आना मोटापे का
संकेत है।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
अगर
आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह
लें
- अचानक से अत्यधिक पसीना आना शुरू हो जाए
- पसीना आपकी दैनिक जीवनशैली को प्रभावित कर रहा हो
- बिना किसी कारण के रात में अत्यधिक पसीना आ रहा हो
- पसीने के साथ बुखार, वजन घटना, या थकान जैसे लक्षण हों
- शरीर की दुर्गंध अचानक बदल गई हो
- आपके परिवार में हाइपरहाइड्रोसिस का इतिहास हो
निष्कर्ष
पसीना आना हमारे शरीर की एक अत्यंत
महत्वपूर्ण प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हमें जीवित रखने और
स्वस्थ रखने में मदद करती है। यह हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, त्वचा को साफ रखता है और कई
अन्य स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
हालांकि, अत्यधिक पसीना आना (हाइपरहाइड्रोसIS) या पसीना न आना (एनहाइड्रोसिस) किसी गंभीर
बीमारी का संकेत हो सकता है। अगर आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के अत्यधिक पसीना आ
रहा है, खासकर
रात में, या
आपको पसीना ही नहीं आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।
याद रखें पसीना आना कोई
बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की एक बुद्धिमान व्यवस्था है जो आपको सुरक्षित रखती
है। इसलिए अगली बार जब आपको पसीना आए, तो इस नेचुरल कूलिंग सिस्टम
के लिए अपने शरीर को धन्यवाद देना न भूलें!
अक्सर पूछे जाने वाले
प्रश्न
प्रश्न
1- पसीना आने की असली वजह क्या
है?
उत्तर- पसीना आने की असली वजह शरीर
के तापमान को नियंत्रित करना है। जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो हाइपोथैलेमस पसीने की
ग्रंथियों को सक्रिय करता है। इसके अलावा, तनाव, भावनाएं, हार्मोनल बदलाव और कुछ
खाद्य पदार्थ भी पसीने का कारण बनते हैं।
प्रश्न
2- अत्यधिक पसीना आना क्या है?
उत्तर- अत्यधिक पसीना आना
(हाइपरहाइड्रोसIS) एक
चिकित्सीय स्थिति है जिसमें व्यक्ति को ठंडे मौसम या आराम करते समय भी अत्यधिक
पसीना आता है। यह प्राथमिक (बिना किसी कारण) या द्वितीयक (किसी बीमारी या दवा के
कारण) हो सकता है।
प्रश्न
3- रात में पसीना क्यों आता है?
उत्तर- रात में पसीना आना (नाइट
स्वेट्स) रजोनिवृत्ति, संक्रमण
(जैसे TB), थायराइड
समस्या, चिंता, या कुछ दवाइयों के कारण हो
सकता है। अगर यह लगातार हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
प्रश्न
4- पसीना आना अच्छा है या बुरा?
उत्तर- सामान्य मात्रा में पसीना
आना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है यह शरीर को ठंडा रखता है, त्वचा को साफ करता है और रक्त संचार में सुधार करता है। लेकिन अत्यधिक या
बहुत कम पसीना आना किसी समस्या का संकेत हो सकता है।
प्रश्न
5- शरीर की दुर्गंध क्यों आती
है?
उत्तर- पसीना खुद गंधहीन होता है।
शरीर की दुर्गंध तब आती है जब एपोक्राइन ग्रंथियों का पसीना त्वचा पर मौजूद
बैक्टीरिया के संपर्क में आकर टूटता है।
प्रश्न
6- अत्यधिक पसीना आने का इलाज
क्या है?
उत्तर- अत्यधिक पसीने के इलाज में
एंटीपरस्पिरेंट्स, आयोन्टोफोरेसIS, बोटोक्स इंजेक्शन, मौखिक दवाएं और गंभीर
मामलों में सर्जरी शामिल हैं।
प्रश्न
7- पसीना न आना कितना खतरनाक
है?
उत्तर- पसीना न आना (एनहाइड्रोसIS) बहुत खतरनाक हो सकता है
क्योंकि इससे शरीर अत्यधिक गर्म हो सकता है और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
प्रश्न
8- क्या पसीने से विषाक्त
पदार्थ बाहर निकलते हैं?
उत्तर- पसीने से बहुत कम मात्रा
में विषाक्त पदार्थ निकलते हैं। शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का मुख्य काम लिवर और किडनी
करते हैं।
प्रश्न
9- क्या मसालेदार भोजन से
पसीना आता है?
उत्तर- हाँ, मसालेदार भोजन, कैफीनयुक्त पेय और शराब
पसीना बढ़ा सकते हैं। इसे गस्टेटरी स्वेटिंग कहा जाता है।
प्रश्न
10- डॉक्टर के पास कब जाना
चाहिए?
उत्तर- अगर
आपको अचानक से अत्यधिक पसीना आना शुरू हो, रात में लगातार पसीना आ रहा
हो, पसीने
के साथ बुखार या वजन घट रहा हो, या पसीना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।