7156863209947891,DIRECT,fec0942fa0 पेट में गुड़गुड़ाहट होने का क्या कारण है ?

पेट में गुड़गुड़ाहट होने का क्या कारण है ?

 


पेट में गुड़गुड़ाहट होने का क्या कारण है?


पेट-में- गुड़गुड़ाहट -होने -का- क्या -कारण -है ?



पेट में गुड़गुड़ाहट होना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, जिसे अक्सर हम भूख, पाचन या गैस से जोड़कर देखते हैं। जब पेट और आंतों के अंदर भोजन, तरल पदार्थ और गैस आगे बढ़ते हैं, तो उनकी हलचल से आवाज़ उत्पन्न होती है, जिसे गुड़गुड़ाहट कहा जाता है। यह आवाज़ आमतौर पर तब ज्यादा सुनाई देती है जब पेट खाली होता है, क्योंकि उस समय आंतों की गति तेज हो जाती है और गैस के बुलबुले अधिक स्पष्ट रूप से हिलते हैं। इसके अलावा जल्दी-जल्दी खाना, हवा निगलना, अधिक मसालेदार भोजन, अपच, तनाव या अनियमित भोजन समय भी इस स्थिति को बढ़ा सकते हैं। अधिकतर मामलों में पेट की गुड़गुड़ाहट सामान्य होती है और किसी गंभीर समस्या का संकेत नहीं देती। हालांकि, यदि यह लगातार दर्द, दस्त, सूजन या अन्य लक्षणों के साथ हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही खानपान, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

जब हम शांत कमरे में बैठे होते हैं और अचानक हमारे पेट से घर्र-घर्रया गुड़गुड़की आवाज आती है, तो अक्सर हम असहज हो जाते हैं। सामान्य धारणा है कि यह केवल भूख का संकेत है। लेकिन क्या यह पूरी सच्चाई है?

आज के इस ब्लॉग लेख में हम पाचन तंत्र, हार्मोन, तंत्रिका तंत्र और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर इस रहस्य को विस्तार से समझेंगे। कि भूख लगने पर पेट की आवाज क्यों आती है? क्या यह सिर्फ खाली पेट की प्रतिक्रिया है या इसके पीछे कोई गहरी जैविक प्रक्रिया काम करती है?


1. पेट गुड़गुड़ाहट की आवाज 


पेट -में -गुड़गुड़ाहट -होने -का -क्या -कारण- है ?


पेट की आवाज आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, जो पाचन तंत्र की गतिविधियों का संकेत देती है। जब भोजन पेट और आंतों में आगे बढ़ता है, तो मांसपेशियाँ सिकुड़ती और ढीली होती हैं। इस प्रक्रिया को Peristalsis कहा जाता है। इसी दौरान गैस और तरल पदार्थ के हिलने से गुड़गुड़ाहट जैसी आवाज सुनाई देती है। यह आवाज खाली पेट में अधिक स्पष्ट होती है, क्योंकि उस समय आंतों की गतिविधि तेज होती है। भूख लगने पर शरीर भोजन की तैयारी करता है, जिससे भी पेट की आवाज बढ़ सकती है। इसके अलावा जल्दी खाना, अधिक हवा निगलना, मसालेदार भोजन, गैस या अपच भी इस आवाज का कारण बन सकते हैं। सामान्यतः यह चिंता की बात नहीं होती, लेकिन यदि पेट दर्द, सूजन, दस्त या उल्टी के साथ लगातार आवाज आए, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है। संतुलित आहार और नियमित भोजन से इसे कम किया जा सकता है।



पेट -में -गुड़गुड़ाहट- होने -का -क्या -कारण- है ?

चिकित्सा विज्ञान में पेट से आने वाली आवाज को बॉर्बोरिग्मी (Borborygmi) कहा जाता है। यह शब्द ग्रीक भाषा से आया है, जिसका अर्थ है गड़गड़ाहट

यह आवाज मुख्यतः इन कारणों से उत्पन्न होती है-

·        आंतों में गैस और तरल पदार्थ की गति

·        पाचन तंत्र की मांसपेशियों का संकुचन

·        खाली पेट में तीव्र संकुचन

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह आवाज सिर्फ पेट से नहीं, बल्कि छोटी आंत से भी आती है।


2. पाचन तंत्र की मूल प्रक्रिया


पेट- में -गुड़गुड़ाहट -होने- का -क्या -कारण -है ?

