नींद में मानव शरीर कैसे काम करता है?
नींद के दौरान मानव शरीर आराम की अवस्था में होता है, लेकिन यह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होता इस समय शरीर कई महत्वपूर्ण कार्य करता है जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। नींद को मुख्य रूप से दो चरणों में बाँटा जाता है- REM Sleep और Non‑REM Sleep। Non-REM नींद में शरीर की मरम्मत होती है, मांसपेशियाँ रिलैक्स होती हैं और ऊर्जा पुनः संचित होती है।
नींद
के दौरान मस्तिष्क दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित करता है और यादों को मजबूत बनाता
है। इस समय शरीर में Melatonin
का स्तर बढ़ता है, जो नींद को गहरा बनाता है। साथ ही Growth Hormone का स्राव होता है, जो कोशिकाओं की मरम्मत और विकास में मदद
करता है।
हृदय गति और श्वास दर धीमी हो जाती है, जिससे शरीर को आराम मिलता है। प्रतिरक्षा तंत्र भी इस समय सक्रिय होकर संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है। इसलिए अच्छी नींद शरीर और मस्तिष्क दोनों के सही कामकाज के लिए जरूरी है।
नींद हमें अक्सर
निष्क्रिय अवस्था लगती है जैसे
शरीर “बंद” हो गया हो। लेकिन सच्चाई इसके ठीक विपरीत
है। जब
हम सोते हैं, तब शरीर सबसे अधिक
सक्रिय, व्यस्त और मरम्मतशील
अवस्था में होता है। विज्ञान के अनुसार, नींद केवल आराम नहीं है, बल्कि यह-
· शरीर की मरम्मत
· मस्तिष्क की सफाई
· हार्मोन संतुलन
· याददाश्त निर्माण
· प्रतिरक्षा सुदृढ़ीकरण
जैसी जीवन-आवश्यक प्रक्रियाओं का समय है।
आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि नींद के दौरान शरीर के अंदर क्या-क्या होता है, और क्यों नींद की कमी आधुनिक युग की सबसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है।
1. नींद क्या है?
नींद एक प्राकृतिक
जैविक प्रक्रिया है, जिसमें
शरीर और मस्तिष्क सक्रिय रहते हुए भी विश्राम की अवस्था में चले जाते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से नींद को शरीर की पुनर्स्थापना (restoration) और मानसिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यक
प्रक्रिया माना जाता है। नींद के दौरान चेतना कम हो जाती है, लेकिन शरीर के कई जरूरी कार्य चलते रहते
हैं।
नींद मुख्य रूप से दो चरणों में होती है-
Non-REM Sleep
REM Sleep
Non-REM चरण में शरीर की मरम्मत, ऊतकों का पुनर्निर्माण और ऊर्जा की बचत
होती है, जबकि REM चरण में मस्तिष्क अधिक सक्रिय रहता है
और सपने आते हैं।
नींद
को नियंत्रित करने में शरीर की जैविक घड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसे Circadian Rhythm कहा जाता है। यह चक्र प्रकाश और अंधकार के अनुसार शरीर को सोने
और जागने का संकेत देता है। इस दौरान Melatonin हार्मोन
का स्राव बढ़ता है, जो
नींद लाने में मदद करता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार पर्याप्त नींद से
स्मृति मजबूत होती है, प्रतिरक्षा
तंत्र बेहतर काम करता है और मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है। इसलिए नींद केवल आराम
नहीं, बल्कि शरीर के
संतुलित कार्य के लिए आवश्यक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
सरल शब्दों में नींद कोई साधारण “बेहोशी” नहीं है। यह एक नियंत्रित जैविक अवस्था है, जिसे मस्तिष्क संचालित करता है।
नींद का नियंत्रण होता है-
·
सर्कैडियन रिदम
· मेलाटोनिन हार्मोन
· मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस
