7156863209947891,DIRECT,fec0942fa0 क्या आप जानते हैं? रोंगटे खड़े होना सिर्फ ठंड में ही नहीं बल्कि भावनाओं के पीछे भी होते हैं

क्या आप जानते हैं? रोंगटे खड़े होना सिर्फ ठंड में ही नहीं बल्कि भावनाओं के पीछे भी होते हैं

 

क्या आप जानते हैं? रोंगटे खड़े होना सिर्फ ठंड में ही नहीं बल्कि भावनाओं पीछे भी होते  हैं


क्या -आप -जानते -हैं? -रोंगटे- खड़े -होना- सिर्फ -ठंड- में- ही -नहीं- बल्कि- भावनाओं-  के -पीछे- भी -होते-  हैं


आपने महसूस किया होगा कि कभी ठंडी हवा चलने पर, तो कभी किसी डरावनी फिल्म का कोई सीन देखकर, तो कभी अपने पसंदीदा गाने का वह हिस्सा सुनते हुए जब अचानक पूरे शरीर में एक लहर-सी दौड़ जाती है और हाथों-पैरों के बाल खड़े हो जाते हैं। इसे हम हिंदी में 'रोंगटे खड़े होना' कहते हैं, अंग्रेजी में 'गूज़बंप्स' (Goosebumps) और चिकित्सा विज्ञान की भाषा में 'पाइलोइरेक्शन' (Piloerection) कहा जाता है

यह एक ऐसी शारीरिक प्रतिक्रिया है जिसे हममें से लगभग हर किसी ने कभी न कभी अनुभव किया है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि यह सिर्फ ठंड में ही क्यों होता है? डर, खुशी, उत्साह, प्रशंसा, कामोत्तेजना आदि ऐसी कौन-सी भावनाएं हैं जो हमारे रोंगटे खड़े कर देती हैंऔर सबसे महत्वपूर्ण सवाल कि आखिर ऐसा क्यों होता है?

आज की इस ब्लॉग पोस्ट में हम इस अद्भुत शारीरिक घटना के हर पहलू को विस्तार से समझेंगे वैज्ञानिक कारणों से लेकर मनोवैज्ञानिक पहलुओं तक, विकासवादी इतिहास से लेकर आधुनिक शोध तक। तो चलिए, जानते  हैं आज की इस रोमांचक जानकारी को।

रोंगटे खड़े होना क्या है?



            क्या -आप -जानते- हैं? -रोंगटे -खड़े -होना- सिर्फ -ठंड- में- ही- नहीं-बल्कि -भावनाओं - के- पीछे- भी- होते-  हैं



रोंगटे खड़े होना हमारी त्वचा की एक अनैच्छिक (involuntary) प्रतिक्रिया है, जिसमें त्वचा के रोमों (hair follicles) के आधार पर छोटे-छोटे उभार बन जाते हैं और शरीर के बाल सीधे खड़े हो जाते हैं। यह जैसे 'गूज़बंप्स', 'गूज़ पिंपल्स', 'कटिस एनसेरिना' (Cutis Anserina) जिसका शाब्दिक अर्थ है 'हंस की त्वचा'चिकित्सा विज्ञान में इसे 'पाइलोइरेक्शन' (Piloerection) या 'हॉरिपिलेशन' (Horripilation) भी कहा जाता है। यह नाम लैटिन शब्द 'पिलस' (बाल) और 'इरेक्टियो' (खड़ा होना) से बना है। सीधे शब्दों में कहें तो बालों का खड़ा हो जाना।

लेकिन यह प्रतिक्रिया सिर्फ इंसानों में ही नहीं होती। जानवरों में भी यह देखने को मिलती है जब बिल्ली डर जाती है, तो उसके बाल खड़े हो जाते हैं। कुत्ता जब खतरा महसूस करता है तो उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह एक ऐसी प्रतिक्रिया है जो हमारे पूर्वजों से विरासत में मिली है।