पाचन तंत्र की मूल प्रक्रिया वह क्रम है जिसमें भोजन शरीर में प्रवेश करने के बाद छोटे-छोटे पोषक तत्वों में बदलकर ऊर्जा प्रदान करता है। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।

  1. भोजन का ग्रहण (Ingestion) सबसे पहले भोजन मुंह में जाता है, जहां दांत उसे चबाते हैं और लार उसे नरम बनाती है।
  2. यांत्रिक और रासायनिक पाचन लार में मौजूद एंजाइम भोजन को तोड़ना शुरू कर देते हैं। फिर भोजन अन्ननली से होकर पेट में पहुंचता है, जहां अम्ल और एंजाइम इसे और छोटे भागों में बदलते हैं।
  3. छोटी आंत में पाचन यहाँ पित्त और अग्न्याशय रस की मदद से भोजन पूरी तरह पचता है और पोषक तत्व अवशोषित होते हैं।
  4. अवशोषण (Absorption) छोटी आंत की दीवारें पोषक तत्वों को रक्त में भेजती हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।
  5. अपशिष्ट निष्कासन (Elimination)जो भोजन नहीं पचता, वह बड़ी आंत में जाकर मल के रूप में बाहर निकल जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया शरीर को स्वस्थ रखने और ऊर्जा देने के लिए बेहद जरूरी होती है।

भोजन करने के बाद हमारा पाचन तंत्र लगातार सक्रिय रहता है। इसकी प्रमुख प्रक्रिया है-


परिस्टालसिस (Peristalsis)

यह एक लहरदार गति है जिसमें आंतों की मांसपेशियाँ सिकुड़ती और ढीली होती हैं। इससे भोजन आगे बढ़ता है।

लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि-

यह प्रक्रिया केवल भोजन के समय ही नहीं, बल्कि खाली पेट में भी चलती रहती है।

जब पेट खाली होता है, तब यह गति अधिक स्पष्ट और तीव्र हो जाती है  और यही आवाज के रूप में सुनाई देती है।


3. माइग्रेटिंग मोटर कॉम्प्लेक्स

Migrating Motor Complex पाचन तंत्र की एक प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया है, जो आमतौर पर तब सक्रिय होती है जब पेट खाली होता है। यह प्रक्रिया पेट और छोटी आंत में लहरों जैसी मांसपेशीय गतिविधि पैदा करती है, जिससे बचे हुए भोजन के कण, बैक्टीरिया और गैस आगे की ओर धकेले जाते हैं।

MMC लगभग हर 90 से 120 मिनट में सक्रिय होता है और इसे शरीर का इंटरनल क्लीन-अप सिस्टमभी कहा जाता है। यही कारण है कि खाली पेट में अक्सर गुड़गुड़ाहट की आवाज सुनाई देती है। जब हम बार-बार कुछ खाते रहते हैं, तो यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है और पाचन धीमा पड़ सकता है।

स्वस्थ पाचन के लिए भोजन के बीच उचित अंतर रखना, पर्याप्त पानी पीना और अत्यधिक स्नैकिंग से बचना MMC को सही तरीके से काम करने में मदद करता है।



पेट -में -गुड़गुड़ाहट -होने- का -क्या- कारण- है ?


जब हम 2–3 घंटे तक कुछ नहीं खाते, तब शरीर एक विशेष प्रक्रिया शुरू करता है जिसे कहते हैं-

सरल शब्दों में माइग्रेटिंग मोटर कॉम्प्लेक्स (एमएमसी)  एक स्वचालित सफाई चक्रहै जो हर 90–120 मिनट में सक्रिय होता है।

इसका उद्देश्य है-

·        बचे हुए भोजन के कणों को साफ करना

·        बैक्टीरिया की अधिकता को रोकना

·        पाचन तंत्र को अगले भोजन के लिए तैयार करना

सफाई चक्र के दौरान आंतों की मांसपेशियाँ तीव्र गति से संकुचित होती हैं।
यही तीव्र संकुचन गैस और तरल को आगे धकेलते हैं  जिससे आवाज उत्पन्न होती है।


4. घ्रेलिन हार्मोन भूख का संकेतक 

घ्रेलिन Ghrelin एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो भूख को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। इसे अक्सर हंगर हार्मोनकहा जाता है, क्योंकि जब पेट खाली होता है तो इसका स्तर बढ़ जाता है और दिमाग को संकेत मिलता है कि अब भोजन की आवश्यकता है। यह हार्मोन मुख्य रूप से पेट से निकलता है और मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस को सक्रिय करता है, जिससे खाने की इच्छा बढ़ती है।

