कान के पास की हड्डी शरीर की सबसे कठोर क्यों होती है?
परिचय
हम सभी ने सुना है कि शरीर
की सबसे मजबूत हड्डी जांघ की हड्डी (फीमर) होती है। या फिर किसी ने कहा कि दांतों
का इनेमल तो हीरे के बाद सबसे कठोर पदार्थ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर
में एक ऐसी हड्डी भी है, जो न
सिर्फ बेहद सख्त होती है, बल्कि
अपनी कठोरता में हर दूसरी हड्डी को मात देती है? वह है कान के पास स्थित पेट्रस हड्डी (Petrous part of
temporal bone)।
मुझे याद है, जब
मैंने पहली बार मेडिकल की पढ़ाई में यह तथ्य पढ़ा, तो मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने
सोचा, “इतनी
छोटी सी जगह में दुनिया की सबसे कठोर हड्डी? फीमर से भी ज्यादा सख्त?” लेकिन जैसे-जैसे मैंने इसकी
गहराई में जाना, पता
चला कि प्रकृति ने वाकई हमारे कान को बहुत खास बनाया है। आज इस ब्लॉग में हम इसी
अद्भुत हड्डी के बारे में विस्तार से जानेंगे यह कहाँ है, कैसे
दिखती है, इतनी
कठोर क्यों है, और
क्या यह सचमुच सबसे सख्त है? साथ ही, कुछ
मजेदार तुलनाएँ भी करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं।
असली
“हीरो” हड्डी कौन सी है?
शरीर रचना विज्ञान
(एनाटॉमी) में, हमारी
खोपड़ी की अस्थायी हड्डी (टेम्पोरल बोन) दो भागों में बंटी होती है। इसी अस्थायी
हड्डी का एक भाग है जिसे पेट्रस
भाग (Pars Petrosa) कहते
हैं। लैटिन भाषा में “पेट्रोसस” का अर्थ होता है “पत्थर जैसा” या “चट्टान जैसा”। यह नाम ही इस हड्डी की
कठोरता को बयान करता है। यह हड्डी हमारे कान के ठीक पीछे और अंदर की तरफ स्थित
होती है जहाँ हम कान के पीछे की
गांठ (मास्टॉयड प्रोसेस) को छू सकते हैं, उसके ठीक अंदर। यह हड्डी
बहुत घनी, डेंस
और भारी होती है। इसकी बनावट किसी चट्टान की तरह सघन होती है, जबकि दूसरी ओर, बांह या टांगों की लंबी
हड्डियाँ अंदर से खोखली (मज्जा युक्त) होती हैं। पेट्रस हड्डी के अंदर हमारे भीतरी
कान के अत्यंत नाजुक अंग होते हैं श्रवण कर्णावर्त (कोक्लिया) और संतुलन प्रणाली (वेस्टिबुलर उपकरण) जो सुनने और शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं। इन मुलायम, अमूल्य संरचनाओं की रक्षा
करना इस हड्डी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। और इसी सुरक्षा के लिए प्रकृति ने इसे
इतना कठोर और अटूट बनाया है।
पेट्रस भाग की कठोरता
का राज
अब आप सोच रहे होंगे किसी हड्डी की कठोरता (hardness) कैसे मापी जाती है? दरअसल, मेडिकल साइंस में हड्डियों
के घनत्व को मापने के लिए वे विशेष पैमाने का उपयोग नहीं करते, बल्कि देखते हैं कि हड्डी
में कॉम्पैक्ट
बोन (कॉर्टिकल बोन) का
अनुपात कितना है। पेट्रस हड्डी में लगभग 95% से अधिक कॉम्पैक्ट हड्डी
होती है, जबकि
सामान्य लंबी हड्डियों में यह अनुपात 50-70% होता है। इसका मतलब है कि
यह हड्डी खनिजों
(कैल्शियम और फॉस्फेट) से
इतनी भरी हुई है कि इसकी सतह पर ड्रिल करना भी मुश्किल हो जाता है। एनाटॉमी की
किताबों में एक प्रसिद्ध पंक्ति है: "पेट्रस हड्डी इतनी सख्त
होती है कि इसे काटने पर हीरे की डिस्क तक घिस जाती है।" मैंने खुद एक बार
प्रयोगशाला में पुरानी ड्राई स्कल को देखा था, जब हमने अन्य हड्डियों पर
आरी चलाई, तो