रोंगटे खड़े होने की प्रक्रिया



क्या- आप -जानते- हैं? -रोंगटे -खड़े -होना -सिर्फ- ठंड- में -ही -नहीं- बल्कि -भावनाओं - के- पीछे -भी -होते-  हैं



रोंगटे खड़े होना शरीर की एक स्वचालित जैविक प्रतिक्रिया है, जो ठंड, डर, तनाव, उत्साह या किसी भावनात्मक अनुभव के दौरान दिखाई देती है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में गूसबम्प्स या पाइलोइरेक्शन कहा जाता है। हमारी त्वचा के प्रत्येक बाल के आधार पर एक छोटी मांसपेशी होती है, जिसे एरेक्टर पिली मांसपेशी कहते हैं। जब शरीर को ठंड महसूस होती है या मस्तिष्क किसी तीव्र भावना का अनुभव करता है, तब स्वायत्त तंत्रिका तंत्र इन मांसपेशियों को सक्रिय कर देता है।

मांसपेशियों के सिकुड़ने से बाल सीधे खड़े हो जाते हैं और त्वचा पर छोटे-छोटे उभार बन जाते हैं, जिन्हें रोंगटे कहा जाता है। पशुओं में यह प्रतिक्रिया शरीर की गर्मी बनाए रखने और दुश्मन के सामने स्वयं को बड़ा दिखाने में मदद करती है। मनुष्यों में भी यह प्रतिक्रिया आज मौजूद है, हालांकि इसका व्यावहारिक लाभ कम हो गया है। फिर भी यह हमारे तंत्रिका तंत्र और भावनाओं के बीच गहरे संबंध का एक रोचक उदाहरण है।

जब रोंगटे खड़े होते हैं, तो शरीर के अंदर एक पूरी प्रक्रिया चलती है। आइए इसे सरल भाषा में समझते हैं।

एरेक्टर पिली मांसपेशियां



क्या -आप -जानते- हैं?- रोंगटे -खड़े -होना -सिर्फ -ठंड- में -ही -नहीं -बल्कि -भावनाओं - के- पीछे -भी- होते  -हैं



हमारी त्वचा के हर बाल के रोम (hair follicle) के आधार पर एक बहुत छोटी चिकनी मांसपेशी जुड़ी होती है, जिसे 'एरेक्टर पिली' (Arrector Pili) कहा जाता है-। ये मांसपेशियां इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें नंगी आंखों से देखा नहीं जा सकता। लेकिन जब ये सिकुड़ती हैं, तो बाल की जड़ खिंच जाती है और बाल सीधा खड़ा हो जाता है। इसी सिकुड़न के कारण त्वचा पर छोटे-छोटे उभार बन जाते हैं यही हैं हमारे रोंगटे खड़े होते हैं

सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (Sympathetic Nervous System) की भूमिका



क्या -आप -जानते- हैं? -रोंगटे -खड़े -होना -सिर्फ -ठंड -में- ही -नहीं -बल्कि -भावनाओं - के- पीछे- भी -होते - हैं


ये एरेक्टर पिली मांसपेशियां हमारे सहानुभूति तंत्रिका तंत्र (Sympathetic Nervous System) से जुड़ी होती हैं। यह वही तंत्रिका तंत्र है जो हमारे 'फाइट ऑर फ्लाइट' (Fight or Flight) प्रतिक्रिया यानी 'लड़ो या भागो' की स्थिति को नियंत्रित करता है। यह एक अनैच्छिक (अचेतन) प्रणाली है, जिसका मतलब है कि हम इस पर अपना नियंत्रण नहीं रख सकते।

जब मस्तिष्क किसी उत्तेजना जैसे कि ठंड, डर, या गहन भावना को महसूस करता है, तो वह सहानुभूति तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर देता है। यह तंत्रिका तंत्र फिर एरेक्टर पिली मांसपेशियों को संकेत भेजता है, जिससे वे सिकुड़ जाती हैं और रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

एड्रेनालाईन हार्मोन की भूमिका



क्या -आप -जानते -हैं? -रोंगटे- खड़े- होना -सिर्फ -ठंड -में -ही- नहीं- बल्कि- भावनाओं - के -पीछे- भी -होते - हैं