जब हम भोजन कर लेते हैं, तो घ्रेलिन का स्तर धीरे-धीरे कम हो जाता है और तृप्ति महसूस होती है। इसके विपरीत, Leptin हार्मोन पेट भरने का संकेत देता है। नींद की कमी, तनाव और अनियमित भोजन समय घ्रेलिन के स्तर को बढ़ा सकते हैं, जिससे बार-बार भूख लगती है।

संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या इस हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है।

 जब शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है, तब पेट से एक हार्मोन स्रावित होता है-

घ्रेलिन (Ghrelin)

इसे हंगर हार्मोनभी कहा जाता है।

घ्रेलिन-

·        मस्तिष्क को संकेत देता है कि भोजन की जरूरत है

·        पाचन तंत्र की गतिशीलता बढ़ाता है

·        स्वचालित सफाई चक्रको सक्रिय करता है

इस प्रकार भूख लगने पर पेट की आवाज सिर्फ खालीपन नहीं, बल्कि एक हार्मोनल संकेत प्रणाली का परिणाम है।


5. आवाज ज्यादा तेज क्यों सुनाई देती है?

पेट की आवाज कभी-कभी ज्यादा तेज इसलिए सुनाई देती है क्योंकि उस समय पेट और आंतों के अंदर की गतिविधि अधिक स्पष्ट हो जाती है। जब पेट खाली होता है, तो Migrating Motor Complex सक्रिय होकर बचा हुआ भोजन और गैस को आगे बढ़ाता है। खाली पेट में भोजन न होने के कारण आवाज को दबाने वाली कोई चीज नहीं होती, इसलिए गुड़गुड़ाहट तेज सुनाई देती है।

इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी आवाज को बढ़ा सकते हैं:

  • भूख लगने पर पेट की मांसपेशियों की गतिविधि तेज होना
  • ज्यादा गैस बनना या हवा निगलना
  • जल्दी-जल्दी खाना या अधिक मसालेदार भोजन
  • तनाव या चिंता की स्थिति
  • पाचन प्रक्रिया का सक्रिय होना

जब पेट भरा होता है, तो भोजन आवाज को सोख लेता है, जिससे ध्वनि कम सुनाई देती है। लेकिन खाली पेट में वही गतिविधि अधिक स्पष्ट हो जाती है। आमतौर पर यह सामान्य है, पर यदि तेज आवाज के साथ दर्द, दस्त या सूजन हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है।

संक्षेप में जब पेट में भोजन होता है, तो-

·        भोजन ध्वनि को अवशोषित कर लेता है

·        गैस की गति धीमी होती है

लेकिन खाली पेट में-

·        ध्वनि को रोकने वाला कुछ नहीं होता

·        गैस और तरल की गति तेज होती है

इसलिए आवाज अधिक स्पष्ट सुनाई देती है।


6. क्या यह हमेशा भूख का संकेत है?

नहीं, पेट की गुड़गुड़ाहट हमेशा भूख का संकेत नहीं होती।  यह कई सामान्य शारीरिक कारणों से भी हो सकती है। जब पेट खाली होता है, तो Ghrelin हार्मोन बढ़ता है और भूख का संकेत देता है, लेकिन आवाज केवल इसी कारण से नहीं आती।

कई बार Migrating Motor Complex सक्रिय होने पर भी पेट में आवाज आती है। यह प्रक्रिया पेट और आंतों की सफाई करती है, चाहे आपको भूख लगे या नहीं।

अन्य कारण भी हो सकते हैं-

  • पाचन के दौरान गैस बनना
  • भोजन का आंतों में आगे बढ़ना
  • ज्यादा पानी या तरल पीना
  • तनाव या चिंता
  • अपच या हल्की गैस

इसलिए, पेट की आवाज का मतलब हमेशा भूख नहीं होता। अगर आवाज के साथ दर्द, सूजन या दस्त हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सामान्य परिस्थितियों में यह शरीर की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

पेट की आवाज इन स्थितियों में भी आ सकती है-

·        भोजन के तुरंत बाद

·        गैस बनने पर

·        दस्त या संक्रमण में

·        इरिटेबल बाउल सिंड्रोम 

·        अत्यधिक तनाव में

यदि आवाज के साथ ये लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह आवश्यक है-