वे जल्दी कट गईं। लेकिन पेट्रस हिस्से पर आरी फिसलने लगी। यह हमारे शरीर का “प्राकृतिक बंकर” है। इसके अलावा, यह हड्डी अस्थि-मज्जा से
लगभग रहित होती है, जो
इसे और भी घनी और भारी बनाती है। एक रोचक तथ्य यह है कि मानव शरीर में शरीर के वजन के हिसाब से
सबसे भारी हड्डी (घनत्व
की दृष्टि से) यही पेट्रस हड्डी है।
जांघ
की हड्डी और कान की हड्डी की तुलना
इस स्थान पर अक्सर लोग
भ्रमित हो जाते हैं। मैं स्पष्ट कर दूं शरीर की सबसे लंबी और सबसे
मजबूत (strength-wise) हड्डी फीमर (जांघ की हड्डी) होती है। फीमर एक व्यक्ति का पूरा वजन झेल सकती
है और टूटने के लिए बहुत ताकत चाहिए। लेकिन कठोरता (hardness) एक अलग गुण है। कठोरता का
अर्थ है खरोंच, घिसाव, दबाव और टूट-फोड़ के प्रति
प्रतिरोध। जैसे हीरा तो सबसे कठोर होता है, पर वह एक हथौड़े से टूट
सकता है (भंगुरता)। पेट्रस हड्डी की कठोरता का उद्देश्य भीतरी कान की नाजुक
झिल्लियों और तरल पदार्थों को
बाहरी झटकों से बचाना है। कल्पना कीजिए आपकी सुनने की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि भीतरी कान के अंदर के
बाल कोशिकाएँ (हायर सेल्स) कितनी सुरक्षित हैं। ये कोशिकाएं एक बार नष्ट हो जाएं, तो वापस नहीं आतीं। इसलिए
प्रकृति ने उनके चारों ओर पत्थर जैसी हड्डी का किला बना दिया। तो चाहे आप सिर के
बल गिरें, या
कोई चोट लगे, अक्सर
कान का अंदरूनी हिस्सा सुरक्षित रहता है। दूसरी ओर, फीमर को हल्का और मजबूत (bending strength) बनाया गया है, ताकि दौड़ने-कूदने में मदद
मिले। दोनों का डिजाइन अलग है।
मध्य
कान की छोटी हड्डियाँ
मैं यहाँ एक और भ्रांति दूर
करना चाहूंगा। बहुत से लोग कहते हैं कि “कान की सबसे छोटी हड्डी स्टेपीज (रकाब) ही
सबसे कठोर होती है।” जबकि
यह पूरी तरह सही नहीं है। हमारे मध्य कान में तीन सबसे छोटी हड्डियाँ होती हैं मैलियस (हथौड़ा), इन्कस
(निहाई) और स्टेपीज (रकाब)। ये सभी बहुत छोटी हैं, और स्टेपीज तो शरीर की सबसे छोटी हड्डी है (लंबाई मात्र 2.5-3 मिमी)। लेकिन ये हड्डियाँ
कठोरता में पेट्रस हड्डी के आसपास नहीं टिकतीं। इनका काम ध्वनि तरंगों को संचारित
करना है, इसलिए
इन्हें हल्का और लचीला होना पड़ता है। पेट्रस हड्डी इन तीनों हड्डियों को सुरक्षित
बक्से की तरह अपने अंदर रखती है (जिसे कर्ण गुहा या टाइम्पेनिक कैविटी कहते हैं)।
इस प्रकार, “कान
के पास की हड्डी” वाक्य
में “पास
की” शब्द
महत्वपूर्ण है संकेत
स्वयं पेट्रस हड्डी की ओर है, न कि मध्य कान की हड्डियों की ओर।
विकास
का चमत्कार
जब मैं विकासवादी जीव
विज्ञान पढ़ रहा था, तो
मुझे पता चला कि इतनी कठोर हड्डी केवल मनुष्यों में ही नहीं, बल्कि सभी स्तनधारियों
(जानवरों) में पाई जाती है। खासकर समुद्री स्तनधारियों जैसे व्हेल और डॉल्फिन में तो यह और भी अधिक सख्त होती है। क्योंकि पानी में ध्वनि (सोनार) और
दबाव के खिलाफ उनके कानों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। मनुष्यों में, इस हड्डी की कठोरता इतनी
अधिक होती है कि फोरेंसिक साइंस (अपराध विज्ञान) में अक्सर जली हुई लाशों की पहचान
करने के लिए पेट्रस
हड्डी को
बचाकर रखा जाता है क्योंकि यह आग में भी नहीं जलती और डीएनए का नमूना दे सकती है।