इस पूरी प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण खिलाड़ी है एड्रेनालाईन हार्मोन। जब हम डरते हैं, उत्साहित होते हैं या किसी गहन भावना का अनुभव करते हैं, तो हमारी किडनी के ऊपर स्थित एड्रेनल ग्रंथि (Adrenal Gland) शरीर में एड्रेनालाईन हार्मोन छोड़ती है। यह हार्मोन पूरे शरीर में फैल जाता है, जिससे त्वचा के नीचे की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

यही कारण है कि डरावनी फिल्म देखते समय, कोई प्रेरणादायक भाषण सुनते समय, या अपना पसंदीदा गाना सुनते समय हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

रोंगटे खड़े होने के कारण


क्या -आप -जानते- हैं?- रोंगटे -खड़े -होना -सिर्फ -ठंड -में- ही- नहीं- बल्कि -भावनाओं-  के- पीछे- भी- होते - हैं

अब हम मुख्य प्रश्न पर आते हैं रोंगटे खड़े होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

1- ठंड (Cold Temperature)

यह सबसे आम और सबसे प्राचीन कारण है। जब हमें ठंड लगती है, तो हमारा मस्तिष्क शरीर को गर्म रखने की कोशिश करता है। एरेक्टर पिली मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, बाल खड़े हो जाते हैं, और त्वचा के रोम छिद्र (pores) बंद हो जाते हैं। इससे शरीर की गर्मी अंदर ही रुक जाती है और हमें ठंड से बचाव मिलता है।

हालांकि, इंसानों में यह प्रक्रिया उतनी कारगर नहीं है जितनी जानवरों में होती है, क्योंकि हमारे शरीर पर जानवरों जितने घने बाल नहीं होते। फिर भी, यह हमारे विकासवादी इतिहास का एक अहम हिस्सा है।

2- भावनाएं (Emotions)

यहीं से हमारे विषय की शुरुआत होती है। गहन भावनाएं भी रोंगटे खड़े कर सकती हैं। आइए देखें कौन-सी भावनाएं और क्यों-

डर (Fear)- यह सबसे क्लासिक उदाहरण है। हॉरर फिल्म देखना, अचानक कोई तेज आवाज सुनना, या खतरे की स्थिति में हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं-। यह हमारी फाइट-ऑर-फ्लाइट प्रतिक्रिया का हिस्सा है शरीर खतरे के लिए तैयार हो जाता है।

खुशी और उत्साह (Joy and Excitement)- कोई बहुत अच्छी खबर सुनना, कोई सफलता मिलना, या किसी प्रियजन से मिलनाये सब भी रोंगटे खड़े कर सकते हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि तीव्र खुशी भी सहानुभूति तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर देती है।

प्रशंसा और विस्मय (Awe and Admiration)- किसी अद्भुत कलाकृति को देखना, किसी महान व्यक्तित्व का भाषण सुनना, या प्रकृति का कोई अद्वितीय नजारा देखना ये सब हमें विस्मय से भर देते हैं और रोंगटे खड़े कर देते है।

कामोत्तेजना (Sexual Arousal)- यौन उत्तेजना की स्थिति में भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यौन प्रतिक्रिया और रोंगटे खड़े करने वाली मांसपेशियां एक ही तंत्रिका तंत्र से जुड़ी हैं।

उदासी और भावुकता (Sadness and Emotionality)- कभी किसी मार्मिक फिल्म का सीन देखकर या कोई पुरानी याद ताजा करने वाली बात सुनकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

3- संगीत और कला का जादू

'फ्रिसन' (Frisson) एक फ्रेंच शब्द है, जिसका मतलब है 'कंपकंपी' या 'सिहरन'। यह वह अनुभूति है जब संगीत, फिल्म, या कोई कलात्मक अनुभव इतना गहरा होता है कि वह शारीरिक प्रतिक्रिया उत्पन्न कर देता है जैसे कि रोंगटे खड़े होना या रीढ़ में सिहरन दौड़ना-

