7156863209947891,DIRECT,fec0942fa0 इंसान को डरते समय पसीना क्यों आता है ?

इंसान को डरते समय पसीना क्यों आता है ?

 


इंसान को डरते समय पसीना क्यों आता है ?  




परिचय

क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आप बिना किसी शारीरिक मेहनत के अचानक पसीने से तर-बतर हो गए हैं? शायद तब जब आपने कोई डरावनी फिल्म देखी हो, किसी परीक्षा से पहले घबराहट हुई हो, या किसी अप्रत्याशित खतरे का सामना किया हो। डरते समय पसीना क्यों आता है  यह सवाल हम सभी ने कभी न कभी ज़रूर पूछा होगा।

गर्मी में या व्यायाम के दौरान पसीना आना तो समझ आता है  शरीर को ठंडा रखने के लिए। लेकिन जब हम डरते हैं, तो अक्सर मौसम ठंडा होता है और हमने कोई मेहनत नहीं की होती। फिर भी हथेलियाँ गीली हो जाती हैं, माथे पर बूँदें आ जाती हैं, और कभी-कभी तो ठंडा पसीना छूटने लगता है। यह कोई रहस्य नहीं, बल्कि हमारे शरीर की एक अत्यंत प्राचीन और बुद्धिमान सुरक्षा प्रणाली है  जो लाखों सालों से हमें खतरों से बचाने के लिए काम कर रही है।

डर और पसीना का यह अटूट रिश्ता हमारे शरीर की उस अद्भुत व्यवस्था का परिणाम है, जिसे फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स यानी लड़ो-या-भागो अनुक्रिया कहा जाता है। यह वही प्रतिक्रिया है जो हमारे पूर्वजों को जंगली जानवरों से बचाती थी और आज भी हमें सड़क पर अचानक आती कार से बचने में मदद करती है।

आइए, आज के इस ब्लॉग में विस्तार से समझते हैं कि डरने पर शरीर में क्या होता हैपसीना क्यों बहता हैकिस तरह का पसीना आता है, और क्या यह सामान्य है या किसी बीमारी का संकेत। यह जानकारी न केवल आपकी जिज्ञासा शांत करेगी, बल्कि आपको अपने शरीर की इस अनोखी क्षमता को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद करेगी।

डर के कारण पसीना आना 





इंसान डरता है तो पसीना क्यों बहाता है? इस सवाल का जवाब हमारे शरीर की सबसे पुरानी और सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली में छिपा है। डर कोई सामान्य भावना नहीं है  यह एक सहज वृत्ति है, जो सभी जानवरों और इंसानों में खतरे के प्रति पूर्व-क्रमादेशित) होती है। यह भावना हमें संभावित खतरे से आगाह करती है और शरीर को उस स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती है।

जब हम किसी खतरे को महसूस करते हैं  चाहे वह वास्तविक हो, काल्पनिक हो, या फिर महज़ हमारी कल्पना हो तो हमारा दिमाग तुरंत सक्रिय हो जाता है। मस्तिष्क का अमिगडाला नामक हिस्सा, जो भावनाओं और खतरे की पहचान का केंद्र है, तुरंत हाइपोथैलेमस को संकेत भेजता है। यहीं से पूरी प्रक्रिया शुरू होती है और इसी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है पसीना

दिलचस्प बात यह है कि जब हम डरते हैं, तो हमारा शरीर बिना गर्मी के ही पसीना बहाने लगता है। यह पसीना शरीर को ठंडा करने के लिए नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से अलग उद्देश्य के लिए होता है  हमें खतरे से लड़ने या भागने के लिए तैयार करना। इसलिए इसे अक्सर "स्ट्रेस स्वेट" (तनाव वाला पसीना) या "इमोशनल स्वेटिंग" (भावनात्मक पसीना) कहा जाता है।

फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स




फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स (जिसे तात्क्षणिक तनाव प्रतिक्रिया या अतिउत्तेजना भी कहा जाता है) को पहली बार 1914 में अमेरिकी वैज्ञानिक वॉल्टर ब्रैडफोर्ड कैनन  ने वर्णित किया था। यह हमारे सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की सबसे महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाओं में से एक है।

आइए, इसे चरण-दर-चरण समझें-

चरण 1- खतरे की पहचान (Threat Perception)

