क्या मानव शरीर भविष्य को महसूस कर सकता है?
मानव
शरीर केवल वर्तमान में जीने वाला तंत्र नहीं है, बल्कि यह कई बार भविष्य की संभावनाओं को
भी संकेतों के रूप में महसूस करता दिखाई देता है।
वैज्ञानिक
शोध बताते हैं कि हमारा मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र लगातार आसपास के वातावरण,
अनुभवों और स्मृतियों का विश्लेषण करता
रहता है, जिससे शरीर संभावित
परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार हो जाता है। उदाहरण के लिए, खतरे का आभास होने पर दिल की धड़कन तेज
हो जाती है, पसीना
आने लगता है और मांसपेशियाँ सतर्क हो जाती हैं यह सब भविष्य में होने वाली घटना की
तैयारी का हिस्सा है।
इसी तरह “गट फीलिंग” या आंतरिक अनुभूति भी कई बार हमें सही निर्णय लेने में मदद करती है। यह कोई जादुई शक्ति नहीं, बल्कि अनुभव, अवचेतन संकेतों और शरीर की सूक्ष्म प्रतिक्रियाओं का परिणाम होती है। इसलिए यह सवाल दिलचस्प बन जाता है कि क्या मानव शरीर वास्तव में भविष्य को महसूस कर सकता है, या यह केवल मस्तिष्क की उन्नत भविष्यवाणी क्षमता है।
क्या आपने कभी महसूस
किया है कि कुछ होने वाला है,
जैसे कोई घटना होने से पहले ही आपके
भीतर एक हल्का सा अंदरूनी संकेत जागता है? कोई डर, उत्साह,
सहज पूर्वज्ञान जो
घटित घटना से पहले महसूस हो जाता है?
ऐसे
अनुभव अक्सर अंतर्ज्ञान, आंतरिक अनुभूति, छठी इंद्रिय या
पूर्वाभास के नाम से जाने जाते हैं। लेकिन क्या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से
सच में मानव शरीर भविष्य को
महसूस कर सकता है? क्या
यह सिर्फ मनोवैज्ञानिक भ्रम या सच में कोई जैविक क्षमता है?
इस
ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे-
·
क्या
भविष्य का पूर्वाभास संभव है?
·
विज्ञान
इस पर क्या कहता है?
·
शरीर
में कौन-सी प्रणालियाँ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संकेत देती हैं?
· अंतर्ज्ञान और गट फीलिंग के पीछे क्या जैविक तंत्र काम करते हैं?
विषय सूची
1.
मानव
का पूर्वाभास बनाम अनुमान
2.
शरीर
का चेतन और अचेतन सिस्टम
3. आंत की भावना / अंतर्ज्ञान - वैज्ञानिक परिभाषा
4.
पूर्वाभास
के जैविक संकेत
5.
अद्वितीय
अनुभव - अध्ययन और शोध
6.
चेतना
और समय – क्या भविष्य का संकेत
संभव है?
7.
प्रीक्राइम
और पूर्वानुमान अनुभव के उदाहरण
8.
क्या
ईएमएफ या ऊर्जा परिवर्तन संकेत देता है?
9.
