ठंड लगने पर हमारा शरीर क्यों कांपता
है?
परिचय
सर्दियों
का मौसम आते ही हम सभी कंबल, स्वेटर
और गर्म कपड़ों की तलाश करने लगते हैं। लेकिन कड़ाके की ठंड में अक्सर हमारा शरीर
बिना किसी चेतावनी के कांपने लगता है। ठंड लगने पर शरीर का कांपना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे हर इंसान गुजरता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर
ऐसा क्यों होता है?
क्या यह कमजोरी का संकेत है? क्या यह किसी बीमारी की शुरुआत
है? या फिर यह शरीर की कोई खास
प्रक्रिया है?
दरअसल, ठंड लगने पर शरीर
का कांपना या कंपकंपी आना कई
लोगों को कमजोरी का संकेत लग सकता है, लेकिन
वास्तव में यह शरीर की
एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक रक्षा प्रणाली है।
इसका उद्देश्य शरीर के तापमान को
संतुलित बनाए रखना है।
यानी जब हमें ठंड लगती है और हम कांपते हैं, तो
यह हमारे शरीर का अपने आपको बचाने का एक तरीका है।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार
से जानेंगे कि ठंड में शरीर क्यों कांपता है, इसके पीछे कौन-सी साइंस काम करती
है, हाइपोथैलेमस की क्या भूमिका है, और किन-किन कारणों से कंपकंपी हो
सकती है।
शरीर
का सामान्य तापमान
इंसानी
शरीर एक निश्चित तापमान पर सबसे अच्छा काम करता है। हमारे शरीर के अंदर जितने भी
जैविक प्रक्रियाएं होती हैं जैसे
खाना पचाना,
हार्मोन बनाना, रक्त संचार
ये सब एक सामान्य
तापमान की रेंज में ही सही ढंग से काम करते हैं।
मनुष्य का सामान्य शरीर तापमान 98.6°F
(लगभग 37°C) होता है। अगर बाहरी वातावरण या किसी अन्य
कारण से शरीर का तापमान सामान्य से ऊपर या नीचे जाता है, तो शरीर खुद-ब-खुद तापमान को
सामान्य के पास लाने की कोशिश करता है। अगर यह तापमान बहुत ज्यादा ऊपर या बहुत
ज्यादा नीचे चला जाए, तो
यह हमारे लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।
छोटे-छोटे
बदलाव भी शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए शरीर ने तापमान को
नियंत्रित रखने के लिए बेहद सटीक और जटिल प्रणाली विकसित की है।
कंपकंपी
क्या होती है?
कंपकंपी (Shivering)
शरीर की मांसपेशियों का अनैच्छिक (involuntary)
और तीव्र संकुचन-विश्राम है। जब हमें ठंड लगती है, तो हमारी मांसपेशियां बहुत तेजी
से सिकुड़ती और फैलती हैं।- इस प्रक्रिया से शरीर में गर्मी
पैदा होती है।
आसान
शब्दों में कहें तो कंपकंपी हमारी बॉडी का एक ऑटोमैटिक रिस्पांस है। जब शरीर ठंड महसूस करता है, तो दिमाग मांसपेशियों को तेजी से
सिकोड़ने और फैलाने का संदेश भेजता है। यह
तेजी से होने वाला संकुचन और फैलाव ही कंपकंपी के रूप में महसूस होता है।
दिलचस्प
बात यह है कि कंपकंपी के
दौरान शरीर की गर्मी पैदा करने की क्षमता सामान्य से 5 गुना तक बढ़
सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, कंपकंपी से बेसल
मेटाबॉलिक रेट 2 से 5 गुना तक बढ़
सकता है।
हाइपोथैलेमस
की भूमिका
हाइपोथैलेमस मस्तिष्क का एक छोटा लेकिन
अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जो
शरीर के आंतरिक संतुलन (होमियोस्टेसिस) को बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता
है। यह शरीर के तापमान, भूख,
प्यास, नींद-जागरण चक्र, रक्तचाप और ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित
करता है। हाइपोथैलेमस पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करके थायरॉयड, अधिवृक्क (एड्रिनल) और प्रजनन ग्रंथियों
के हार्मोन स्राव को प्रभावित करता है। इसके अलावा यह तनाव, भय, खुशी और क्रोध जैसी भावनात्मक
प्रतिक्रियाओं के नियमन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में पानी की
मात्रा, रक्त में लवणों का
संतुलन तथा चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को नियंत्रित करने में भी इसका योगदान होता है।
यदि हाइपोथैलेमस की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाए, तो मोटापा, हार्मोन असंतुलन, नींद संबंधी विकार, शरीर के तापमान में गड़बड़ी और प्रजनन
संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए हाइपोथैलेमस का
सही ढंग से कार्य करना अत्यंत आवश्यक है।
हमारे
शरीर का तापमान नियंत्रण एक छोटे से क्षेत्र द्वारा किया जाता है, जिसे हाइपोथैलेमस (Hypothalamus) कहते हैं। यह दिमाग के बिल्कुल
नीचे, ब्रेनस्टेम के ठीक ऊपर स्थित एक
बादाम के आकार का क्षेत्र है।
हाइपोथैलेमस
ही हमारे शरीर का "मास्टर थर्मोस्टेट" है। जब बाहर बहुत गर्मी या बहुत
ठंड होती है,
तो यह शरीर को संकेत
भेजता है कि तापमान को सामान्य स्थिति में वापस लाया जाए।
कैसे
काम करता है पूरा सिस्टम?
- त्वचा पर मौजूद सेंसर्स- हमारी त्वचा पर छोटे-छोटे नर्व्स (तंत्रिका अंत) होते हैं, जो तापमान में बदलाव को महसूस करते हैं। ये सेंसर्स ठंड का पता चलने पर दिमाग को सिग्नल भेजते हैं।
- हाइपोथैलेमस तक सूचना पहुंचना- त्वचा से आने वाले सिग्नल हाइपोथैलेमस तक पहुंचते हैं। हाइपोथैलेमस शरीर के कोर (अंदरूनी) तापमान को भी महसूस करता है।
- आदेश जारी होना- जब हाइपोथैलेमस को पता चलता है कि शरीर का तापमान सामान्य से कम हो रहा है, तो यह मांसपेशियों को संकेत भेजता है।
- मांसपेशियों में संकुचन- ये संकेत मांसपेशियों तक पहुंचते हैं और वे तेजी से सिकुड़ने-फैलने लगती हैं यही है कंपकंपी।
हाइपोथैलेमस खासतौर पर हृदय और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों के आसपास की मांसपेशियों को निशाना बनाता है। इससे शरीर के सबसे जरूरी अंग पहले गर्म होते हैं।
कंपकंपी
से गर्मी कैसे पैदा होती है?