जैसे ही अंधेरा बढ़ता है, शरीर को संकेत मिलता है कि अब मरम्मत और संरक्षण मोड शुरू करना है।
2. नींद के चरण
नींद एक समान अवस्था
नहीं होती, बल्कि यह अलग-अलग
चरणों में विभाजित होती है। प्रत्येक चरण में शरीर अलग-अलग तरीके से काम करता है।
वैज्ञानिक रूप से नींद को मुख्य रूप से Non-REM Sleep और REM Sleep में
बाँटा जाता है।
2. गहरी नींद (Non-REM का दूसरा और तीसरा चरण)
पूरी रात ये चरण 90–120 मिनट के चक्र में बार-बार दोहराए जाते
हैं। इसलिए सभी चरणों की संतुलित नींद स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क के लिए आवश्यक होती
है।
संक्षेप में नींद एक समान नहीं होती। यह 4–5 चक्रों में बंटी होती है, और हर चक्र लगभग 90 मिनट का होता है।
चरण 1- हल्की नींद
·
मांसपेशियाँ ढीली पड़ती हैं
· हृदय गति धीमी होती है
· शरीर जागरण से नींद में प्रवेश करता है
चरण 2- स्थिर नींद
· शरीर का तापमान गिरता है
· मस्तिष्क की गतिविधि धीमी होती है
· बाहरी आवाज़ों की संवेदनशीलता कम होती है
यहीं से शरीर वास्तविक आराम की ओर बढ़ता है।
चरण 3- गहरी नींद
यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
· कोशिकाओं की मरम्मत
· मांसपेशियों का पुनर्निर्माण
· ग्रोथ हार्मोन का स्राव
· ऊर्जा भंडारण
अगर यह चरण बाधित हो जाए, तो शरीर कमजोर पड़ने लगता है।
चरण 4- सपनों की नींद
· आंखें तेज़ी से हिलती हैं
· सपने आते हैं
· मस्तिष्क अत्यधिक सक्रिय होता है
यह चरण मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त के लिए अत्यंत आवश्यक है।
3. नींद के दौरान मस्तिष्क के अंदर क्या होता है?
नींद
के दौरान मस्तिष्क आराम नहीं करता, बल्कि
कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ सक्रिय हो जाती हैं। इस समय मस्तिष्क दिनभर मिली
जानकारी को व्यवस्थित करता है और यादों को मजबूत बनाता है। विशेष रूप से REM Sleep के दौरान मस्तिष्क की गतिविधि बढ़ जाती
है और सपने आते हैं, जो
भावनात्मक संतुलन और सीखने में मदद करते हैं।
नींद
के दौरान मस्तिष्क अनावश्यक जानकारी को हटाकर जरूरी यादों को सुरक्षित करता है।
इसे स्मृति समेकन (memory consolidation) कहा जाता है। गहरी नींद में मस्तिष्क की तरंगें धीमी हो जाती
हैं, जिससे शरीर और दिमाग
को गहरा आराम मिलता है। इस चरण में नई सीख को दीर्घकालिक स्मृति में बदला जाता है।
इसके अलावा, नींद के समय मस्तिष्क की सफाई प्रणाली
सक्रिय होती है, जिसे Glymphatic System कहा जाता है। यह प्रणाली मस्तिष्क से
विषैले पदार्थों और अपशिष्ट को बाहर निकालती है। इस प्रक्रिया से मानसिक स्पष्टता
बढ़ती है और मस्तिष्क स्वस्थ रहता है।
इस
तरह नींद के दौरान मस्तिष्क सीखने, याद
रखने, भावनाओं को संतुलित
करने और खुद को साफ करने का काम करता है, जो अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
अगर संक्षेप में समझें तो नींद में-
मस्तिष्क की “सफाई”
नींद में मस्तिष्क का ग्लिम्फैटिक सिस्टम सक्रिय होता है, जो-
· विषैले अपशिष्ट
· न्यूरोटॉक्सिन
· बेकार प्रोटीन
को बाहर निकालता है।
यही प्रक्रिया अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियों से बचाव में मदद करती है।
याददाश्त का निर्माण
दिन में जो कुछ हमने सीखा-
· नींद में उसे छांटा जाता है
· महत्वपूर्ण यादें सुरक्षित होती हैं
· गैर-जरूरी सूचनाएँ हटाई जाती हैं
इसलिए कहा जाता है कि “जो पढ़ना है, सोने से पहले पढ़ो।”
4. दिल और रक्त प्रणाली नींद में क्या करती है?