याद,
पूर्वाग्रह और मस्तिष्क की मशीनरी
10. निष्कर्ष
11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भविष्य का पूर्वाभास बनाम अनुमान
भविष्य का पूर्वाभास और अनुमान दोनों ही भविष्य से जुड़े विचार हैं, लेकिन इनके आधार अलग होते हैं। पूर्वाभास वह स्थिति है जब व्यक्ति बिना स्पष्ट तर्क के किसी घटना का आभास महसूस करता है। इसे अक्सर “गट फीलिंग” या आंतरिक संकेत कहा जाता है, जो अवचेतन मन, अनुभवों और शरीर की सूक्ष्म प्रतिक्रियाओं पर आधारित होता है। उदाहरण के लिए, अचानक किसी जगह जाने में असहज महसूस होना या किसी निर्णय के बारे में भीतर से चेतावनी मिलना।
वहीं अनुमान तार्किक सोच, विश्लेषण और उपलब्ध जानकारी पर आधारित
होता है। व्यक्ति पिछले अनुभव, आंकड़े और परिस्थितियों को देखकर
संभावित परिणाम का अंदाजा लगाता है। जैसे मौसम विभाग का पूर्वानुमान या परीक्षा की
तैयारी देखकर परिणाम का अनुमान लगाना।
इस प्रकार पूर्वाभास भावनात्मक और अवचेतन संकेतों से जुड़ा होता है, जबकि अनुमान वैज्ञानिक और तार्किक प्रक्रिया का परिणाम है। दोनों मिलकर मानव निर्णय क्षमता को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
कई
बार हम भावना और पूर्वाभास को एक ही समझ लेते
हैं। परन्तु वास्तविकता में-
अनुमान-
अनुभव/डेटा
पर आधारित सोच
उदाहरण-
मौसम बादल देख कर सोच लेना कि बारिश होगी
पूर्वाभास-
बिना स्पष्ट डेटा के महसूस होना
घटना
से पहले अचानक एक “भीतरू
सिग्नल” महसूस होना
वैज्ञानिक बिंदु से पूर्वाभास को अनुमान का ही परिशोधित रूप माना जाता है, पर यह मानव अनुभव की एक जटिल प्रक्रिया है।
2. चेतन
और अचेतन
चेतन
और अचेतन मन मानव मस्तिष्क के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं, जो हमारे विचारों और व्यवहार को अलग-अलग
तरीकों से प्रभावित करते हैं। चेतन मन वह हिस्सा है, जिससे हम वर्तमान में सोचते, समझते और निर्णय लेते हैं। जब हम पढ़ते
हैं, गणना करते हैं या
किसी समस्या पर विचार करते हैं, तब
चेतन मन सक्रिय होता है। यह तर्क, विश्लेषण
और जागरूकता से जुड़ा होता है।
इसके विपरीत, अचेतन मन हमारी स्मृतियों, आदतों, भावनाओं और अनुभवों का विशाल भंडार होता
है। यह बिना हमारी जागरूकता के लगातार काम
करता रहता है। जैसे अचानक किसी पुराने गीत से भावनाएँ जाग उठना या बिना सोचे गाड़ी
चलाना, ये
अचेतन मन के प्रभाव के उदाहरण हैं।
चेतन मन सीमित और धीमा होता है, जबकि अचेतन मन तेज और व्यापक होता है। दोनों मिलकर हमारे व्यवहार, निर्णय और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं, जिससे मानव सोच और भी जटिल तथा प्रभावी बनती है।
संक्षेप में समझें तो मानव
मस्तिष्क दो स्तरों में काम करता है-
1. चेतन स्तर → सक्रिय सोच, निर्णय, विश्लेषण
2. अचेतन स्तर → यादें, पैटर्न मान्यता, संकेत, संकेत-आधारित अनुमान
हमारी अंतर्ज्ञान अक्सर अचेतन मस्तिष्क की प्रक्रिया होती है,
जहाँ प्रत्यक्ष डेटा नहीं होता पर अनुभवों का अचेतन मूल्यांकन होता है
इसलिए कुछ स्थितियों में इंसान “पहले” ही महसूस कर लेता है।
3. आंत की भावना / अंतर्ज्ञान
आंत
की भावना या अंतर्ज्ञान (Gut Feeling) वह त्वरित अनुभूति है, जिसमें व्यक्ति बिना स्पष्ट तर्क के किसी निर्णय या स्थिति के
बारे में सही-गलत का अंदाज़ा लगा लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे मस्तिष्क और
पाचन तंत्र के बीच मौजूद जटिल संचार प्रणाली से जोड़ा जाता है, जिसे “गट-ब्रेन कनेक्शन” कहा जाता है। आंत में मौजूद तंत्रिका
कोशिकाओं का बड़ा नेटवर्क, जिसे
एंटरिक नर्वस सिस्टम भी कहा जाता है, मस्तिष्क को लगातार संकेत भेजता रहता है।
जब हम किसी परिस्थिति का सामना करते हैं, तो पिछले अनुभव, भावनाएँ और शरीर की सूक्ष्म प्रतिक्रियाएँ अवचेतन रूप से प्रोसेस होकर अचानक “अंतर्ज्ञान” के रूप में सामने आती हैं। यह कोई रहस्यमयी शक्ति नहीं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल संकेतों, हार्मोन और माइक्रोबायोम के संयुक्त प्रभाव का परिणाम होता है। इसलिए कई बार आंत की भावना हमें तेजी से निर्णय लेने में मदद करती है, खासकर तब जब समय कम हो।
सरल भाषा में आंत की भावना / अंतर्ज्ञान वह
अनुभूति है जो घटनाओं को अनुभव-आधारित डेटा के बिना संकेत देती है।
विज्ञान क्या कहता है?