कंपकंपी शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा
प्रक्रिया है, जो
ठंड लगने पर शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए सक्रिय होती है। जब बाहरी तापमान
बहुत कम हो जाता है, तो
त्वचा के तापमान रिसेप्टर यह संकेत मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस तक पहुँचाते हैं। हाइपोथैलेमस तुरंत
कंकालीय मांसपेशियों को बहुत तेज़ी से सिकुड़ने और ढीला होने का आदेश देता है। इन
अनैच्छिक मांसपेशीय संकुचनों में बड़ी मात्रा में ATP (एडेनोसिन
ट्राइफॉस्फेट) ऊर्जा खर्च होती है। ATP के टूटने पर ऊर्जा का अधिकांश भाग ऊष्मा
के रूप में निकलता है, जिससे
शरीर का आंतरिक तापमान बढ़ने लगता है। यही कारण है कि ठंड में शरीर कांपने लगता
है। कंपकंपी तब तक जारी रहती है, जब
तक शरीर पर्याप्त गर्मी उत्पन्न करके अपने सामान्य तापमान (लगभग 37°C) के करीब नहीं पहुँच जाता। यह प्रक्रिया
हाइपोथैलेमस द्वारा नियंत्रित होती है और शरीर को हाइपोथर्मिया जैसी गंभीर स्थिति
से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
जब
मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती और फैलती हैं, तो
इससे ऊर्जा का
उपयोग होता
है और गर्मी पैदा होती है। यह उसी तरह है जैसे जब आप
व्यायाम करते हैं तो आपको गर्मी महसूस होती है
बस कंपकंपी में यह
प्रक्रिया आपकी इच्छा के बिना, अपने
आप होती है।
ठंड लगने पर कंपकंपी का मुख्य उद्देश्य शरीर के
अंदर गर्मी पैदा करना है ताकि
शरीर का तापमान 37°C के
आसपास बना रहे। कंपकंपी के दौरान त्वचा की कोशिकाएं भी सिकुड़ने लगती हैं, ताकि शरीर के अंदर जो गर्मी पैदा
हो, वह बाहर न निकल जाए।
शोध
बताते हैं कि कंपकंपी के
जरिए गर्मी पैदा करना वयस्क मनुष्यों में ठंड से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। कंकाल की मांसपेशियां (skeletal muscles) ठंड के संपर्क में आने पर गर्मी
पैदा करने में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं।
एक
दिलचस्प बात यह है कि जितनी ज्यादा ठंड होगी, कंपकंपी उतनी
ही तेज होगी और गर्मी का उत्पादन भी उतना ही अधिक होगा।
शरीर में कंपकंपी के अन्य कारण
हालांकि
ठंड कंपकंपी का सबसे आम कारण है, लेकिन कंपकंपी
सिर्फ ठंड के कारण ही नहीं होती। आइए
जानते हैं अन्य कारण-
1. बुखार
ठंड
के अलावा, कंपकंपी का
सबसे आम कारण बुखार होता है। जब
शरीर में संक्रमण होता है, तो
इम्यून सिस्टम शरीर का तापमान बढ़ाने की कोशिश करता है। कंपकंपी शरीर द्वारा गर्मी
पैदा करने का एक तरीका है, जिससे
शरीर का तापमान और भी बढ़ जाता है।
कंपकंपी
अक्सर बुखार आने से
पहले होती
है या बुखार बढ़ने का संकेत होती है। जब आपको बुखार
आता है, तो आपको ठंड भी लग सकती है और
कंपकंपी भी हो सकती है। सर्दी-जुकाम, फ्लू, मलेरिया, या सेप्सिस जैसी गंभीर स्थितियों
में भी कंपकंपी हो सकती है।
2. संक्रमण
मूत्र
मार्ग में संक्रमण और श्वसन संक्रमण भी कभी-कभी ठंड लगने और कंपकंपी का कारण बन
सकते हैं।
3. चिंता
और तनाव
जब
आप चिंतित होते हैं, तो
आपका शरीर "लड़ो या भागो" मोड में चला जाता है। इस दौरान एड्रेनालाईन का
स्तर बढ़ जाता है, जिससे
मांसपेशियों में तेजी से संकुचन-विश्राम हो सकता है और कंपकंपी हो सकती है।
4. निम्न
रक्त शर्करा