जब हम कोई खतरा देखते, सुनते या महसूस करते हैं  जैसे कोई गुर्राता हुआ कुत्ता, सड़क पर अचानक आती कार, या यहाँ तक कि कोई डरावनी फिल्म तो हमारी आँखें, कान या अन्य इंद्रियाँ यह संकेत मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं। मस्तिष्क का अमिगडाला इस संकेत को "खतरा" के रूप में पहचानता है।

चरण 2- हाइपोथैलेमस का सक्रियण (Hypothalamus Activation)

अमिगडाला तुरंत हाइपोथैलेमस जो मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है  उसको संकेत भेजता है। हाइपोथैलेमस शरीर की कई स्वचालित क्रियाओं (जैसे हृदय गति, श्वसन, तापमान) का नियंत्रक है। यह सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करने का आदेश देता है।

चरण 3- सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम का सक्रियण

सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम  हमारे ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम जो अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है उसका एक हिस्सा है। जब यह सक्रिय होता है, तो यह पूरे शरीर में एक साथ कई बदलाव करता है।

चरण 4- एड्रेनालाईन और हार्मोनों का स्राव (Hormone Release)

सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एड्रेनल ग्रंथियों जो गुर्दों के ऊपर स्थित होती हैं) को संकेत भेजता है। ये ग्रंथियाँ तुरंत एड्रेनालाईन और नॉरएड्रेनालाईन नामक हार्मोनों को रक्तप्रवाह में छोड़ती हैं। इसके अलावाकोर्टिसोल तनाव हार्मोन) का स्राव भी बढ़ जाता है।

चरण 5- शरीर में व्यापक बदलाव

इन हार्मोनों के कारण शरीर में एक साथ कई बदलाव होते हैं-

  •         हृदय गति तेज़ हो जाती है और दिल तेज़ी से धड़कने लगता है।
  •         रक्तचापबढ़ जाता है।
  •         श्वसन तेज़ और गहरी हो जाती है  जिससे अधिक ऑक्सीजन मिलती है
  •         मांसपेशियाँ तन जाती हैं और लड़ने या भागने के लिए तैयार हो जाती हैं।
  •        पाचन तंत्र  धीमा हो जाता है या रुक जाता है  जिससे ऊर्जा बचती है।
  •         रक्त पाचन तंत्र से हटकर मांसपेशियों की ओर भेजा जाता है।
  •         प्यूपिल्स  फैल जाते हैं  अधिक रोशनी आँखों में आती है।
  •         रक्त शर्करा बढ़ जाती है जिसके कारण अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है।
  •         पसीना  बढ़ जाता है।

यह सब कुछ लगभग तुरंत होता है  सेकंडों के भीतर। यही कारण है कि कभी-कभी हम बिना सोचे-समझे खतरे से बचने के लिए कूद जाते हैं।

डर के दौरान पसीना आने के वैज्ञानिक कारण




डर लगने पर पसीना आना शरीर की "फाइट या फ्लाइट" प्रतिक्रिया का हिस्सा है। जब मस्तिष्क का अमिगडाला किसी खतरे को महसूस करता है, तो वह हाइपोथैलेमस को संकेत भेजता है। इसके बाद सिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है और एड्रेनालिन तथा नॉरएड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन का स्राव बढ़ जाता है। ये हार्मोन हृदय की धड़कन और श्वसन गति को बढ़ाने के साथ-साथ त्वचा की एक्राइन स्वेद ग्रंथियों को भी सक्रिय करते हैं। परिणामस्वरूप हथेलियों, तलवों और बगल में तेजी से पसीना आने लगता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पसीना त्वचा की पकड़) को बेहतर बनाने और शरीर को संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार करने में सहायक हो सकता है। यह प्रतिक्रिया पूरी तरह स्वचालित होती है और शरीर की सुरक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

अब हम मुख्य प्रश्न पर आते हैं डरते समय पसीना क्यों बहता है? इसके तीन मुख्य वैज्ञानिक कारण हैं-

कारण 1- शरीर को ठंडा रखना (Thermoregulation)

जब फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स सक्रिय होता है, तो हमारी मांसपेशियाँ तन जाती हैं और रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। इससे शरीर में गर्मी पैदा होती है। यदि शरीर ज़्यादा गर्म हो जाए, तो मांसपेशियाँ ठीक से काम नहीं कर पातीं। इसलिए शरीर पसीना बहाकर खुद को ठंडा रखता है  ताकि मांसपेशियाँ लड़ने या भागने के लिए इष्टतम तापमान पर रहें। यह वही कारण है जो व्यायाम के दौरान पसीना आने के पीछे भी है।

कारण 2- सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की प्रत्यक्ष उत्तेजना

सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम का एक सीधा कार्य है  पसीने की ग्रंथियों को सक्रिय करना। जब यह तंत्र सक्रिय होता है, तो यह सीधे तौर पर एक्राइन पसीने की ग्रंथियों को उत्तेजित करता है। ये ग्रंथियाँ पूरे शरीर में होती हैं, लेकिन हथेलियों, पैरों के तलवों, चेहरे और बगलों में इनकी संख्या सबसे अधिक होती है। यही कारण है कि डरने पर सबसे पहले हथेलियाँ गीली होती हैं और माथे पर पसीना आता है।

कारण 3- विकासवादी संकेत 

शोध बताते हैं कि डर के दौरान निकलने वाले पसीने की गंध अन्य इंसानों के मस्तिष्क को प्रभावित करती है। ब्रेन स्कैन से पता चला है कि किसी डरे हुए व्यक्ति के पसीने को सूँघने से मस्तिष्क के वे हिस्से सक्रिय हो जाते हैं जो भावनाओं और सामाजिक संकेतों को संसाधित करते हैं।

एक सिद्धांत यह है कि डर का पसीना एक विकासवादी व्यवहार है। जब कोई व्यक्ति डरता है और पसीना बहाता है, तो उस पसीने की गंध आस-पास के लोगों के दिमाग को अधिक सतर्क और खतरे के प्रति संवेदनशील बना देती है। यह एक प्रकार का रासायनिक अलार्म है  जो पूरे समूह को खतरे से सचेत करता है। जंगलों में रहने वाले हमारे पूर्वजों के लिए यह एक बहुत उपयोगी गुण था  अगर कोई शिकारी (जैसे बाघ) पास आ रहा हो, तो एक व्यक्ति का डर का पसीना पूरे समूह को सतर्क कर सकता था।

ठंडा पसीना डर का सबसे अजीब लक्षण





क्या आपने कभी ठंडा पसीना महसूस किया है? यह वह स्थिति है जब आपको बहुत अधिक पसीना आ रहा होता है, लेकिन आपकी त्वचा ठंडी और चिपचिपी  महसूस होती है। यह अक्सर अत्यधिक डर, घबराहट  या चिंता के दौरान होता है।

ठंडा पसीना क्यों आता है? जब फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स सक्रिय होता है, तो शरीर में कई बदलाव एक साथ होते हैं-

  •       एड्रेनालाईन के कारण रक्त वाहिकाएँ त्वचा की सतह के पास सिकुड़ जाती हैं। इससे त्वचा पर  रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और त्वचा ठंडी महसूस होती है।
  •         साथ हीपसीने की ग्रंथियाँ सक्रिय हो जाती हैं और पसीना निकलने लगता है।
  •         नतीजतन, ठंडी त्वचा पर पसीना आता है  जिसे हम "ठंडा पसीना" कहते हैं।
  •   ठंडा पसीना सिर्फ़ डर का ही नहीं, बल्कि शारीरिक सदमे ,ब्लड शुगर में गिरावट , या कुछ हृदय संबंधी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। अगर आपको बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार ठंडा पसीना आता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

भावनात्मक पसीना बनाम शारीरिक पसीने में अंतर

भावनात्मक पसीना और शारीरिक पसीना दोनों ही शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रियाएँ हैं, लेकिन इनके कारण और उद्देश्य अलग-अलग होते हैं। भावनात्मक पसीना तनाव, डर, चिंता, उत्साह या घबराहट जैसी भावनाओं के कारण निकलता है। यह मुख्य रूप से हथेलियों, तलवों और बगल में स्थित एक्राइन तथा एपोक्राइन ग्रंथियों से निकलता है। इसके विपरीत, शारीरिक पसीना शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए गर्म मौसम, व्यायाम या शारीरिक परिश्रम के दौरान पूरे शरीर में निकलता है। इसका मुख्य उद्देश्य त्वचा से पानी के वाष्पीकरण द्वारा शरीर को ठंडा रखना होता है। भावनात्मक पसीना अक्सर अचानक शुरू हो जाता है, जबकि शारीरिक पसीना धीरे-धीरे बढ़ता है और गतिविधि समाप्त होने पर कम हो जाता है। इस प्रकार, दोनों प्रकार के पसीने शरीर की अलग-अलग जैविक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

भावनात्मक पसीना यानी डर और तनाव का पसीना शारीरिक पसीने से बिल्कुल अलग होता है। यह अत्यधिक हो सकता है और अक्सर इसकी गंध भी अलग होती है। शोध बताते हैं कि डर के पसीने की गंध दूसरों में सहानुभूति और सतर्कता पैदा कर सकती है।

डर चिंता और पसीना कब सामान्य और कब अत्यधिक होता है?