शोध के अनुसार मस्तिष्क अपनी ग्रहणशील जानकारी का मूल्यांकन अचेतन स्तर पर करता है,शरीर संकेत दे सकता है जैसे-
·
दिल
की धड़कन तेज़ होना
·
हल्का
बेचैनी
·
शरीर
में अचानक सतर्कता
ये संकेत अंततः अनुभव-आधारित पैटर्न मान्यता हैं।
4. पूर्वाभास के जैविक संकेत
पूर्वाभास
के जैविक संकेत वे शारीरिक प्रतिक्रियाएँ हैं, जो किसी संभावित घटना से पहले शरीर में
स्वतः दिखाई देने लगती हैं। जब मस्तिष्क किसी परिस्थिति को जोखिमपूर्ण या
महत्वपूर्ण मानता है, तो
तंत्रिका तंत्र सक्रिय होकर शरीर को सतर्क कर देता है। इस दौरान दिल की धड़कन तेज
होना, हथेलियों में पसीना
आना, पेट में हलचल या “तितलियों जैसा” एहसास होना सामान्य संकेत हैं।
इसके साथ ही हार्मोनल बदलाव भी होते हैं,
जैसे एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल का स्राव
बढ़ना, जिससे शरीर तुरंत
प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हो जाता है। कई
बार त्वचा पर रोमांच , सांसों
का तेज होना और मांसपेशियों में हल्का तनाव भी महसूस होता है।
ये संकेत वास्तव में शरीर की चेतावनी प्रणाली का हिस्सा होते हैं, जो पिछले अनुभवों और अवचेतन विश्लेषण के आधार पर संभावित भविष्य के लिए हमें पहले से तैयार करने का काम करते हैं।
क्या
सच में शरीर भावनाओं के माध्यम से संकेत देता है?
- शरीर की फ़ाइट/फ़्लाइट प्रणाली
- हमें खतरे का संकेत देती है
- तनाव में हार्मोन निकलते हैं
जैसे-
·
एड्रेनालाईन
·
कोर्टिसोल
ये
संकेत भावनाओं को प्रभावित करते हैं और महसूस कराते हैं कि कुछ होने वाला है!
आँखें, कान, त्वचा, नाक ये सब संकेतों को पकड़ते हैं, अक्सर यह अचेतन तरीके से मस्तिष्क में कम्प्यूट होता है
5. शोध और अध्ययन क्या कहते हैं?