जब
खून में शुगर का स्तर अचानक गिर जाता है, तो
शरीर कांपने लगता है। यह डायबिटीज के मरीजों में विशेष रूप से देखने को मिलता है।
5. निर्जलीकरण
शरीर
में पानी की कमी होने पर भी कंपकंपी हो सकती है।
6. हार्मोनल
बदलाव
थायरॉइड
ग्रंथि की कम सक्रियता से शरीर में गर्मी पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है।
महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल बदलाव भी ठंड महसूस करने को प्रभावित
करते हैं।
7. दवाइयों
के साइड इफेक्ट
कुछ
दवाइयों के तंत्रिका संबंधी दुष्प्रभाव होते हैं, जिनसे कंपकंपी हो सकती है। कैफीन या शराब से दूरी भी कंपकंपी का
कारण बन सकती है।
8. तंत्रिका
संबंधी समस्याएं
पार्किंसंस
रोग या आवश्यक कंपन जैसी बीमारियों में भी शरीर कांप सकता है।
9. डर
या भावनात्मक प्रतिक्रिया
अचानक
डर लगने या तेज भावनात्मक प्रतिक्रिया के कारण एड्रेनालाईन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कंपकंपी हो सकती है।
कंपकंपी
के लक्षण
कंपकंपी के सबसे आम लक्षण निम्नलिखित हैं-
- शीत की अनुभूति – बहुत ज्यादा ठंड महसूस होना
- मांसपेशियों में कंपन – शरीर के विभिन्न हिस्सों में कंपन
- शरीर में ठंडी लहरें – ऐसा लगना जैसे शरीर में बारी-बारी से ठंडी लहरें दौड़ रही हों
- रोंगटे खड़े होना – त्वचा पर छोटे-छोटे उभार आ जाना
- दांतों का किटकिटाना – जबड़े की मांसपेशियों के कंपन से दांत किटकिटाने लगते हैं
- हृदय गति का बढ़ना – गर्मी पैदा करने के लिए दिल की धड़कन तेज हो जाती है
- त्वचा का पीला पड़ना – त्वचा में रक्त प्रवाह कम हो जाने से त्वचा पीली पड़ जाती है
- थकान और थकावट – लंबे समय तक कंपकंपी रहने से थकान होती है
जब
कंपकंपी हो तो क्या करें?
आम
घरेलू उपाय
- गर्म कपड़े पहनें – तुरंत कोई गर्म कपड़ा या कंबल ओढ़ लें।
- गर्म पेय पिएं – गर्म चाय, दूध या सूप पिएं।
- कमरे का तापमान बढ़ाएं – हीटर चालू करें या कमरे को गर्म रखें।
- आराम करें – शरीर को आराम दें ताकि ऊर्जा गर्मी पैदा करने में लग सके।
- पर्याप्त पानी पिएं – निर्जलीकरण से बचने के लिए पानी पीते रहें।
यदि ठंड लगना
पर्यावरणीय कारकों या किसी हल्की बीमारी के कारण होता है, तो अक्सर आराम, पानी और गर्मी से इसका इलाज किया
जा सकता है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
हालांकि
कंपकंपी को ठंड के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया की एक स्वाभाविक घटना माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यह
किसी गहरी, गंभीर
अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति का संकेत भी हो सकता है
तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें यदि-
- कंपकंपी कुछ घंटों या दिनों से अधिक समय तक बनी रहे
- कंपकंपी के साथ तेज बुखार, कमजोरी या सिरदर्द हो
- कंपकंपी कंपन में बदल जाए या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी लगे
- सांस लेने में तकलीफ हो
- भ्रम या चेतना में कमी हो
- शरीर का तापमान 35°C से नीचे चला जाए (हाइपोथर्मिया)
ध्यान दें
कि कंपकंपी
COVID-19
का भी एक लक्षण हो
सकता है,
जिसके साथ अक्सर
बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ
होती है।
अत्यधिक
ठंड लगना कब हो जाता है खतरनाक?