डर चिंता या तनाव के समय पसीना आना शरीर की एक सामान्य जैविक प्रतिक्रिया है। जब हम किसी चुनौतीपूर्ण स्थिति, परीक्षा, इंटरव्यू, सार्वजनिक भाषण या अचानक खतरे का सामना करते हैं, तो शरीर में एड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन बढ़ जाते हैं। इससे हथेलियों, तलवों और बगल में पसीना आना स्वाभाविक है। लेकिन यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार अत्यधिक पसीना आए, सामान्य तापमान में भी कपड़े भीग जाएँ, या यह समस्या रोजमर्रा के काम, आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो इसे सामान्य नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति हाइपरहाइड्रोसिस, चिंता विकार, थायरॉयड की समस्या, मधुमेह या कुछ दवाओं के प्रभाव से भी जुड़ी हो सकती है। यदि अत्यधिक पसीना लंबे समय तक बना रहे या उसके साथ वजन कम होना, तेज धड़कन, बुखार या अन्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। सही कारण की पहचान और समय पर उपचार से इस समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

हल्का पसीना ,डर या चिंता के दौरान पूरी तरह से सामान्य है। यह हमारे शरीर की एक स्वस्थ प्रतिक्रिया है। लेकिन कुछ लोगों को अत्यधिक पसीना आता है, जिसे हाइपरहाइड्रोसिस कहा जाता है।

कब चिंता करें?

  •         अगर बिना किसी कारण के बहुत अधिक पसीना आ रहा हो।
  •         अगर पसीने के साथ तेज़ दिल की धड़कन, सीने में दर्द, साँस लेने में तकलीफ हो।
  •         अगर ठंडा पसीना बार-बार आ रहा हो और इसका कोई स्पष्ट भावनात्मक कारण न हो।
  •         अगर पसीना आपकी दैनिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा हो।
  •         अगर पसीने के साथ वजन कम होना, लगातार थकान, चक्कर आना जैसे लक्षण हों।
हाइपरहाइड्रोसिस के कई कारण हो सकते हैं हार्मोनल बदलाव, थायरॉइड समस्याएँ, संक्रमण (जैसे तपेदिक), या कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव। सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर और पैनिक डिसऑर्डर वाले लोगों में भी अत्यधिक पसीना आना एक आम लक्षण है।

अगर आपको लगता है कि आपका पसीना सामान्य से अधिक है, तो ईएनटी विशेषज्ञत्वचा रोग विशेषज्ञ या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी और दवाइयाँ चिंता और अत्यधिक पसीने में सहायक हो सकती हैं।

डर के दौरान पसीना कम करने के टिप्स

अगर आपको किसी परीक्षा, प्रस्तुति  या डरावनी स्थिति के दौरान अत्यधिक पसीना आता है, तो ये टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं-

  •       गहरी साँस लें- धीरे-धीरे और गहरी साँस लेने से सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की सक्रियता कम  होती है और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम (आराम देने वाला तंत्र) सक्रिय होता है।
  •         पानी पिएँ- ठंडा पानी पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और पसीना कम आता है।
  •      मन को शांत करें- अपना ध्यान वर्तमान में रखें और सोचें कि खतरा वास्तविक नहीं है (जैसे डरावनी फिल्म देखते समय)
  •         एंटी-पर्सपिरेंट का उपयोग- हथेलियों और बगलों के लिए विशेष एंटी-पर्सपिरेंट उपलब्ध हैं।
  •       आरामदायक कपड़े पहनें- सूती और ढीले-ढाले कपड़े पसीने को सोखते हैं और त्वचा को साँस लेने देते हैं।
  •      नियमित व्यायाम- नियमित व्यायाम से शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  •   पेशेवर मदद लें- अगर चिंता या पसीना आपके जीवन को प्रभावित कर रहा है, तो मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से सलाह लें।

निष्कर्ष

इंसान डरते समय पसीना क्यों बहाता है  इस सवाल का जवाब हमें हमारे शरीर की सबसे प्राचीन और बुद्धिमान सुरक्षा प्रणाली फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स में मिलता है। यह कोई यादृच्छिक या बेकार प्रतिक्रिया नहीं है यह लाखों सालों के विकास का परिणाम है, जो हमें खतरे से लड़ने या भागने के लिए तैयार करता है।