पुरातत्व में हज़ारों साल पुराने कंकालों में अक्सर यह हड्डी सबसे अंत में नष्ट
होती है। यही कारण है कि इसे “शरीर का सबसे लंबे समय तक टिकने वाला अंग” भी कहा जाता है। सोचिए आपका शरीर सड़ जाएगा, मिट्टी में बदल जाएगा, लेकिन आपके कान का यह हिस्सा हजारों साल तक अपनी हैरतअंगेज सख्ती बनाए
रखेगा। यही असली ताकत है।
पेट्रस हड्डी लचीली नहीं
होती
लेकिन इतनी कठोरता का एक
नुकसान भी है भंगुरता
(brittleness)। यह हड्डी लचीली नहीं होती, बल्कि कांच या पत्थर की तरह
व्यवहार करती है। बहुत तेज सिर की चोट, विशेष रूप से सिर के
पिछले-बगल वाले हिस्से में (टेम्पोरल एरिया), इस हड्डी में फ्रैक्चर का
कारण बन सकती है। इसे पेट्रस
टेम्पोरल बोन फ्रैक्चर कहते
हैं। यह एक खतरनाक चोट है, क्योंकि
इसके अंदर चेहरे की तंत्रिका (फेशियल नर्व) और भीतरी कान की नलिकाएँ होती हैं। ऐसे
फ्रैक्चर में व्यक्ति सुनने की शक्ति खो सकता है, चेहरे का एक हिस्सा
लकवाग्रस्त हो सकता है (बेल्स पाल्सी), या फिर मस्तिष्क द्रव (CSF) कान से रिसने लगता है।
हालाँकि, ऐसा
फ्रैक्चर होना बेहद मुश्किल है इतनी ताकत चाहिए जितनी कार दुर्घटना या ऊंचाई से गिरने में लगती है। साधारण
चोट से यह नहीं टूटती। इस तरह, “सबसे कठोर” होना
वरदान और चुनौती दोनों है।
दाँत
को छोड़ कर क्या कोई हड्डी और भी कठोर होती है?
एक छोटा सा अपवाद है हमारे दाँतों
का इनेमल।
दाँत (जो तकनीकी रूप से हड्डी नहीं, बल्कि एक अलग कठोर ऊतक है)
का इनेमल हीरे के बाद प्राकृतिक रूप से सबसे कठोर पदार्थ माना जाता है। लेकिन वह “हड्डी” की श्रेणी में नहीं आता।
बात हड्डियों की करें तो पेट्रस हड्डी निर्विवाद रूप से सबसे घनी और कठोर स्थायी
अस्थि है। कुछ नेत्रगोलक के चारों ओर की छोटी हड्डियों (स्फेनोइड के छोटे हिस्से)
को भी बताते हैं, लेकिन
उनकी कठोरता का मापन पेट्रस से कम ही निकला है। इसलिए एनाटोमिस्ट एक स्वर में कहते
हैं कान के पास पेट्रस हड्डी ही सबसे कठोर है।
सुरक्षा
और संतुलन
मैंने अब तक तथ्यों की लंबी
सूची दे दी है। लेकिन इस जानकारी का भावनात्मक पहलू भी है। हम सोचते हैं कि सबसे
बड़ी या लंबी हड्डी सबसे महत्वपूर्ण होती है। लेकिन कभी-कभी, सबसे छोटी जगह पर छिपी सबसे
कठोर चीज हमारी पूरी दुनिया (सुनने की क्षमता) को बचाए रखती है। हमारा कान जिसकी हम अनदेखी कर देते
हैं, ऊंची
आवाज़ में गाना सुनते हैं, बिना
हेलमेट के चलते हैं वहीं पर नाजुक संतुलन और
अद्भुत कठोरता छिपी है। एक बात मैंने अपनी जिंदगी से सीखी है जैसे प्रकृति ने इस हड्डी
को बाहरी झटकों से हमारी इंद्रियों की रक्षा के लिए बनाया है, वैसे ही हमें अपने सुनने की
शक्ति की रक्षा करनी चाहिए। तेज आवाज, ईयरफोन पर लगातार तेज
म्यूजिक, और
सिर पर चोट इनसे
बचिए। आपके भीतरी कान की “बंकर” हड्डी चाहे कितनी भी कठोर
क्यों न हो, उसके
अंदर के कोमल ऊतक एक बार नष्ट हुए तो लौटकर नहीं आते।
पेट्रस
हड्डी के रोचक तथ्य
1- पेट्रस हड्डी का घनत्व लगभग
2.0-2.5 ग्राम/सेमी³ होता है, जबकि सामान्य हड्डियों का
घनत्व 1.2-1.5 ग्राम/सेमी³ के आसपास होता है।
2- अगर आप पुराने मेडिकल कॉलेज
के शवगृह (मॉर्चुरी) में किसी कंकाल का पेट्रस भाग निकालकर हथौड़े से मारें, तो वह बिना टूटे काफी देर
तक सहेगा। (न करें प्रयास!)
