क्या आप जानते हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े कितने लीटर तक हवा रख सकते हैं?
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके
फेफड़ों में एक बार में कितनी हवा जा सकती है? शायद आपने सुना होगा कि फेफड़े बड़े होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक
सामान्य व्यक्ति के फेफड़े लगभग 4 से
6 लीटर हवा को धारण कर सकते हैं? हाँ, आपने सही पढ़ा लीटर में! यह आंकड़ा सुनकर आपको थोड़ा
चौंकना लाजिमी है, क्योंकि
हम रोज़मर्रा की जिंदगी में केवल 500 मिलीलीटर
हवा अंदर-बाहर करते हैं। यानी हम अपनी कुल क्षमता का मात्र 10-12% ही इस्तेमाल करते हैं। बाकी तो
बेकार पड़ी रहती है। आइए इसी रहस्य को गहराई से समझते हैं।
फेफड़ों
की क्षमता क्या होती है?
मेडिकल भाषा में ‘लंग कैपेसिटी’ यानी फेफड़ों की क्षमता उस
अधिकतम वायु की मात्रा को कहते हैं जो आपके फेफड़े पूरी तरह फुलाए जाने पर धारण कर
सकते हैं। इसे लीटर या मिलीलीटर में मापा जाता है। लेकिन यह एक नियत संख्या नहीं
है यह
आपकी उम्र,
ऊंचाई, लिंग, शारीरिक सक्रियता, जीवनशैली और यहाँ तक कि आप किस
ऊँचाई पर रहते हैं, इस
पर भी निर्भर करती है।
फेफड़ों की कुल क्षमता को चार
भागों में बाँटा गया है-
1. टाइडल वॉल्यूम – सामान्य सांस में ली गई हवा
(लगभग 500
ml)
2. इंस्पिरेटरी रिजर्व वॉल्यूम – सामान्य साँस लेने के बाद
अतिरिक्त जोर से ली गई हवा (लगभग 3000 ml)
3. एक्सपिरेटरी रिजर्व वॉल्यूम – सामान्य साँस छोड़ने के बाद जोर
से छोड़ी गई हवा (लगभग 1100 ml)
4. रेजिड्यूअल वॉल्यूम – फेफड़ों में हमेशा बची रहने वाली
हवा (लगभग 1200
ml) यही कारण है कि फेफड़े पूरी तरह
खाली नहीं होते।
इन चारों का योग ही फेफड़ों की
कुल क्षमता होती
है। औसतन एक स्वस्थ युवा वयस्क (पुरुष) के फेफड़ों की क्षमता 6 लीटर तक होती है, जबकि महिलाओं में यह 4.2 से 5 लीटर के बीच रहती है।
हम
अपनी क्षमता का कितना प्रतिशत उपयोग
करते हैं?
और भी चौंकाने वाली बात जब आप जोर से साँस लेते हैं, तब भी आप अधिकतम 3.5 से 4 लीटर ही भर पाते हैं। उसके बाद
भी फेफड़ों में लगभग 1.2 लीटर
हवा बची रहती है जिसे आप चाहकर भी बाहर नहीं निकाल सकते (यही रेजिड्यूअल वॉल्यूम
है)।
एक और तथ्य पुरुषों की
फेफड़ों की क्षमता महिलाओं से 20-25% अधिक होती है। कारण? पुरुषों की छाती और डायफ्राम
बड़ा होता है। लेकिन इसे एक फायदा समझने की गलती न करें महिलाओं
के फेफड़े शरीर के आकार के हिसाब से अधिक कुशल होते हैं।
सामान्य व्यक्ति की फेफड़ों की क्षमता
अब बात करते हैं सीधे नंबरों की। यहाँ विभिन्न वर्गों के लिए औसत फेफड़ों की क्षमता (टोटल लंग कैपेसिटी) दी गई है-
|
वर्ग |
औसत
क्षमता (लीटर में) |
|
स्वस्थ
पुरुष (20-30 वर्ष) |
5.8 – 6.2 लीटर |
|
स्वस्थ
महिला (20-30 वर्ष) |
4.2 – 4.8 लीटर |
|
50+ वर्ष पुरुष |
4.0 – 4.5 लीटर |
|
धूम्रपान
करने वाला (10+ साल) |
3.0 – 3.5 लीटर |
|
पेशेवर
तैराक / एथलीट |
6.5 – 7.5 लीटर |
|
10 वर्ष का बच्चा |
2.0 – 2.5 लीटर |
लेकिन सबसे दिलचस्प है ओलंपिक तैराक माइकल फेल्प्स की क्षमता! उनके फेफड़ों में
लगभग 12 लीटर हवा जा सकती है जो
सामान्य मनुष्य से दोगुनी है। यही कारण है कि वे पानी के अंदर लंबे समय तक रह सकते
थे। कुछ गोताखोर तो 14 लीटर
तक की क्षमता रखते हैं इसे 'सुपरलंग्स' कहा जाता है।
फेफड़ों
की क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक
हर किसी के फेफड़े एक जैसे नहीं
होते। आपके फेफड़ों की वास्तविक क्षमता निम्नलिखित बातों पर निर्भर करती है-
1. ऊंचाई और
छाती का आकार
लंबे लोगों की छाती बड़ी होती है, इसलिए उनके फेफड़ों में अधिक जगह
होती है। सीधा खड़े रहने और अच्छी मुद्रा रखने से भी फेफड़े पूरी तरह फैल पाते
हैं।
2. उम्र
20-25 वर्ष की आयु में फेफड़े अपनी चरम
क्षमता पर होते हैं। 30 के
बाद हर साल लगभग 1-2% क्षमता
घटने लगती है। 50 की
उम्र तक यह 20-25%
कम हो जाती है।
बुढ़ापे में फेफड़े सख्त हो जाते हैं, उनकी
लोच घटती है।
3. लिंग
पुरुषों में हार्मोनल और शारीरिक
संरचना के कारण फेफड़े बड़े होते हैं। महिलाओं के फेफड़े छोटे होते हैं लेकिन उनकी
श्वसन मांसपेशियाँ (डायफ्राम) प्रति किलो वजन अधिक कुशल होती हैं।
4. धूम्रपान और प्रदूषण
एक सिगरेट पीने से अगले 6-8 घंटे तक आपके फेफड़ों की क्षमता 10% कम हो जाती है। लंबे समय तक
धूम्रपान से फेफड़ों की लोच नष्ट हो जाती है – वे मृत कोशिकाओं और कालिख से भर जाते हैं। धूम्रपान करने वाले के
फेफड़े 10
साल में 2-3 लीटर छोटे हो सकते हैं।
5. व्यायाम और फिटनेस
जो लोग नियमित कार्डियो (दौड़ना, तैरना, साइकिलिंग) करते हैं, उनके फेफड़े अधिक कुशल हो जाते
हैं। एथलीटों में वाइटल कैपेसिटी (अधिकतम छोड़ने और लेने की हवा) 6 लीटर तक हो जाती है।
6. भौगोलिक ऊँचाई
जो लोग पहाड़ों (ऊँचाई पर) रहते
हैं, उनके फेफड़े स्वाभाविक रूप से
बड़े हो जाते हैं क्योंकि ऑक्सीजन कम होती है। तिब्बती लोगों की फेफड़ों की क्षमता
मैदानी लोगों से 30% अधिक
होती है।
7. बीमारियाँ
अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों में संक्रमण (निमोनिया), टीबी, फेफड़ों का कैंसर ये सभी क्षमता को काफी घटा देते
हैं। सीओपीडी के मरीजों में क्षमता सामान्य का 40% से भी कम रह जाती है।
वाइटल
कैपेसिटी (VC)
और टोटल लंग कैपेसिटी
(TLC) में अंतर
बहुत से लोग इन दोनों टर्म्स को
मिक्स कर देते हैं। तो इसे ऐसे समझें-
·
टोटल
लंग कैपेसिटी (TLC)-फेफड़ों
के अंदर की पूरी जगह (हवा की कुल मात्रा) = 6 लीटर
तक
·
वाइटल
कैपेसिटी (VC) -अधिकतम
साँस लेने के बाद अधिकतम साँस छोड़ने पर निकलने वाली हवा = TLC - रेजिड्यूअल वॉल्यूम = लगभग 4.5-5 लीटर
आम बोलचाल में लोग VC को ही 'फेफड़ों की क्षमता' कहते हैं। पर वैज्ञानिक दृष्टि
से TLC असली 'कुल क्षमता' है। और सबसे महत्वपूर्ण माप है FEV1 (फोर्स्ड एक्सपायरेटरी वॉल्यूम इन
1 सेकंड) एक
सेकंड में आप कितनी हवा जोर से बाहर निकाल सकते हैं। इससे ही पता चलता है कि आपके
फेफड़े सच में स्वस्थ हैं या नहीं।
कैसे
जांचें आपके फेफड़ों की क्षमता?
अगर आप यह जानना चाहते हैं कि वास्तव में आपके फेफड़े कितनी हवा रख सकते
हैं, तो स्पिरोमेट्री नामक टेस्ट करवाएँ। यह एक साधारण, बिना सुई और दर्द का टेस्ट है।
अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर में किया जाता है।
टेस्ट कैसे होता है?
आप एक मशीन
(स्पिरोमीटर) से जुड़ी ट्यूब में जोर से साँस लेते हैं और फिर जोर से छोड़ते हैं।
मशीन रिकॉर्ड करती है-
·
आपने
कितनी हवा ली
·
एक
सेकंड में कितनी छोड़ी
·
कुल
कितनी छोड़ सकते हैं
नॉर्मल रेंज-
एक स्वस्थ 30 वर्षीय पुरुष का FEV1 लगभग 4.5 लीटर प्रति सेकंड होना चाहिए।
महिलाओं में 3.5
लीटर। यदि आपका FEV1 सामान्य से 20% कम है, तो यह COPD या अस्थमा का संकेत हो सकता है।
घबराएँ नहीं,
लेकिन डॉक्टर से जरूर
मिलें।
घरेलू उपाय (मोटा अंदाज़ा)-
एक बैलून लें। अधिकतम
साँस लें और बैलून में एक बार में पूरी हवा छोड़ें। बैलून के घेरे को मापें। फिर
उसका आकार तुलना करें लेकिन यह बहुत अनुमानिक है। सटीकता
के लिए स्पिरोमेट्री ही बेहतर।
एथलीट्स
कैसे बढ़ाते हैं 50% अधिक
क्षमता?
जब आप सोचते हैं कि
"फेफड़ों की क्षमता कितनी होती है?", तो
आप यह भी सोचें कि क्या इसे
बढ़ाया जा सकता है? जवाब
है हाँ, पर केवल सीमित स्तर तक। आप अपने
फेफड़ों का शारीरिक आकार नहीं बढ़ा सकते (हड्डियों की छाती तो नहीं बदल सकते), लेकिन आप वाइटल कैपेसिटी को 30-40% तक बढ़ा सकते हैं।
पेशेवर तैराक और गोताखोर ये
तरीके अपनाते हैं-
1. गहरी साँस लेने का प्रशिक्षण – रोज़ाना 10 मिनट डायफ्रामैटिक ब्रीदिंग करते
हैं। वे पेट से साँस लेना सीखते हैं।
2. अपनिया ट्रेनिंग – धीरे-धीरे पानी के अंदर साँस
रोकने का समय बढ़ाना (लेकिन यह पेशेवरों के लिए खतरनाक हो सकता है)
3. प्राणायाम – अनेक योगी 3-4 लीटर की अतिरिक्त क्षमता हासिल
कर लेते हैं। भस्त्रिका और कपालभाति से फेफड़ों की लोच बढ़ती है।
4. उच्च ऊँचाई पर प्रशिक्षण – कम ऑक्सीजन में फेफड़े मजबूरन
अधिक लाल रक्त कोशिकाएँ बनाते हैं।
क्या वास्तव में 10 लीटर क्षमता संभव है?
जी हाँ, लेकिन केवल शीर्ष एथलीटों या
आनुवंशिक वरदान वालों में। फेल्प्स जैसे विशेष लोगों की छाती अत्यधिक लचीली होती
है। आम आदमी के लिए अधिकतम प्राप्त करने योग्य क्षमता 7.5 लीटर के आसपास ही है।
फेफड़ों
को लेकर आम गलतफहमियाँ
मिथक 1- "भारी धूम्रपान छोड़ने के बाद फेफड़े पूरी तरह ठीक हो
जाते हैं"
धूम्रपान छोड़ने के बाद कुछ
सिलिया (बाल जैसी कोशिकाएँ) तो ठीक हो जाती हैं, लेकिन जो एल्वियोली (ऑक्सीजन लेने वाली थैलियाँ) नष्ट हो चुकी हैं, वह कभी वापस नहीं आतीं। 10 साल धूम्रपान करने वालों में 20-30% स्थायी क्षति रह जाती है।
मिथक 2- "साँस रोकने के अभ्यास से फेफड़ों का आकार बढ़ जाता
है"
साँस रोकना फेफड़ों के अंदर की
मांसपेशियों को मजबूत करता है, लेकिन
वास्तविक शारीरिक आकार (फेफड़ों की थैली) नहीं बढ़ता। क्षमता थोड़ी बढ़ती है, पर 10% से अधिक नहीं।
मिथक 3- "बच्चों के फेफड़े छोटे होते हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए"
बिल्कुल गलत। बच्चों के फेफड़े
उनके शरीर के अनुपात में अधिक कुशल होते हैं। दरअसल, बच्चों की शारीरिक सक्रियता उनके फेफड़ों को विकसित करती है। कम
सक्रिय बच्चे वयस्क होकर कम क्षमता वाले होते हैं।
मिथक 4- "पतले लोगों के फेफड़े कमजोर होते हैं"
फेफड़ों की
क्षमता का वजन से सीधा संबंध नहीं है। असल में मोटापा फेफड़ों पर दबाव डालता है, जिससे क्षमता
घटती है। एक फिट पतला व्यक्ति भारी व्यक्ति से अधिक क्षमता रख सकता है।
मिथक 5- "फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए महंगे सप्लीमेंट्स
चाहिए"
कोई जरूरत नहीं। प्राकृतिक तरीके
जैसे गहरी साँस, तैराकी, दौड़, और प्रदूषण से बचाव ही काफी हैं।
कोई 'मैजिक पिल' फेफड़े नहीं बढ़ा सकती।
फेफड़ों
की क्षमता बढ़ाने के घरेलू
और प्राकृतिक उपाय
चिंता न करें, आप अभी भी अपनी फेफड़ों की
क्षमता में सुधार कर सकते हैं चाहे आपकी उम्र 20 हो या 60। ये 10 तरीके अपनाइए-
1.
प्राणायाम
– अनुलोम-विलोम
दाएँ-बाएँ नाक से
बारी-बारी साँस लें। 5 मिनट
रोज – 3 महीने में क्षमता 15% बढ़ सकती है।
2.
बैलून
ब्लोइंग एक्सरसाइज
रोज 10 बार एक बैलून को पूरा फुलाएँ।
इससे साँस छोड़ने वाली मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
3.
तैरना
– सबसे
अच्छा व्यायाम
पानी के प्रतिरोध के
कारण फेफड़े अधिक मेहनत करते हैं। हफ्ते में 3 दिन तैरने से क्षमता 20% तक
बढ़ सकती है।
4.
तीव्र
वॉक या जॉगिंग
ज़ोर से चलने पर
फेफड़े अधिक ऑक्सीजन लेने को मजबूर होते हैं। धीरे-धीरे गति बढ़ाएँ।
5.
हँसी
योग
जोर से हँसने से
डायफ्राम तेजी से हिलता है, जिससे
फेफड़े साफ होते हैं और क्षमता बढ़ती है। शोध भी कहते हैं।
6.
गर्म
पानी की भाप
भाप लेने से म्यूकस
(कफ) पिघलता है, जिससे
वायुमार्ग खुलते हैं। इसे अपनाने से फेफड़ों का खाली भाग कम होता है, प्रभावी क्षमता बढ़ती है।
7.
नीम
और तुलसी का सेवन
ये प्राकृतिक
एंटी-इंफ्लेमेटरी हैं। कच्ची तुलसी की पत्तियाँ चबाने या नीम की काढ़ा पीने से
फेफड़ों की सफाई होती है।
8.
प्रदूषण
से बचें – मास्क
पहनें
एयर पॉल्यूशन फेफड़ों
की कोशिकाओं को मारता है। N95 मास्क
का उपयोग करें, खासकर
सुबह-शाम।
9.
धूम्रपान
और वेपिंग से दूरी
यह सबसे बड़ा कारक
है। एक दिन में भी धूम्रपान छोड़ने पर 2 सप्ताह
में क्षमता में सुधार दिखने लगता है।
10.
अदरक-हल्दी
वाला दूध
हल्दी का करक्यूमिन
फेफड़ों के सूजन को कम करता है। रोज रात को पिएँ फेफड़ों
की लोच बढ़ती है।
मानव फेफड़ों की
अधिकतम क्षमता
दुनिया का सबसे अधिक फेफड़ों की
क्षमता का रिकॉर्ड अगर किसी मनुष्य के पास है? तो अब तक का ज्ञात रिकॉर्ड ब्रिटिश
फ्रीडाइवर (बिना ऑक्सीजन के गोताखोर) स्टिग
सेवरिन्सन के
पास है उनकी वाइटल कैपेसिटी लगभग 14 लीटर थी। उन्होंने 2012 में 202 मीटर की गहराई में साँस रोककर
गोता लगाया था (साँस रोकने का समय 22 मिनट!)।
तुलना के लिए, एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति
अधिकतम 1.5-2
मिनट ही साँस रोक
सकता है। सीमा इससे आगे बहुत कठिन है।
वैज्ञानिक अनुमान है कि मानव
फेफड़ों की अधिकतम सैद्धांतिक सीमा लगभग 15-16 लीटर
हो सकती है,
लेकिन यह छाती की
हड्डियों और मांसपेशियों के कारण व्यावहारिक नहीं है। हम व्हेल या डॉल्फिन की तरह 90% ऑक्सीजन निकालने में सक्षम नहीं
हैं।
रोचक
तथ्य
·
जापानी
योगी – कुछ
सिद्ध योगियों के फेफड़े 40 साल
के अभ्यास के बाद 10 लीटर
तक जाते हैं।
· नीदरलैंड
के फ्रीडाइवर्स – दुनिया
के सबसे अधिक क्षमता वाले एथलीट यहीं पाए जाते हैं, औसतन 9.5 लीटर।
· भारत
के प्रदूषित शहर (दिल्ली, मुंबई) में रहने वालों की फेफड़ों की
क्षमता गाँवों के लोगों से 25% कम
पाई गई है।
धूम्रपान करने वाली महिलाओं में फेफड़ों की क्षमता में गिरावट पुरुषों से भी तेजी से होती है क्योंकि उनके फेफड़े पहले से छोटे होते हैं।
अक्सर
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1- क्या फेफड़ों की क्षमता को बिना मशीन के घर पर मापा जा
सकता है?
उत्तर- हाँ, एक मोटा अनुमान बैलून टेस्ट से
लगाया जा सकता है, लेकिन
यह सटीक नहीं है। सही माप के लिए स्पिरोमेट्री टेस्ट करवाएँ, जो किसी भी पल्मोनोलॉजिस्ट के
पास उपलब्ध है।
प्रश्न 2- क्या फेफड़ों की एक क्षमता दूसरे अंगों को प्रभावित
करती है?
उत्तर- बिल्कुल। कम क्षमता का मतलब है
शरीर को कम ऑक्सीजन मिलना जिससे हृदय पर अधिक दबाव पड़ता
है, ब्रेन फॉग, कमजोरी, और यहाँ तक कि डिप्रेशन भी हो
सकता है।
प्रश्न 3- क्या फेफड़ों की क्षमता कम होना कोविड-19 के बाद आम है?
उत्तर- हाँ। बहुत से कोविड-19 मरीज़ों (खासकर जिन्हें निमोनिया
हुआ) में लंबे समय तक फेफड़ों की क्षमता घटी रहती है इसे
‘लॉन्ग कोविड’ कहते हैं। रिकवरी में 6-12 महीने लग सकते हैं।
प्रश्न 4- सबसे तेज फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने वाला एक व्यायाम कौन
सा है?
उत्तर- ‘डीप ब्रीदिंग विद पर्स्ड लिप्स’ – गहरी साँस लें और फिर होंठों को
सिकोड़कर धीरे-धीरे छोड़ें। इसे दिन में 10 बार
करने से 3
हफ्तों में अंतर
दिखेगा।
प्रश्न 5: क्या फेफड़ों का कैंसर होने से पहले क्षमता घटती है?
उत्तर- अक्सर हाँ। फेफड़ों के कैंसर के
शुरुआती चरणों में असामान्य कोशिकाएँ हवा के प्रवाह को रोकने लगती हैं जिससे
क्षमता धीरे-धीरे घटती है। लेकिन यह लक्षण अकेले कैंसर का संकेत नहीं है, डॉक्टर से जाँच करवाएँ।
प्रश्न 6- बच्चों में फेफड़ों की सामान्य क्षमता क्या है?
उत्तर- 5 साल – लगभग 1.2 लीटर; 10 साल – 2.2 लीटर; 15 साल – लड़कों में 3.8, लड़कियों में 3.2 लीटर। यह ऊंचाई पर भी निर्भर
करता है।
निष्कर्ष
तो दोस्तों, अब आप जान गए होंगे कि फेफड़ों की क्षमता कितनी होती है सामान्यतः 4 से 6 लीटर, लेकिन महान एथलीट 7-10 लीटर तक ले जा सकते हैं। सबसे
चौंकाने वाली बात यह है कि हम रोजमर्रा में अपनी इस क्षमता का केवल 10-15% ही उपयोग करते हैं। बाकी प्रतिभा
बेकार पड़ी रहती है।
अब आपके पास दो रास्ते हैं या
तो इसे नज़रअंदाज करें और कमज़ोर फेफड़ों के साथ बूढ़े हों, या थोड़ी सी मेहनत करें प्राणायाम
करें, तैराकी करें, धूम्रपान छोड़ें, और अपनी श्वसन क्षमता में 50% तक सुधार लाएँ। याद रखें, फेफड़े ही आपके शरीर के मास्टर
ऑर्गन हैं जो ऑक्सीजन की कमी से हर दूसरे
अंग को बीमार बना सकते हैं।
अगर आपको यह जानकारी लाभकारी लगी, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार
के साथ साझा करें। एक सांस एक जिंदगी। गहरी साँस लें और
स्वस्थ रहें।
नोट-यह लेख केवल सूचनात्मक
उद्देश्यों के लिए है। कोई भी चिकित्सीय परीक्षण या व्यायाम शुरू करने से पहले योग्य
चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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