·        लगातार पेट दर्द

·        वजन कम होना

·        उल्टी या रक्तस्राव

·        गंभीर दस्त


7. तनाव और पेट की आवाज

तनाव का पेट की आवाज से गहरा संबंध होता है, क्योंकि दिमाग और पाचन तंत्र एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इसे Gut-Brain Axis कहा जाता है। जब आप तनाव में होते हैं, तो शरीर Cortisol जैसे हार्मोन रिलीज करता है, जो पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इससे आंतों की गति कभी तेज तो कभी धीमी हो जाती है, और गैस या तरल के हिलने से गुड़गुड़ाहट की आवाज सुनाई देती है।

तनाव के दौरान कुछ लोगों में पेट में ऐंठन, गैस, या बार-बार भूख जैसा महसूस होना भी आम है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तनाव पाचन तंत्र की मांसपेशियों को अधिक संवेदनशील बना देता है। नियमित व्यायाम, गहरी सांस, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार तनाव कम करके पेट की अनावश्यक आवाज को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।

हमारा पाचन तंत्र आंत्र तंत्रिका तंत्र द्वारा नियंत्रित होता है, जिसे दूसरा मस्तिष्ककहा जाता है। तनाव के दौरान-

·        एड्रेनालिन बढ़ता है

·        पाचन असंतुलित होता है

·        गैस बनती है

·        आंतों की गति बदलती है

इससे भी पेट की आवाज बढ़ सकती है।


8. क्या ज्यादा आवाज आना बीमारी है?

ज्यादातर मामलों में पेट से ज्यादा आवाज आना कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि यह पाचन तंत्र की सामान्य गतिविधि का हिस्सा है। जब भोजन, तरल और गैस आंतों में आगे बढ़ते हैं, तो आवाज उत्पन्न होती है। यह प्रक्रिया Peristalsis के कारण होती है, जो भोजन को आगे बढ़ाने का काम करती है।

हालांकि, कुछ स्थितियों में बहुत ज्यादा या लगातार आवाज किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है, जैसे:

  • बार-बार गैस बनना
  • अपच या एसिडिटी
  • पेट में सूजन या दर्द
  • दस्त या कब्ज
  • भोजन सहन न होना

अगर आवाज के साथ वजन कम होना, तेज दर्द, उल्टी या लगातार दस्त हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। लेकिन केवल आवाज आना, खासकर खाली पेट या भोजन के बाद, सामान्य माना जाता है। संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

 

9. क्या पेट की आवाज रोक सकते हैं?

हाँ, पेट की आवाज को काफी हद तक कम या नियंत्रित किया जा सकता है।  यह पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं होता, क्योंकि यह पाचन तंत्र की प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन कुछ आदतों से इसे कम किया जा सकता है।

पेट की आवाज कम करने के उपाय

  • समय पर भोजन करें- लंबे समय तक खाली पेट रहने से Migrating Motor Complex सक्रिय होता है और आवाज बढ़ती है।
  • धीरे-धीरे खाएं- जल्दी खाने से हवा निगलने की संभावना बढ़ती है, जिससे गुड़गुड़ाहट होती है।
  • छोटे-छोटे अंतराल में भोजन- बहुत ज्यादा भूख से पेट की गतिविधि तेज हो जाती है।
  • गैस बनाने वाले खाद्य कम करें- जैसे ज्यादा तला-भुना या अत्यधिक मसालेदार भोजन।
  • पर्याप्त पानी पिएं- पाचन बेहतर होता है और गैस कम बनती है।
  • तनाव कम करें­- तनाव पाचन को प्रभावित करता है और आवाज बढ़ा सकता है।

इन सरल आदतों को अपनाने से पेट की आवाज काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है और पाचन भी बेहतर रहता है।

 

10. रोचक तथ्य

·        गर्भ में पल रहे शिशु की आंतों में भी गतिशीलता होती है।

·        नींद के दौरान भी माइग्रेटिंग मोटर कॉम्प्लेक्स (MMC) चलता रहता है।

·        कभी-कभी पेट की आवाज 20 फीट दूर तक सुनी जा सकती है।

·        पुरुषों में घ्रेलिन स्तर सामान्यतः महिलाओं से थोड़ा अधिक होता है।


11. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार पेट में आवाज आना मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। जब वात बढ़ता है, तो शरीर में गैस, सूखापन और आंतों की अधिक गति होती है, जिससे गुड़गुड़ाहट की आवाज सुनाई देती है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति को अग्नि कहा जाता है। यदि अग्नि कमजोर हो जाए, तो भोजन ठीक से पच नहीं पाता और गैस बनती है, जिससे पेट की आवाज बढ़ जाती है।