जब
शरीर बहुत ज्यादा ठंडा हो जाता है और सामान्य तापमान 35°C से नीचे चला जाता है, तो इसे हाइपोथर्मिया कहते हैं।
हाइपोथर्मिया
में शरीर जितनी गर्मी खोता है, उससे
ज्यादा गर्मी पैदा नहीं कर पाता। शुरुआत में शरीर कंपकंपी के जरिए गर्मी पैदा करने
की कोशिश करता है, लेकिन गंभीर
हाइपोथर्मिया में कंपकंपी बंद हो जाती है
यह एक खतरनाक संकेत
है।
अगर
आप अभी भी ठंडे हैं लेकिन कांपना बंद हो गया है, तो तुरंत मदद लें
यह संकेत है कि शरीर
ऊर्जा बचाने के लिए कंपकंपी बंद कर चुका है।
कंपकंपी
और शरीर की अन्य प्रतिक्रियाएं
जब
हाइपोथैलेमस को ठंड का पता चलता है, तो
वह कई तरह की प्रतिक्रियाएं करता है-
1. रोंगटे
खड़े होना
दिमाग
बालों के प्रत्येक रोम के आसपास की छोटी मांसपेशियों को सिकोड़ने का संकेत देता है, जिससे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह प्रतिक्रिया त्वचा के पास
गर्म हवा को फंसाकर शरीर की गर्मी बचाने में मदद करती है।
2. त्वचा
की रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना
जब
शरीर का तापमान गिरता है, तो
त्वचा में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। ऐसा
इसलिए होता है क्योंकि त्वचा में कम रक्त भेजा जाता है ताकि ठंडी हवा के संपर्क
में न आए,
और ज्यादा रक्त
महत्वपूर्ण अंगों को भेजा जाता है।
यह
प्रक्रिया आगे गर्मी के
नुकसान को रोकती है और शरीर के कोर की रक्षा करती है
3. शरीर
को सिकोड़ना
ठंड
में खुद को गले लगाने की जो इच्छा होती है, वह
भी हाइपोथैलेमस से ही आती है। शरीर
के कम हिस्से को ठंड के संपर्क में लाकर, कम
गर्मी बाहर निकलती है।
क्या
सभी को एक जैसी ठंड लगती है?
ठंड के प्रति संवेदनशीलता हर व्यक्ति में
अलग-अलग होती है। कुछ लोग हल्की ठंड में ही कांपने
लगते हैं,
जबकि कुछ लोग कड़ाके
की ठंड में भी बिना कंपकंपी के रह सकते हैं।
किन
बातों पर निर्भर करता है?
- शरीर का आकार और सतह क्षेत्रफल- जितना बड़ा शरीर का सतह क्षेत्रफल होता है, उतनी ज्यादा गर्मी खोता है।
- शरीर में वसा की मात्रा- त्वचा के नीचे मौजूद वसा एक बेहतरीन इंसुलेटर है। जितनी ज्यादा सबक्यूटेनियस फैट होगी, उतनी बेहतर इंसुलेशन होगी।
- लिंग (Gender)- महिलाओं और पुरुषों में ठंड के प्रति प्रतिक्रिया अलग होती है। महिलाओं में वैसोकॉन्स्ट्रिक्शन (रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना) ज्यादा स्पष्ट होता है।
- जेनेटिक्स (Genetics)- ठंडे हाथ-पैर कुछ हद तक हमारे जीन्स पर भी निर्भर करते हैं।
- हार्मोनल बदलाव- महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान ठंड के प्रति प्रतिक्रिया बदलती है। पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का उच्च स्तर ठंड के प्रति संवेदनशीलता कम कर सकता है।
- ठंड के आदी होना- जो लोग ठंडे क्षेत्रों में रहते हैं, उनका शरीर ठंड के अनुकूल हो जाता है और वे कम कांपते हैं।
अक्सर
पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ठंड
लगने पर शरीर क्यों कांपता है?
उत्तर- ठंड
लगने पर शरीर कांपता है क्योंकि यह शरीर की एक प्राकृतिक रक्षा प्रणाली है।
कंपकंपी के दौरान मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती-फैलती हैं, जिससे गर्मी पैदा होती है और
शरीर का तापमान सामान्य (37°C) बना
रहता है-।
2. क्या
कंपकंपी होना किसी बीमारी का संकेत है?
उत्तर- कंपकंपी
हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होती यह
ठंड के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया है। लेकिन अगर कंपकंपी के साथ बुखार, कमजोरी, या सिरदर्द हो, तो यह संक्रमण या वायरल फीवर की
शुरुआत हो सकती है।
3. बुखार
में कंपकंपी क्यों होती है?