नींद
के दौरान दिल और रक्त परिसंचरण प्रणाली शरीर को आराम देने के साथ-साथ संतुलन बनाए
रखने का महत्वपूर्ण काम करती है। जब हम सोते हैं, तो हृदय गति धीरे-धीरे कम हो जाती है और
रक्तचाप भी नीचे आने लगता है। यह प्रक्रिया खासकर Non-REM Sleep के गहरे चरण में अधिक स्पष्ट होती है। इससे दिल को दिनभर के
काम के बाद आराम मिलता है और ऊर्जा की बचत होती है।
नींद के दौरान रक्त वाहिकाएँ थोड़ी फैल
जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह
संतुलित रहता है और ऊतकों तक ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुँचती है। इस समय शरीर
क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करता है, जिसमें रक्त महत्वपूर्ण पोषक तत्व और हार्मोन पहुँचाता है।
दूसरी ओर, REM Sleep में
हृदय गति थोड़ी अनियमित हो सकती है और रक्तचाप में हल्का उतार-चढ़ाव देखा जाता है।
यह मस्तिष्क की बढ़ी हुई गतिविधि के कारण होता है।
पर्याप्त नींद लेने से हृदय पर दबाव कम होता है, रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय रोग का खतरा घटता है। इसलिए अच्छी नींद दिल और रक्त प्रणाली के स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।
सरल भाषा में नींद के दौरान-
· हृदय गति धीमी होती है
· रक्तचाप गिरता है
· रक्त वाहिकाएँ आराम करती हैं
यह हृदय के लिए मरम्मत और विश्राम का समय होता है।
नींद की कमी सीधे कैसे असर करती है
· हाई ब्लड प्रेशर
· हार्ट अटैक
· स्ट्रोक
का जोखिम बढ़ाती है।
5. नींद के दौरान श्वसन प्रणाली का संतुलन
नींद
के दौरान श्वसन प्रणाली शरीर की जरूरत के अनुसार अपनी गति और गहराई को संतुलित
करती है। जब हम सोते हैं, तो
सांस लेने की दर सामान्य से थोड़ी धीमी और नियमित हो जाती है, खासकर Non-REM Sleep में। इस चरण में शरीर आराम की अवस्था में होता है, इसलिए ऑक्सीजन की मांग कम हो जाती है और
श्वसन शांत रहता है।
लेकिन REM Sleep के
दौरान सांस लेने का पैटर्न थोड़ा अनियमित हो सकता है। इस समय मस्तिष्क अधिक सक्रिय
रहता है और सपनों के कारण श्वसन की गति में हल्का उतार-चढ़ाव देखा जाता है।
नींद में श्वसन प्रणाली रक्त में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखती है। यह प्रक्रिया शरीर के तापमान और ऊर्जा की जरूरतों को नियंत्रित करने में भी मदद करती है। स्वस्थ नींद से श्वसन प्रणाली सही तरीके से काम करती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है।
संक्षेप में कहें तो नींद में-
· सांसें गहरी और नियमित होती हैं
· ऑक्सीजन उपयोग अधिक प्रभावी होता है
· फेफड़ों की कोशिकाएँ पुनर्जीवित होती हैं
लेकिन नींद की कमी या स्लीप एपनिया जैसी स्थितियाँ-
· ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित कर सकती हैं
· थकान और मस्तिष्क क्षति का कारण बन सकती हैं
6. नींद में प्रतिरक्षा तंत्र कैसे काम करता है?