आयुर्वेदिक सुझाव-

  • गुनगुना पानी पीना पाचन को संतुलित करता है
  • अदरक, जीरा और सौंफ का सेवन गैस कम करता है
  • समय पर भोजन करना वात संतुलन में मदद करता है
  • बहुत ठंडा, सूखा या बासी भोजन कम लेना चाहिए
  • भोजन के बाद हल्की सैर करना लाभकारी माना जाता है

आयुर्वेद संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और शांत मन को पाचन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

आयुर्वेद में इसे जठराग्निकी सक्रियता से जोड़ा गया है।

यदि अग्नि प्रबल है तो-

·        भूख स्पष्ट लगती है

·        पेट में हल्की ध्वनि हो सकती है

लेकिन यदि वात दोष बढ़े तो-

·        अत्यधिक गैस

·        गड़गड़ाहट

·        पेट दर्द


12. वैज्ञानिक निष्कर्ष

वैज्ञानिक दृष्टि से पेट की आवाज पाचन तंत्र की सामान्य शारीरिक गतिविधियों का परिणाम है। यह तब उत्पन्न होती है जब आंतों की मांसपेशियाँ भोजन, तरल और गैस को आगे बढ़ाती हैं, जिसे Peristalsis कहा जाता है। खाली पेट में यह गतिविधि अधिक स्पष्ट हो जाती है, क्योंकि भोजन ध्वनि को दबाने के लिए मौजूद नहीं होता। इसके अलावा, उपवास की स्थिति में Migrating Motor Complex सक्रिय होकर पाचन तंत्र की सफाई करता है, जिससे गुड़गुड़ाहट सुनाई देती है।

भूख के दौरान Ghrelin हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो पाचन गतिविधि को तेज कर सकता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया शरीर के स्वस्थ कार्य का संकेत है। हालांकि, यदि पेट की आवाज लगातार दर्द, दस्त या सूजन के साथ हो, तो यह किसी पाचन संबंधी समस्या का संकेत हो सकती है। संतुलित आहार और नियमित भोजन से इन आवाजों को नियंत्रित किया जा सकता है।

 

भूख लगने पर पेट की आवाज-

·        एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है

·        पाचन तंत्र की सफाई प्रणाली (MMC) का परिणाम है

·        घ्रेलिन हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती है

·        गैस और तरल की गति से उत्पन्न होती है

यह शरीर की भाषा है  जो संकेत देती है कि ऊर्जा की आवश्यकता है।


निष्कर्ष  

पेट की गुड़गुड़ाहट या आवाज आना सामान्यतः पाचन तंत्र की प्राकृतिक गतिविधि का संकेत है और अधिकतर मामलों में चिंता का कारण नहीं होता। यह आवाज भोजन के पाचन, गैस के बनने, आंतों की गति या खाली पेट में सक्रिय होने वाली प्रक्रियाओं के कारण सुनाई देती है। कभी-कभी यह भूख का संकेत भी हो सकती है, जिसमें Ghrelin की भूमिका होती है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। तनाव, अनियमित खानपान और जल्दी-जल्दी भोजन करना भी इसे बढ़ा सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार वात दोष का असंतुलन भी इसका एक कारण माना जाता है।

यदि आवाज के साथ दर्द, सूजन, दस्त या अन्य असामान्य लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। अन्यथा, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित दिनचर्या और तनाव नियंत्रण से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। सही जीवनशैली अपनाने से पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और अनावश्यक पेट की आवाज कम हो जाती है।

हमारा शरीर कभी भी अनावश्यक संकेत नहीं देता। पेट की आवाज शर्मिंदगी का कारण नहीं, बल्कि एक अद्भुत जैविक प्रणाली का प्रमाण है। अगली बार जब पेट से आवाज आए, तो मुस्कुराइए, क्योंकि आपका शरीर आपसे संवाद कर रहा है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1- क्या खाली पेट में ही आवाज आती है?
नहीं, भोजन के बाद भी आ सकती है।

प्रश्न 2- क्या यह गैस का संकेत है?
कभी-कभी, लेकिन हमेशा नहीं।

प्रश्न 3- क्या बार-बार आवाज आना गंभीर समस्या है?
यदि दर्द या अन्य लक्षण हों तो जांच कराएँ।


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