शोध
और अध्ययन बताते हैं कि मानव शरीर भविष्य को सीधे “देख” नहीं सकता, लेकिन यह संभावनाओं का अनुमान लगाने में
काफी सक्षम है। न्यूरोसाइंस के अनुसार मस्तिष्क लगातार पिछले अनुभवों, स्मृतियों और वर्तमान संकेतों का
विश्लेषण करता है और संभावित परिणामों की भविष्यवाणी करता है। इसे “प्रेडिक्टिव प्रोसेसिंग” कहा जाता है, जिसमें मस्तिष्क आने वाली परिस्थितियों
के लिए पहले से प्रतिक्रिया तैयार करता है।
कुछ मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया
है कि निर्णय लेने से पहले शरीर में सूक्ष्म बदलाव, जैसे त्वचा की विद्युत गतिविधि या दिल
की धड़कन में परिवर्तन—देखे
जा सकते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि ये
बदलाव वास्तविक भविष्य का पूर्वाभास नहीं, बल्कि अवचेतन जानकारी के तेज विश्लेषण का परिणाम होते हैं।
इस
प्रकार, शोध यह संकेत देते
हैं कि मानव शरीर भविष्य को महसूस नहीं करता, बल्कि अनुभव और जैविक संकेतों के आधार
पर संभावनाओं का अनुमान लगाता है।
अंतर्ज्ञान
अध्ययन
शोध में दिखाया गया
कि-
लोग कुछ स्थितियों को अपने गट फीलिंग पर ही निर्णय लेने
में सक्षम होते हैं, यह
अवचेतन पैटर्न पहचान होता है या-
न्यूरोसाइंस जोर्नल में
शोध
मस्तिष्क
का मस्तिष्काग्र की बाह्य परत यह तय करता है कि-
कौन-सी जानकारी संभालनी है
कौन-सी
अप्रासंगिक हैं
जो
अनुभवों के आधार पर पैटर्न का पता लगाता है।
इसका
मतलब यह नहीं कि शरीर “भविष्य”
को पढ़ता है, बल्कि यह कि मानव मस्तिष्क पैटर्न मान्यता के आधार पर संभावित नतीजा महसूस कर सकता है।
6. क्या भविष्य का संकेत संभव है? (चेतना और समय)
चेतना
और समय का संबंध लंबे समय से वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के लिए जिज्ञासा का विषय
रहा है। चेतना हमें वर्तमान क्षण का अनुभव कराती है, लेकिन मस्तिष्क अतीत की स्मृतियों और
वर्तमान संकेतों को जोड़कर भविष्य की संभावनाओं का अनुमान भी लगाता है। यही कारण
है कि कई बार हमें लगता है कि हमने आने वाली घटना का पहले ही आभास कर लिया था।
न्यूरोसाइंस के अनुसार मस्तिष्क “प्रेडिक्टिव” तरीके से काम करता है, यानी यह लगातार आगे होने वाली घटनाओं के
लिए मॉडल बनाता रहता है। उदाहरण
के लिए, किसी खतरे का अंदेशा
होने पर शरीर पहले से सतर्क हो जाता है। यह भविष्य देखने की क्षमता नहीं, बल्कि अनुभव आधारित तेज विश्लेषण है।
कुछ शोध यह भी संकेत देते हैं कि चेतना समय को रैखिक रूप में नहीं, बल्कि अनुभवों के आधार पर समझती है। इसलिए भविष्य का संकेत संभव लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह मस्तिष्क की उन्नत भविष्यवाणी क्षमता का परिणाम माना जाता है।
विज्ञान समय को रैखिक मानता है, लेकिन कुछ शोधकर्ता कहते हैं कि-
- मस्तिष्क संभावित परिणामों का अनुमान लगाता है
- यह अनुमान भविष्य जैसा दिखता होता हैयह चेतना के अनुभव के रूप में “भविष्य की अनुभूति” लग सकता है।
ध्यान
रखें कि यह भविष्य की वास्तविक
जानकारी नहीं, बल्कि संभावित भविष्य का अनुमानित पैटर्न
है।
7. अपराध से पहले अनुभव और वास्तविक उदाहरण
अपराध
से पहले होने वाले “प्री-क्राइम”
अनुभव वे स्थितियाँ हैं, जब व्यक्ति को किसी खतरे या गलत घटना का
आभास पहले से हो जाता है। कई वास्तविक मामलों में लोगों ने बताया है कि उन्हें
किसी स्थान या व्यक्ति के प्रति अचानक असहजता महसूस हुई, और बाद में वही स्थिति जोखिमपूर्ण साबित
हुई। उदाहरण के लिए, कुछ
लोग देर रात सुनसान रास्ते से गुजरते समय अचानक रास्ता बदल देते हैं और बाद में
पता चलता है कि उस इलाके में अपराध हुआ था।
मनोविज्ञान के अनुसार यह पूर्वाभास नहीं, बल्कि अवचेतन संकेतों की पहचान है। व्यक्ति अनजाने में आसपास की गतिविधियों, चेहरे के भाव, आवाज़ या वातावरण को पढ़ लेता है और शरीर चेतावनी संकेत देने लगता है। कानून प्रवर्तन अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों को भी ऐसे अंतर्ज्ञान पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। यह अनुभव दिखाते हैं कि मानव मस्तिष्क संभावित खतरे को जल्दी पहचानकर हमें सुरक्षित रहने में मदद कर सकता है।
जीवन
के कुछ वास्तविक संकेत-
आपने
किसी से मिलने जाना है, पर
अचानक अंदर का “अहसास”
कहता है कि आज मत जाओ।
बाद में पता चलता है कि समय/परिस्थिति
गलत थी।
इसे आप अंतर्ज्ञान कह सकते हैं, न कि भविष्य देखना।
8. ईएमएफ
और ऊर्जा परिवर्तन (क्या संकेत देता है?)