उत्तर- बुखार
में कंपकंपी इसलिए होती है क्योंकि शरीर की इम्यून सिस्टम तापमान बढ़ाने की कोशिश
करती है। कंपकंपी शरीर द्वारा गर्मी पैदा करने का एक तरीका है, जिससे शरीर का तापमान और बढ़ जाता
है।
4. क्या
बिना बुखार के भी कंपकंपी हो सकती है?
उत्तर- हां, बिना बुखार के भी कंपकंपी हो
सकती है। इसके कारणों में ठंडे वातावरण का संपर्क, चिंता, निम्न
रक्त शर्करा,
निर्जलीकरण, या कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट
शामिल हैं।
5. कंपकंपी
कब तक रहनी चाहिए?
उत्तर- आमतौर
पर कंपकंपी तब तक रहती है जब तक शरीर का तापमान सामान्य न हो जाए। अगर कंपकंपी कुछ
घंटों या दिनों से अधिक समय तक बनी रहे, तो
डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
6. कंपकंपी
और कंपन (Tremor)
में क्या अंतर है?
उत्तर- कंपकंपी
आमतौर पर ठंड या बुखार के कारण होने वाली अनैच्छिक मांसपेशी संकुचन है, जो गर्मी पैदा करने के लिए होती
है। कंपन किसी तंत्रिका संबंधी समस्या, पार्किंसंस
रोग, या दवाइयों के कारण हो सकता है।
7. क्या
COVID-19
में कंपकंपी होती है?
उत्तर- हां, ठंड लगना COVID-19 के लक्षणों में से एक हो सकता है, जिसके साथ अक्सर बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ
होती है-।
अगर आपको COVID-19
का संदेह है, तो जांच करवाना चाहिए।
8. क्या
चिंता से कंपकंपी हो सकती है?
उत्तर- हां, चिंता और तनाव के कारण कंपकंपी
हो सकती है। चिंता के दौरान शरीर "लड़ो या भागो" मोड में चला जाता है, जिससे एड्रेनालाईन रश होता है और
मांसपेशियों में तेजी से संकुचन-विश्राम होता है।
9. कंपकंपी
से बचने के लिए क्या करें?
उत्तर- कंपकंपी से बचने के लिए गर्म
कपड़े पहनें,
गर्म पेय पिएं, कमरे का तापमान बनाए रखें, और पर्याप्त पानी पिएं। अगर
कंपकंपी बुखार के कारण है, तो
डॉक्टर की सलाह लें।
10. क्या
कंपकंपी खतरनाक हो सकती है?
उत्तर- आमतौर
पर कंपकंपी खतरनाक नहीं होती यह
शरीर की सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है। लेकिन अगर कंपकंपी के साथ गंभीर लक्षण हों
(तेज बुखार,
सांस लेने में तकलीफ, भ्रम, या शरीर का तापमान 35°C से नीचे), तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष
ठंड लगने पर शरीर का कांपना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह
हमारे शरीर की एक अद्भुत सुरक्षात्मक प्रणाली है। जब बाहर ठंड होती है, तो हमारा हाइपोथैलेमस (दिमाग का
थर्मोस्टेट) सक्रिय हो जाता है और मांसपेशियों को तेजी से सिकुड़ने-फैलने का संकेत
देता है। इस प्रक्रिया से गर्मी पैदा होती है और हमारा शरीर 37°C के सामान्य तापमान पर बना रहता
है।
हालांकि
कंपकंपी ठंड के प्रति एक सामान्य प्रतिक्रिया है, लेकिन यह बुखार, संक्रमण, चिंता, निम्न रक्त शर्करा, या अन्य चिकित्सीय स्थितियों का
भी संकेत हो सकती है। अगर कंपकंपी लंबे समय तक बनी रहे या गंभीर लक्षणों के साथ हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अगली बार जब आपको ठंड में कंपकंपी हो, तो याद रखें यह आपके शरीर की ओर से एक संकेत है कि वह आपको गर्म रखने की पूरी कोशिश कर रहा है।