7156863209947891,DIRECT,fec0942fa0 माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का “पावरहाउस” नहीं, बल्कि एक प्राचीन बैक्टीरिया है!

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का “पावरहाउस” नहीं, बल्कि एक प्राचीन बैक्टीरिया है!

 


माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का पावरहाउस नहीं, बल्कि एक प्राचीन बैक्टीरिया है!


माइटोकॉन्ड्रिया -कोशिका- का- “पावरहाउस”- नहीं,- बल्कि- एक -प्राचीन -बैक्टीरिया- है!



हमने बचपन से पढ़ा है माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का पावरहाउस है। परंतु विज्ञान की गहराई में उतरें तो कहानी कहीं अधिक रोचक है। आज वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि माइटोकॉन्ड्रिया कभी स्वतंत्र रूप से जीने वाला एक प्राचीन बैक्टीरिया था, जिसने अरबों वर्ष पहले एक अन्य कोशिका के भीतर आश्रय लिया और वहीं स्थायी रूप से बस गया। यह केवल एक परिकल्पना नहीं, बल्कि डीएनए, संरचना और जैव-रासायनिक प्रमाणों से समर्थित वैज्ञानिक तथ्य है।

माइटोकॉन्ड्रिया क्या है?


माइटोकॉन्ड्रिया-कोशिका- का -“पावरहाउस” -नहीं,- बल्कि- एक -प्राचीन- बैक्टीरिया- है!


माइटोकॉन्ड्रिया यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक ऑर्गेनेल है, जो ऊर्जा उत्पादन (ATP निर्माण) का प्रमुख केंद्र है।

यह ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन की सहायता से एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट ATP (Adenosine Triphosphate) बनाता है, जो कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।

लेकिन प्रश्न यह है-
  • यदि यह केवल एक अंग है, तो इसमें अपना डीएनए क्यों है?
  • यह दोहरी झिल्ली वाला क्यों है?
  • और यह बैक्टीरिया की तरह विभाजित क्यों होता है?

इन प्रश्नों का उत्तर हमें एंडोसिम्बायोटिक थ्योरी में मिलता है।

एंडोसिम्बायोटिक थ्योरी (ऐतिहासिक वैज्ञानिक क्रांति)


माइटोकॉन्ड्रिया -कोशिका- का -“पावरहाउस”- नहीं, -बल्कि -एक -प्राचीन -बैक्टीरिया- है!


लिन मार्गुलिस ने 1960 के दशक में एक साहसिक विचार प्रस्तुत किया-

कि माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट कभी स्वतंत्र जीवाणु थे, जिन्हें एक आदिम यूकैरियोटिक कोशिका ने निगल लिया था, परंतु पचा नहीं पाई।

दोनों के बीच सहजीवी संबंध बना-

  • बैक्टीरिया ने ऊर्जा प्रदान की
  • मेजबान कोशिका ने सुरक्षा और पोषण दिया

समय के साथ यह संबंध स्थायी हो गया।

वैज्ञानिक प्रमाण जो इस सिद्धांत को सही साबित करते हैं

1. माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए

माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर अपना अलग डीएनए पाया जाता है।

यह डीएनए-

  • वृत्ताकार होता है
  • बैक्टीरिया के डीएनए जैसा होता है
  • मातृ पक्ष से विरासत में मिलता है

यह तथ्य दर्शाता है कि इसकी उत्पत्ति बैक्टीरिया से हुई है।

2. दोहरी झिल्ली

माइटोकॉन्ड्रिया में दो झिल्लियाँ होती हैं-

  • बाहरी झिल्ली
  • भीतरी झिल्ली

यह ठीक उसी तरह है जैसे एक कोशिका दूसरी कोशिका को निगल ले। बाहरी झिल्ली मेजबान कोशिका की, और भीतरी झिल्ली मूल बैक्टीरिया की मानी जाती है।

3. बैक्टीरिया जैसा विभाजन

माइटोकॉन्ड्रिया बाइनरी फिशन  द्वारा विभाजित होता है-
जो कि बैक्टीरिया की विशिष्ट प्रक्रिया है।

यह कोशिका विभाजन से अलग प्रक्रिया है।

4. राइबोसोम की समानता

माइटोकॉन्ड्रिया के राइबोसोम 70S प्रकार के होते हैं-
जो बैक्टीरिया में पाए जाते हैं,
जबकि यूकैरियोटिक कोशिकाओं में 80S राइबोसोम होते हैं।

यह घटना कब हुई?

वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना लगभग 1.5 से 2 अरब वर्ष पहले हुई थी।

उस समय पृथ्वी पर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ रहा था। ऑक्सीजन कई आदिम कोशिकाओं के लिए विषैली थी।

एक ऐसी कोशिका जिसने ऑक्सीजन को ऊर्जा उत्पादन में उपयोग करना सीखा, तथा वह जीवित रहने में सफल रही और वही आज का माइटोकॉन्ड्रिया बना।

माइटोकॉन्ड्रिया और मानव विकास

माइटोकॉन्ड्रिया -कोशिका -का- “पावरहाउस”- नहीं, -बल्कि -एक -प्राचीन -बैक्टीरिया -है!


यदि यह सहजीविता न होतीतो जटिल जीवन संभव नहीं होता।

माइटोकॉन्ड्रिया की बदौलत-

  • अधिक ऊर्जा उपलब्ध हुई
  • बड़ी कोशिकाएँ विकसित हुईं
  • बहुकोशिकीय जीव बने
  • अंततः मनुष्य का विकास हुआ

अर्थात, हमारे अस्तित्व में एक प्राचीन बैक्टीरिया की भूमिका है।

क्या माइटोकॉन्ड्रिया आज भी स्वतंत्र है?

पूरी तरह तो नहीं। परन्तु समय के साथ इसके कई जीन मेजबान कोशिका के नाभिक में स्थानांतरित हो गए।
अब यह अकेले जीवित नहीं रह सकता। यह एक आंशिक रूप से स्वतंत्रकोशिकांग है, जिसकी जड़ें स्वतंत्र जीवन में हैं।

माइटोकॉन्ड्रियल बीमारियाँ


माइटोकॉन्ड्रिया -कोशिका -का -“पावरहाउस” -नहीं, -बल्कि- एक -प्राचीन -बैक्टीरिया- है!


चूँकि माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा उत्पादन का केंद्र है, इसकी खराबी गंभीर रोगों का कारण बन सकती है-

  • माइटोकॉन्ड्रियल मायोपैथी
  • न्यूरोलॉजिकल विकार
  • मांसपेशियों की कमजोरी

इनमें से कई रोग माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए में उत्परिवर्तन के कारण होते हैं।

रोचक तथ्य

  • हमारे शरीर की हर कोशिका में सैकड़ों माइटोकॉन्ड्रिया हो सकते हैं।
  • हृदय कोशिकाओं में इनकी संख्या अधिक होती है क्योंकि उन्हें अधिक ऊर्जा चाहिए।
  • मानव माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए लगभग 16,569 बेस पेयर लंबा होता है।

क्या अन्य ऑर्गेनेल भी बैक्टीरिया से बने?

हाँ।,क्लोरोप्लास्ट (पौधों में पाया जाने वाला ऑर्गेनेल) भी संभवतः सायनोबैक्टीरिया से उत्पन्न हुआ।

यह भी एंडोसिम्बायोटिक सिद्धांत का हिस्सा है।

वैज्ञानिक महत्व

एंडोसिम्बायोटिक सिद्धांत ने विकासवाद की समझ को बदल दिया। इसने यह दिखाया कि विकास केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग भी है।

जीवन का विकास सबसे अच्छे का अस्तित्व (सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट) के साथ-साथ "सहकारी समिति का अस्तित्व (सर्वाइवल ऑफ द कोऑपरेटिव) भी है।

निष्कर्ष

माइटोकॉन्ड्रिया केवल कोशिका का पावरहाउस नहीं है। यह हमारे भीतर रहने वाला एक प्राचीन सहजीवी जीव है,जिसने अरबों वर्ष पहले सहयोग का मार्ग चुना। हमारी हर साँस, हर धड़कन, हर विचार, कहीं न कहीं उस प्राचीन बैक्टीरिया की देन है। इस प्रकार, जब हम कहते हैं किमाइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का पावरहाउस है तो हम केवल आधा सच बोलते हैं। पूरा सच तो यह है कि हम सब अपने भीतर एक प्राचीन बैक्टीरिया का इतिहास लिए हुए हैं।

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