ईएमएफ
(Electromagnetic Fields) और
ऊर्जा परिवर्तन को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या ये शरीर को भविष्य के संकेत
दे सकते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से मानव शरीर स्वयं भी सूक्ष्म विद्युत गतिविधियाँ
उत्पन्न करता है, जैसे
मस्तिष्क की तरंगें और हृदय की धड़कनों से बनने वाले विद्युत संकेत। ये संकेत शरीर
के अंदर संचार और समन्वय के लिए आवश्यक होते हैं।
कुछ शोधों में यह देखा गया है कि बाहरी
ईएमएफ, जैसे
मोबाइल फोन, बिजली
की लाइनों या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले क्षेत्र, शरीर की जैविक प्रक्रियाओं पर हल्का
प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि
अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि ईएमएफ भविष्य की घटनाओं का
संकेत देता है या पूर्वाभास पैदा करता है।
ऊर्जा परिवर्तन की अनुभूति, जैसे बेचैनी या तनाव, अधिकतर मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं से जुड़ी होती है। इसलिए ईएमएफ को भविष्य का संकेत मानने के बजाय इसे शरीर की सामान्य जैविक गतिविधि और पर्यावरणीय प्रभाव के रूप में समझना अधिक उचित माना जाता है।
कुछ
लोग मानते हैं कि-
शरीर वातावरण की ऊर्जा परिवर्तनों को भी
महसूस कर सकता है
जैसे-
·
तूफ़ान
से पहले बेचैनी
·
भूकंप
आने से पहले असामान्य सजगता
·
लेकिन
वर्तमान वैज्ञानिक अनुसंधान में अभी तक यह सिद्ध नहीं हुआ कि शरीर प्राकृतिक ऊर्जा से भविष्य देख
सकता है।
यह
अनुभव अधिकतर-
- बायोफीडबैक
- एनवायर्नमेंटल सेंसरी रिस्पॉन्स
- मस्तिष्क की पैटर्न डिटेक्शन
से उत्पन्न होता है।
9. याद, पूर्वाग्रह और मस्तिष्क की मशीनरी
याद,
पूर्वाग्रह और मस्तिष्क की “मशीनरी” मिलकर यह तय करती हैं कि हम भविष्य के
बारे में कैसे सोचते और प्रतिक्रिया देते हैं। हमारी स्मृतियाँ केवल अतीत का
संग्रह नहीं होतीं, बल्कि
वे अनुभवों के पैटर्न बनाकर मस्तिष्क को जल्दी निर्णय लेने में मदद करती हैं। जब
कोई नई परिस्थिति सामने आती है, तो
मस्तिष्क उसे पुरानी यादों से तुलना करता है और संभावित परिणाम का अनुमान लगाता
है।
पूर्वाग्रह इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं,
जो कभी-कभी निर्णय को तेज बनाते हैं,
लेकिन कई बार गलत दिशा भी दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी नकारात्मक अनुभव के बाद व्यक्ति
समान परिस्थितियों से अनावश्यक डर महसूस कर सकता है।
मस्तिष्क की यह पूरी प्रक्रिया न्यूरॉन्स के जटिल नेटवर्क, भावनाओं और अवचेतन विश्लेषण पर आधारित होती है। इसलिए कई बार हमें लगता है कि हमने भविष्य का पूर्वाभास कर लिया, जबकि वास्तव में यह स्मृति, पूर्वाग्रह और मस्तिष्क की तेज प्रोसेसिंग का संयुक्त परिणाम होता है।
मनुष्य
के अनुभव, यादें और पूर्वाग्रह मिलकर
अंतर्ज्ञान को प्रभावित करते हैं।
उदाहरण-
- अगर किसी को बार-बार बारिश में भीगने का बुरा अनुभव रहा हो
- अगली बार बादल दिखते ही शरीर सतर्कता महसूस करेगा।