3- इसी हड्डी के भीतर कोक्लिया (घोंघा के आकार का
कर्णावर्त) स्थित होता है। यदि पेट्रस हड्डी थोड़ी भी नर्म होती, तो हर छींक पर आप अस्थायी
तौर पर बहरे हो सकते थे।
4- सर्जनों के लिए पेट्रस
हड्डी पर सर्जरी (जैसे कोक्लियर इम्प्लांट) करना बेहद कठिन होता है क्योंकि इसे
ड्रिल करने में विशेष हीरे के बर्र (diamond burr) का उपयोग होता है। इसे “दुनिया की सबसे कठिन सर्जरी” वाली जगहों में गिना जाता
है।
निष्कर्ष
तो अब आप जान गए होंगे कि “कान के पास की हड्डी” जिसे एनाटोमी में पेट्रस
पार्स ऑफ टेम्पोरल बोन कहा
जाता है, वाकई हमारे शरीर की सबसे कठोर हड्डी है। यह एक चट्टान की तरह है, जो हमारी सुनने और संतुलन
की शक्ति की रक्षा करती है। यह न तो सबसे लंबी है, न ही सबसे मशहूर, लेकिन अपनी जगह पर अद्वितीय
है। जब आप कभी अपने कान के पीछे हाथ लगाएं, तो थोड़ा रुककर सोचें, वहां एक ऐसी हड्डी छिपी है जो हजारों सालों तक टिक जाएगी, आपके शरीर के मिट जाने के
बाद भी। यह सोचकर एक अजीब सी शांति मिलती है, है न? अगली बार जब कोई आपसे पूछे
कि शरीर की सबसे कठोर हड्डी कौन सी है, तो आप गर्व से बताइएगा, वह हड्डी जो मेरे कान के
पास है, मेरे
सुनने की रक्षक है।
अक्सर
पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1- क्या सच में कान के पास की
हड्डी, जांघ
की हड्डी से अधिक कठोर होती है?
उत्तर-
जी हाँ कठोरता
(hardness) के
पैमाने पर पेट्रस हड्डी फीमर से अधिक सख्त होती है। फीमर अधिक लचीली और मजबूत (strength) होती है, लेकिन पेट्रस हड्डी का
घनत्व और खनिजकरण सबसे अधिक होता है।
प्रश्न 2- क्या रकाब (स्टेपीज) की
हड्डी सबसे कठोर होती है?
उत्तर-
नहीं, रकाब
(स्टेपीज) शरीर की सबसे छोटी हड्डी है, कठोरता में नहीं। सबसे कठोर
पेट्रस हड्डी है, जबकि
स्टेपीज मध्य कान की ध्वनि संचारक हड्डी है।
प्रश्न 3- क्या यह हड्डी व्हेल या
डॉल्फिन में भी पाई जाती है?
उत्तर:
हाँ, सभी
स्तनधारियों में यह पाई जाती है। जलीय स्तनधारियों में तो यह और भी घनी होती है
ताकि पानी के दबाव को सहन कर सके।
प्रश्न4- पेट्रस हड्डी का फ्रैक्चर
खतरनाक क्यों होता है?
उत्तर:
क्योंकि इसके भीतर चेहरे की तंत्रिका (7वीं कपाल तंत्रिका) और
आंतरिक कान की बाल कोशिकाएँ होती हैं। फ्रैक्चर होने पर चेहरा लकवाग्रस्त, सुनने की क्षमता नष्ट या
मस्तिष्क द्रव लीक हो सकता है।
प्रश्न 5- क्या दांतों का इनेमल
पेट्रस हड्डी से अधिक कठोर होता है?
उत्तर-
हाँ, दाँतों
का इनेमल हड्डी से भी अधिक कठोर होता है यह लगभग 5 (मोहस स्केल पर) होता है, जबकि पेट्रस हड्डी ~4-4.5 के आसपास। लेकिन इनेमल एक
ऊतक है, हड्डी
नहीं। हड्डियों में पेट्रस ही सबसे कठोर है।
प्रश्न 6- क्या यह हड्डी कभी पिघलती
या कमजोर होती है (बीमारियों से)?
उत्तर-
हाँ पेजेट रोग या
ओटोस्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों में यह हड्डी असामान्य रूप से नर्म या रिसोर्ब हो
सकती है, लेकिन
ये अत्यंत दुर्लभ हैं।