वैज्ञानिकों ने पाया है कि जब हम अपना पसंदीदा गाना सुनते हैं, खासकर उसका वह हिस्सा जिसका हम बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं, तो हमारे दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) नामक 'खुशी का हार्मोन' रिलीज होता है। डोपामाइन की यही स्राव रोंगटे खड़े कर देती है और हमें वह अद्भुत एहसास कराती है।

एक अध्ययन में पाया गया कि संगीत सुनते समय होने वाली यह प्रतिक्रिया मस्तिष्क के उन्हीं केंद्रों को सक्रिय करती है जो कुछ नशीले पदार्थों के सेवन से सक्रिय होते हैं।

4- ASMR (Autonomous Sensory Meridian Response)

हाल के वर्षों में ASMR बहुत चर्चा में रहा है। यह एक ऐसी अनुभूति है जिसमें कुछ खास आवाजें जैसे फुसफुसाहट, कागज की सरसराहट, या धीमी आवाज में बात करना सिर और गर्दन में एक सुखद झुनझुनी पैदा करती हैं, जो अक्सर रोंगटे खड़े करने के साथ आती है।


विकासवादी दृष्टिकोण

अब सवाल उठता है आखिर यह प्रतिक्रिया इंसानों में क्यों बनी रही? इसका विकासवादी (evolutionary) क्या महत्व है?

ठंड से बचाव

सबसे पहला और सबसे स्पष्ट कारण है ठंड से बचाव। जब जानवरों के बाल खड़े होते हैं, तो उनके बालों के बीच हवा की एक परत बन जाती है जो गर्मी को रोक कर रखती है। यह एक प्राकृतिक इंसुलेशन (insulation) सिस्टम है। हमारे पूर्वज, जो कहीं अधिक बालों वाले थे, इससे लाभान्वित होते थे।

खतरे में बड़ा दिखना

दूसरा महत्वपूर्ण कारण है डरावना या कुछ बड़ा दिखना। जब कोई जानवर डरता है या खतरा महसूस करता है, तो उसके बाल खड़े हो जाते हैं और वह अपने से बड़ा दिखने लगता है। बिल्ली को सोचिए जब वह डरती है तो उसकी पीठ झुक जाती है और सारे बाल खड़े हो जाते हैं, जिससे वह अपने दुश्मन को डरा सके। यही प्रतिक्रिया हमारे पूर्वजों में भी थी खतरे की स्थिति में रोंगटे खड़े होना उन्हें अधिक खतरनाक दिखाता था।

सामाजिक संकेत (Social Signaling)

कुछ शोध बताते हैं कि जानवरों में रोंगटे खड़े होना एक सामाजिक संकेत के रूप में भी काम करता है यह दूसरे जानवरों को बताता है कि वे डरे हुए हैं, उत्तेजित हैं, या खतरे में हैं। इंसानों में यह भूमिका कम हो गई है, लेकिन इसके निशान आज भी बाकी हैं।

आधुनिक इंसानों में यह 'अवशेष' (Vestigial) है?

चूंकि इंसानों के शरीर पर जानवरों जितने बाल नहीं हैं, इसलिए रोंगटे खड़े होने का हमारे लिए कोई खास व्यावहारिक लाभ नहीं रह गया है। फिर भी, यह प्रतिक्रिया हमारे तंत्रिका तंत्र में इतनी गहराई से समाई हुई है कि यह आज भी बनी हुई है। वैज्ञानिक इसे एक 'अवशेषी अंग' (vestigial response) की तरह मानते हैं जैसे हमारा अपेंडिक्स (Appendix), जिसका आज कोई खास काम नहीं है लेकिन वह मौजूद है।

हालांकि, कुछ नए शोध यह भी बताते हैं कि रोंगटे खड़े करने वाली नसें बालों के रोम की स्टेम कोशिकाओं से भी जुड़ी होती हैं, और यह बालों के विकास में मदद कर सकती हैं।


क्या रोंगटे वाकई भावनाओं से जुड़े हैं?