यह भविष्य देखना नहीं, अनुभव आधारित अनुमान है।
10. निष्कर्ष
क्या मानव शरीर सच में “भविष्य” को महसूस कर सकता है? सीधे तौर पर जीवविज्ञान या तंत्रिका विज्ञान अभी तक साबित नहीं कर पाया है कि मानव शरीर भविष्य के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त कर सकता है।
परन्तु
शरीर और मस्तिष्क मिलकर-
- घटनाओं से पहले संभावित परिणामों का अनुमान लगा सकते हैं
- अवचेतन पैटर्न पहचान / अंतर्ज्ञान के माध्यम से संकेत दे सकते हैं
मानव शरीर भविष्य को खुद पढ़ नहीं सकता, लेकिन यह शरीर-मानसिक प्रक्रिया संभावित
परिणामों को महसूस कर सकता है, जिसे
हम गलती से “भविष्य
की अनुभूति” मान
लेते हैं।
अंततः यह कहा जा सकता है कि मानव शरीर भविष्य को सीधे
देखने या जानने की क्षमता नहीं रखता, लेकिन यह संभावनाओं को महसूस करने में अत्यंत सक्षम
है। हमारा मस्तिष्क अतीत की स्मृतियों, वर्तमान संकेतों और अनुभवों को मिलाकर लगातार भविष्य
की स्थितियों का अनुमान लगाता रहता है। इसी प्रक्रिया के कारण हमें कई बार
पूर्वाभास या “गट फीलिंग” का अनुभव होता है। वास्तव में यह
कोई रहस्यमयी शक्ति नहीं, बल्कि चेतन और अचेतन मन, जैविक संकेतों, हार्मोनल प्रतिक्रियाओं और
न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों का संयुक्त परिणाम है।
शरीर में होने वाले सूक्ष्म बदलाव, जैसे दिल की धड़कन बढ़ना, बेचैनी महसूस होना या अचानक
सतर्कता, संकेत देते हैं कि मस्तिष्क संभावित जोखिम या अवसर को
पहचान रहा है। साथ ही, स्मृतियाँ और पूर्वाग्रह भी निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित
करते हैं, जिससे कभी सही तो कभी गलत अनुमान
बन सकते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण यह स्पष्ट करता है कि “भविष्य का एहसास” वास्तव में मस्तिष्क की उन्नत
भविष्यवाणी प्रणाली है, जो हमें सुरक्षित और तैयार रहने
में मदद करती है। इसलिए यह कहना अधिक उचित है कि मानव शरीर भविष्य को
महसूस नहीं करता, बल्कि अनुभवों के आधार पर
संभावनाओं को समझकर प्रतिक्रिया देता है। यही क्षमता हमें बेहतर निर्णय लेने और
जीवन की अनिश्चितताओं का सामना करने में सक्षम बनाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या इंसान का पूर्वाभास
सच में भविष्य पर आधारित होता है?
नहीं-यह अनुभव, पैटर्न पहचान और अवचेतन अनुमान पर आधारित होता है, न कि भविष्य की सटीक जानकारी पर।
क्या अंतर्ज्ञान
का संबंध मस्तिष्क के हिस्से से है?
हाँ, स्वदेशी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स और संवेदी तंत्रिका तंत्र
अंतर्ज्ञान विभाग से जुड़े हैं।
क्या भविष्य की
सार्थक जानकारी इंसान को मिल सकती है?
वर्तमान विज्ञान के अनुसार नहीं। हम संभावित परिणामों का
अनुमान लगा सकते हैं पर सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते।
मानव शरीर से जुड़े अध्ययन और हमारी खोज को आप किस नजरिये
से देखते हैं ,अपने कमेन्ट के माध्यम से हमें जरुर सूचित करें ,और अपने
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