नींद
के दौरान शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय रूप से काम करता है और संक्रमण से लड़ने
की क्षमता को मजबूत बनाता है। जब हम सोते हैं, खासकर Non-REM Sleep के गहरे चरण में, शरीर अधिक मात्रा में प्रतिरक्षा से जुड़े प्रोटीन बनाता है
जिन्हें Cytokines
कहा जाता है। ये प्रोटीन सूजन को
नियंत्रित करने और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
नींद के दौरान श्वेत रक्त कोशिकाएँ अधिक
प्रभावी ढंग से काम करती हैं और शरीर में मौजूद बैक्टीरिया तथा वायरस की पहचान कर
उन्हें नष्ट करने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। पर्याप्त नींद से एंटीबॉडी का
निर्माण भी बेहतर होता है, जिससे
शरीर भविष्य में होने वाले संक्रमणों से जल्दी लड़ पाता है।
यदि नींद पूरी नहीं होती, तो प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ सकता है। इससे सर्दी-जुकाम, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि अच्छी नींद लेने वाले लोगों में संक्रमण से लड़ने की क्षमता अधिक मजबूत होती है। इसलिए मजबूत प्रतिरक्षा तंत्र के लिए नियमित और गहरी नींद लेना बहुत जरूरी है।
साधारण भाषा में जब आप सोते हैं, तब-
· इम्यून सेल्स तेज़ी से बनती हैं
· एंटीबॉडीज़ सक्रिय होती हैं
· सूजन नियंत्रित होती है
यही कारण है कि-
· बीमार होने पर अधिक नींद आती है
· टीकाकरण के बाद नींद आवश्यक मानी जाती है
जितनी अच्छी नींद,उतनी अच्छी और मजबूत प्रतिरक्षा।
7. नींद में पाचन तंत्र कैसे काम करता है?
नींद के दौरान पाचन तंत्र पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि धीमी गति से काम करता रहता है। जब हम सोते हैं, तो शरीर आराम की अवस्था में चला जाता है और पाचन की प्रक्रिया भी धीरे हो जाती है। खासकर Circadian Rhythm के अनुसार रात में शरीर ऊर्जा बचाने पर ध्यान देता है, इसलिए पेट और आंतों की गतिविधि कम हो जाती है।
नींद में भोजन का पाचन धीरे-धीरे चलता रहता है और शरीर पोषक तत्वों को अवशोषित करता है। इस दौरान पेट में एसिड का स्राव कम हो जाता है, जिससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है। हालांकि बहुत भारी या देर रात का भोजन लेने पर पाचन में परेशानी हो सकती है, क्योंकि सोते समय भोजन का टूटना धीमा होता है।
नींद के दौरान यकृत (लिवर) भी शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है और ऊर्जा संतुलन बनाए रखता है। इसलिए बेहतर पाचन के लिए सोने से पहले हल्का भोजन करना और पर्याप्त नींद लेना जरूरी माना जाता है।
अगर इसे सरल भाषा में समझें तो नींद के दौरान-
· पाचन की गति धीमी होती है
· आंतों की मरम्मत होती है
· लाभकारी बैक्टीरिया सक्रिय होते हैं
देर रात खाना और कम नींद-
· मोटापा
· एसिडिटी
· डायबिटीज
का कारण बन सकता है।
8. नींद के दौरान हार्मोनल परिवर्तन
नींद
के दौरान शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जो स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखने में
मदद करते हैं। रात होते ही Melatonin का
स्राव बढ़ने लगता है, जो
शरीर को सोने का संकेत देता है और नींद को गहरा बनाता है।
गहरी नींद के दौरान Growth Hormone अधिक मात्रा में निकलता है। यह ऊतकों की
मरम्मत, मांसपेशियों के विकास
और शरीर की रिकवरी में मदद करता है। इसी समय Cortisol का
स्तर कम हो जाता है, जिससे
शरीर को आराम मिलता है और तनाव घटता है।
सुबह के समय कॉर्टिसोल धीरे-धीरे बढ़ता है, जो शरीर को जागने और सक्रिय होने में मदद करता है। इसके अलावा भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन भी प्रभावित होते हैं, जिससे पर्याप्त नींद लेने से वजन संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
नींद के दौरान कई महत्वपूर्ण हार्मोन स्रावित होते हैं-
ग्रोथ हार्मोन
· ऊतकों की मरम्मत
· मांसपेशियों का विकास
· कोशिका पुनर्निर्माण
मेलाटोनिन
· नींद का नियमन
· एंटीऑक्सिडेंट सुरक्षा
· कैंसर रोधी प्रभाव
कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन)
· नींद में इसका स्तर कम हो जाता है
· इससे मानसिक शांति मिलती है
नींद बिगड़ते ही हार्मोन असंतुलन शुरू हो जाता है।
9. मांसपेशियाँ और हड्डियों की मरम्मत
नींद
के दौरान शरीर की मांसपेशियाँ और हड्डियाँ सक्रिय रूप से मरम्मत और पुनर्निर्माण
की प्रक्रिया से गुजरती हैं। खासकर गहरी नींद, यानी Non-REM Sleep के दौरान यह प्रक्रिया सबसे अधिक प्रभावी होती है। इस समय शरीर
में Growth Hormone
का स्राव बढ़ता है, जो क्षतिग्रस्त मांसपेशियों की मरम्मत
और नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
दिनभर की शारीरिक गतिविधियों से मांसपेशियों में सूक्ष्म क्षति होती है, जिसे नींद के दौरान शरीर ठीक करता है। इसी समय हड्डियों में कैल्शियम का संतुलन बेहतर होता है और ऊतकों की मजबूती बढ़ती है। पर्याप्त नींद से मांसपेशियों की रिकवरी तेज होती है और शरीर अगले दिन अधिक ऊर्जा के साथ काम कर पाता है।
यदि नींद पूरी न हो, तो मांसपेशियों की मरम्मत धीमी हो जाती है और थकान, दर्द तथा कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए शरीर की मजबूती के लिए गहरी और नियमित नींद बहुत जरूरी है।
जब आप सोते हैं तो-
· मांसपेशियों में सूक्ष्म टूट-फूट की मरम्मत होती है
· हड्डियों में मिनरल संतुलन सुधरता है
· थकान दूर होती है
यही कारण है कि-
· खिलाड़ी और श्रमिकों के लिए नींद अनिवार्य है
· बिना नींद व्यायाम लाभहीन हो जाता है
10. नींद में सपने क्यों आते हैं?
नींद
में सपने आना मस्तिष्क की एक स्वाभाविक और जटिल प्रक्रिया है। सपने मुख्य रूप से REM Sleep के दौरान आते हैं, जब मस्तिष्क काफी सक्रिय होता है,
लेकिन शरीर आराम की अवस्था में रहता है।
इस समय मस्तिष्क दिनभर की घटनाओं, भावनाओं
और यादों को व्यवस्थित करता है, जिससे
सपनों का निर्माण होता है।
वैज्ञानिकों
के अनुसार सपने स्मृति को मजबूत करने, भावनात्मक तनाव को कम करने और रचनात्मक सोच को बढ़ाने में मदद
करते हैं। कभी-कभी मस्तिष्क अधूरी इच्छाओं, डर या अनुभवों को सपनों के रूप में
व्यक्त करता है। इसलिए सपने वास्तविक और कल्पनात्मक दोनों तरह के हो सकते हैं।
सपनों का एक उद्देश्य मानसिक संतुलन बनाए रखना भी माना जाता है। यह दिमाग को नई जानकारी को समझने और पुराने अनुभवों से जोड़ने में मदद करते हैं। इसलिए सपने नींद का सामान्य और उपयोगी हिस्सा माने जाते हैं।
इसे सरल शब्दों में समझें तो सपने-
· मानसिक तनाव को संतुलित करते हैं
· भावनात्मक प्रसंस्करण करते हैं
· रचनात्मकता बढ़ाते हैं
वैज्ञानिक मानते हैं कि सपने-
“मस्तिष्क की भावनात्मक फाइलें व्यवस्थित करने का तरीका हैं।”
11. नींद की कमी से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
नींद की कमी का शरीर और मस्तिष्क दोनों पर नकारात्मक
प्रभाव पड़ता है। जब पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो शरीर की ऊर्जा घटने लगती है और थकान, चिड़चिड़ापन तथा ध्यान की कमी
महसूस होती है। नींद की कमी से Circadian Rhythm बिगड़ जाता है, जिससे शरीर का प्राकृतिक सोने-जागने का चक्र प्रभावित
होता है।
नींद पूरी न होने पर मस्तिष्क की कार्यक्षमता घटती है, याददाश्त कमजोर हो सकती है और
निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा तनाव हार्मोन Cortisol का स्तर बढ़ जाता है, जिससे चिंता और मानसिक दबाव बढ़
सकता है।
लंबे समय तक नींद की कमी से प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर
हो जाता है, जिससे सर्दी-जुकाम और संक्रमण का
खतरा बढ़ता है। हृदय पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है और रक्तचाप बढ़ सकता है। इसलिए
स्वस्थ शरीर, बेहतर मानसिक संतुलन और ऊर्जा बनाए
रखने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है।
सरल भाषा में लगातार नींद की कमी से-
· इम्यून सिस्टम कमजोर
· हार्मोन असंतुलन
· याददाश्त कमजोर
· मोटापा और डायबिटीज
· मानसिक रोग
का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नींद की कमी कोई छोटी समस्या नहीं, बल्कि धीमा ज़हर है।
12. अच्छी नींद कैसे पाएं?अच्छी नींद पाने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाना बहुत
जरूरी है। रोज़ एक ही समय पर सोने और जागने से शरीर की Circadian Rhythm संतुलित रहती है, जिससे नींद जल्दी और गहरी आती है।
सोने से पहले मोबाइल, टीवी या तेज़ रोशनी से दूरी बनाना
भी मददगार होता है, क्योंकि ये Melatonin के स्राव को कम कर सकते हैं।
सोने से पहले हल्का भोजन करें और कैफीन या भारी खाने
से बचें। शांत और अंधेरा वातावरण नींद की गुणवत्ता सुधारता है। नियमित व्यायाम भी
अच्छी नींद में सहायक होता है, लेकिन सोने से
ठीक पहले भारी व्यायाम नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा, सोने से पहले किताब पढ़ना, ध्यान लगाना या गहरी सांस लेना
शरीर को आराम देता है। इन आदतों को अपनाने से नींद बेहतर होती है और शरीर तथा
मस्तिष्क दोनों स्वस्थ रहते हैं।
आसान भाषा में सोने से पहले -
· स्क्रीन से दूरी
· हल्का भोजन
· अंधेरा और शांत वातावरण
· तनाव कम करने की आदत
निष्कर्ष
नींद
मानव जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो शरीर और मस्तिष्क के संतुलित कार्य के लिए अत्यंत आवश्यक
है। नींद के दौरान मस्तिष्क यादों को व्यवस्थित करता है, दिल और रक्त परिसंचरण प्रणाली आराम पाती
है, और प्रतिरक्षा तंत्र
मजबूत होता है। इसके साथ ही हार्मोनल संतुलन बना रहता है तथा मांसपेशियों और हड्डियों
की मरम्मत होती है। यह पूरी प्रक्रिया शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी, यानी Circadian Rhythm के अनुसार संचालित होती है।
यदि नींद पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण हो, तो ऊर्जा बढ़ती है, मानसिक स्पष्टता बेहतर होती है और बीमारियों का खतरा कम होता है। वहीं नींद की कमी से थकान, तनाव और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली के लिए नियमित समय पर सोना, शांत वातावरण बनाना और शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है।
नींद शरीर की सबसे बड़ी मरम्मतशाला है जब आप सोते हैं, तब आपका शरीर-
· खुद को ठीक करता है
· दिमाग को साफ करता है
· हार्मोन संतुलित करता है
· प्रतिरक्षा बढ़ाता है
· जीवन शक्ति पुनः भरता है
नींद समय की बर्बादी नहीं, बल्कि जीवन को बनाए रखने की सबसे आवश्यक प्रक्रिया है। जो व्यक्ति नींद को महत्व देता है, वही वास्तव में अपने शरीर और भविष्य की रक्षा करता है।
मानव शरीर और नींद से जुड़े अनसुने तथ्य एवं अनसुलझे प्रश्नों से सम्बन्धित
हमारा यह ब्लॉग कैसा लगा ,अपने कमेन्ट के माध्यम से हमें अपनी राय या सुझाव
जरुर दें ,और मानव शरीर से जुड़े ऐसे ही रोचक तथ्यों से भरपूर लेख पढने के लिए हमें फॉलो भी अवश्य करें।