यहां एक दिलचस्प मोड़ आता है। हालांकि हम आमतौर पर मानते हैं कि रोंगटे भावनाओं का प्रत्यक्ष परिणाम हैं, कुछ नए शोध इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं।

एक 2024 के अध्ययन में पाया गया कि पाइलोइरेक्शन (रोंगटे खड़े होना) उतना भावनाओं से जुड़ा नहीं है जितना पहले सोचा जाता था। शोधकर्ताओं ने पाया कि-

1.     रोंगटे नए या अनजान उत्तेजनाओं (novel stimuli) पर अधिक नहीं होते

2.     लोगों द्वारा बताई गई भावनाएं और देखे गए रोंगटे आपस में मेल नहीं खाते

3.     एक ही उत्तेजना को बार-बार दिखाने पर भी रोंगटे बने रहते हैं, जबकि भावनाएं कम हो जाती हैं

यानी, हो सकता है कि रोंगटे भावनाओं का परिणाम न होकर किसी और गहरी शारीरिक प्रक्रिया का हिस्सा हों। यह शोध अभी प्रारंभिक अवस्था में है, लेकिन यह हमारी पारंपरिक समझ को चुनौती देता है।

एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि भावनात्मक रोंगटे के दौरान त्वचा की चालकता (skin conductance) और हृदय गति (heart rate) बढ़ जाती है जो सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की सक्रियता के संकेत हैं। इसका मतलब है कि भले ही रोंगटे सीधे भावनाओं से जुड़े न हों, वे निश्चित रूप से उसी तंत्रिका तंत्र का हिस्सा हैं जो भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करता है।


रोंगटे खड़े होने से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  1.  .     सभी लोगों को रोंगटे नहीं होते, और जिन्हें होते हैं उन्हें भी हर स्थिति में नहीं होते। यह व्यक्ति-विशेष में भिन्न होता है।
  2.  .     कुछ लोग रोंगटे खड़े होने की अनुभूति को 'स्किन ऑर्गेज्म' (skin orgasm) कहते हैं, खासकर जब यह संगीत या ASMR से होता है।
  3.  .     रोंगटे सिर्फ उन्हीं जगहों पर होते हैं जहां बाल होते हैं हाथ, पैर, गर्दन, आदि।
  4.  .     कुछ मामलों में रोंगटे खड़े होना किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे टेम्पोरल लोब एपिलेप्सी (Temporal Lobe Epilepsy) या ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्सिया (Autonomic Dysreflexia)
  5.  .     कुछ नशीली दवाओं के सेवन या वापसी (withdrawal) के दौरान भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं।
  6.  .     कुछ लोग सिर्फ कल्पना करके ही रोंगटे खड़े कर सकते हैं बिना किसी बाहरी उत्तेजना के।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1- रोंगटे खड़े होना सेहत के लिए हानिकारक है क्या?

उत्तर- नहीं, रोंगटे खड़े होना पूरी तरह से सामान्य और हानिरहित है। यह एक प्राकृतिक शारीरिक प्रतिक्रिया है जो अपने आप ठीक हो जाती है। अगर यह लंबे समय तक बना रहे या अन्य लक्षणों के साथ हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।

प्रश्न 2- क्या सभी भावनाएं रोंगटे खड़े कर सकती हैं?

उत्तर- जरूरी नहीं। तीव्र भावनाएं जैसे डर, खुशी, उत्साह, विस्मय, और कामोत्तेजना आमतौर पर रोंगटे खड़े कर सकती हैं। हल्की या सामान्य भावनाओं से शायद ऐसा न हो।

प्रश्न 3- संगीत सुनते समय रोंगटे क्यों खड़े हो जाते हैं?

उत्तर- जब संगीत हमें गहराई से छूता है, तो हमारे दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है-। डोपामाइन की यह बाढ़ सहानुभूति तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती है, जिससे एरेक्टर पिली मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

प्रश्न 4- क्या जानवरों को भी रोंगटे होते हैं?