डर के दौरान पसीना-

  •         शरीर को ठंडा रखता है ताकि मांसपेशियाँ अच्छे से काम कर सकें।
  •         एड्रेनालाईन और सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की सक्रियता का परिणाम है।
  •         अन्य लोगों को खतरे के प्रति सचेत करने का एक विकासवादी संकेत हो सकता है।
हालाँकि, अत्यधिक पसीना हाइपरहाइड्रोसिस या चिंता विकार का संकेत हो सकता है। अगर पसीना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है, तो बेझिझक डॉक्टर से सलाह लें।
अगली बार जब आप किसी डरावनी फिल्म के दौरान अपनी गीली हथेलियों को महसूस करें, तो याद रखें यह आपके शरीर का आपकी सुरक्षा के लिए किया गया एक अद्भुत प्रयास है। यह आपको बताता है कि आपका शरीर खतरे को पहचानना और उसका सामना करने के लिए तैयार होना जानता है। अपने शरीर की इस अद्भुत क्षमता की सराहना करें  क्योंकि यही वह चीज़ है जिसने हमारे पूर्वजों को जीवित रखा और हमें आज तक पहुँचाया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1- इंसान डरता है तो पसीना क्यों बहाता है?


जब हम डरते हैं, तो हमारा सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है और एड्रेनालाईन हार्मोन रिलीज़ होता है। यह पसीने की ग्रंथियों को उत्तेजित करता है, जिससे पसीना आता है। इसका उद्देश्य शरीर को लड़ने या भागने के लिए तैयार करना और मांसपेशियों को ठंडा रखना है।

 

प्रश्न 2- ठंडा पसीना क्यों आता है?


ठंडा पसीना तब आता है जब फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स के दौरान रक्त वाहिकाएँ त्वचा के पास सिकुड़ जाती हैं, जिससे त्वचा ठंडी हो जाती है, लेकिन साथ ही पसीने की ग्रंथियाँ सक्रिय होकर पसीना निकालती हैं। यह अत्यधिक डर, घबराहट या चिंता में होता है।

 

प्रश्न 3- क्या डर का पसीना और गर्मी का पसीना अलग होता है?


हाँ। गर्मी का पसीना शरीर को ठंडा करने के लिए होता है और पूरे शरीर पर आता है। डर का पसीना (भावनात्मक पसीना) हथेलियों, तलवों, चेहरे और बगलों पर अधिक आता है-, अचानक शुरू होता है, और इसकी गंध भी अलग होती है।

 

प्रश्न 4- डर के दौरान पसीने की गंध क्यों अलग होती है?


डर के पसीने में कुछ विशेष रासायनिक संकेत होते हैं। शोध बताते हैं कि इस पसीने की गंध दूसरों के मस्तिष्क में सतर्कता और सहानुभूति पैदा कर सकती है। यह एक विकासवादी संकेत हो सकता है समूह को खतरे से सचेत करने के लिए।

 

प्रश्न 5- क्या बहुत अधिक पसीना आना किसी बीमारी का संकेत है?


हाँअत्यधिक पसीना किसी अंतर्निहित समस्या का संकेत हो सकता है  जैसे थायरॉइड विकारहार्मोनल बदलावसंक्रमण (जैसे TB), या चिंता विकार । अगर पसीना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

 

प्रश्न 6- क्या फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स सिर्फ़ इंसानों में होता है?


नहीं। फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स सभी स्तनधारियों और कई अन्य जानवरों में होता है। यह एक बुनियादी विकासवादी अनुकूलन है जो जानवरों को खतरे से बचाता है। वॉल्टर कैनन ने पहली बार 1914 में जानवरों पर किए गए अध्ययनों के आधार पर इसका वर्णन किया था।

 

प्रश्न 7- क्या हम डर के दौरान पसीने को नियंत्रित कर सकते हैं?


हाँ, कुछ हद तक। गहरी साँस लेनाध्यान , और मन को शांत करने की तकनीकें सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की सक्रियता को कम कर सकती हैं। नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी तनाव प्रतिक्रिया को बेहतर नियंत्रित करने में मदद करते हैं। गंभीर मामलों में कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) या दवाइयाँ सहायक हो सकती हैं।

प्रश्न 8- डर के अलावा और किन भावनाओं में पसीना आता है?
चिंता तनाव ,घबराहट ,गुस्सा , और उत्तेजना जैसी तीव्र भावनाओं के दौरान भी पसीना आ सकता है। ये सभी सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती हैं।

 


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