उत्तर- हाँ, जानवरों में भी यह प्रतिक्रिया होती है। बिल्ली, कुत्ता, और कई अन्य जानवर डर या ठंड लगने पर अपने बाल खड़े कर लेते हैं। जानवरों में यह ज्यादा उपयोगी है क्योंकि उनके शरीर पर घने बाल होते हैं जो गर्मी बचाने या खतरे में बड़ा दिखने में मदद करते हैं।

प्रश्न 5- क्या रोंगटे खड़े होने को रोका जा सकता है?

उत्तर- क्योंकि यह एक अनैच्छिक (involuntary) प्रतिक्रिया है, इसलिए इसे सीधे तौर पर रोका नहीं जा सकता। हालांकि, अगर यह ठंड की वजह से है तो गर्म कपड़े पहनने से, और अगर भावनाओं की वजह से है तो उस स्थिति से दूर होने से यह अपने आप ठीक हो जाता है।

प्रश्न 6- रोंगटे खड़े होने का चिकित्सकीय नाम क्या है?

उत्तर- चिकित्सा विज्ञान में रोंगटे खड़े होने को 'पाइलोइरेक्शन' (Piloerection), 'कटिस एनसेरिना' (Cutis Anserina), या 'हॉरिपिलेशन' (Horripilation) कहा जाता है।

प्रश्न 7- क्या रोंगटे खड़े होना किसी बीमारी का संकेत हो सकता है?

उत्तर- आमतौर पर नहीं। लेकिन दुर्लभ मामलों में, यह टेम्पोरल लोब एपिलेप्सी, ऑटोनोमिक डिसरिफ्लेक्सिया, या किसी तंत्रिका तंत्र विकार का संकेत हो सकता है। अगर यह बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार हो या अन्य लक्षणों के साथ हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।


निष्कर्ष

रोंगटे खड़े होना चाहे ठंड से हो, डर से, खुशी से, या किसी मधुर संगीत से-हमारे शरीर की एक अद्भुत और जटिल प्रतिक्रिया है। यह हमारे विकासवादी इतिहास की एक झलक है, जो हमें हमारे बालों वाले पूर्वजों से जोड़ती है। यह हमारे सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली को दर्शाती है, और यह बताती है कि हमारा शरीर और मन कितने गहराई से जुड़े हुए हैं।

हालांकि विज्ञान अभी भी इस घटना के कई पहलुओं को समझ रहा है जैसे कि क्या यह वाकई भावनाओं से सीधे जुड़ी है या किसी और प्रक्रिया का उप-उत्पाद है लेकिन इतना तय है कि यह हमारे जीवन का एक अनोखा और सुंदर अनुभव है।

अगली बार जब आपके रोंगटे खड़े हों चाहे किसी भी कारण से तो याद रखें कि यह आपके शरीर की एक प्राचीन, गहरी और अर्थपूर्ण प्रतिक्रिया है। यह आपको बताती है कि आप जीवित हैं, आप महसूस कर रहे हैं, और आपका शरीर हर पल आपकी रक्षा के लिए तैयार है।


 




Hidden Knowledge

Hello, I am A.K Gudiyal, I am a resident of Pauri Garhwal, Uttarakhand. I am a blog writer and my aim as a writer is to give messages to readers that inspire them and bring positive changes in their lives. In my articles I not only write on travel and lifestyle but also share experiences about technology, nature and special people. I share sports inspiration and stories in my articles, so that readers are inspired to adopt them in their lives. As a nature lover, I try to put into words the beauty of mountains, rivers and lush greenery. I believe that connecting with nature gives us mental peace and balance. Because I am an Indian, I would like that through my articles you should get the experience and knowledge of the historical journey from ancient unbroken India to present day India. My writing is an effort to inspire everyone, so that together we can create a positive and inspiring world. Name-A.K.Gudiyal Email Address -kumaranoop3200@gmail.com Contact Number--9557938679

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने